बांग्लादेश चुनाव परिणाम : चुनौतियों के बीच भारत से बेहतर संबंध रखना चाहेगी बीएनपी

Bangladesh Election Results : बांग्लादेश में हुए आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी को बड़ी जीत मिली है और यह लगभग तय है कि बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान ही देश के प्रधानमंत्री होंगे. बांग्लादेश में पिछले डेढ़ साल से जिस तरह की अराजकता थी, उम्मीद की जा रही है कि वो समाप्त हो जाएगी और वहां के युवाओं को सरकार से जो अपेक्षाएं हैं वो पूरी होंगी. भारत और बांग्लादेश के संबंधों पर भी इस चुनाव का असर दिखेगा. हमारे कुछ एक्सपर्ट्स ने बांग्लादेश चुनाव परिणाम को इस तरह डिकोड किया.

Bangladesh Election Results : बांग्लादेश भारत का पड़ोसी मुल्क है और दोनों के संबंध बांग्लादेश के निर्माण से ही रहे हैं. अगर यह कहा जाए कि बांग्लादेश को आजाद करवाने में भारत की अहम भूमिका है तो गलत नहीं होगा. विगत कुछ वर्षों से भारत-बांग्लादेश के संबंध थोड़े अस्थिर से हुए हैं. इस चुनाव के बाद दोनों देशों के संबंधों पर क्या असर होगा इसे समझने की कोशिश करते हैं.

बीएनपी के सामने चुनौतियां भी होंगी

राजन कुमार, प्रोफेसर, स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज, जेएनयू

बांग्लादेश में बीएनपी की चुनावी जीत बताती है कि यह देश राजनीतिक रूप से पूरी तरह ध्रुवीकृत और विभाजित है. चूंकि बीएनपी दो-तिहाई बहुमत के साथ सत्ता में आ रही है, इससे कम से कम कुछ समय के लिए बांग्लादेश में राजनीतिक स्थिरता आयेगी, एक स्थिर सरकार बनेगी. पर बीएनपी के सामने इस समय बहुत सारी चुनौतियां भी हैं. शेख हसीना सरकार के समय बांग्लादेश की आर्थिक स्थिति अच्छी थी, देश का ग्रोथ रेट अच्छा था, वहां के व्यापार की स्थिति भी अच्छी थी. राजनीतिक संतुलन भी था. पर इस सरकार के पतन के बाद स्थितियां विपरीत हो गयी हैं. ऐसे में बीएनपी के सामने आर्थिक विकास की प्रक्रिया को फिर से बहाल करना सबसे बड़ी चुनौती होगी. इसके साथ ही भारत के साथ राजनीतिक संबंध को फिर से सुधारने की चुनौती भी उनके सामने होगी. सुरक्षा की बात करें, तो सबसे बड़ा डर यह है कि बीएनपी कट्टरपंथियों को किस तरह नियंत्रित करती है. वह ऐसा कर भी पायेगी या नहीं, यह देखना होगा. क्योंकि यदि बांग्लादेश में हिंदू विरोधी मानसिकता बनी रही और हिंदुओं को प्रताड़ित करना जारी रहा, अल्पसंख्यकों पर अत्याचार जारी रहा, तो उसका सीधा असर बांग्लादेश-भारत संबंध पर पड़ेगा.

भारत के लिए इस समय सबसे बड़ी चुनौती वहां के सांप्रदायिक और भारत विरोधी तत्व हैं. भारत के लिए दूसरी सबसे बड़ी चुनौती बांग्लादेश में पाकिस्तान का बढ़ता प्रभाव है. बीएनपी उसे बढ़ने देती है या नियंत्रित करने की कोशिश करती है, उसका प्रभाव भी दोनों देशों के संबंध पर पड़ेगा. तीसरा, चीन का जो प्रभाव है, उसे बीएनपी किस तरह नियंत्रित कर पाती है, इसका भी प्रभाव भारत-बांग्लादेश संबंध पर पड़ेगा. भारत के लिए एक और चुनौती आतंकवाद है. शेख हसीना सरकार के पहले बीएनपी की जो सरकार थी, उस समय बहुत से आतंकवादी संगठन बांग्लादेश के माध्यम से भारत में आतंक फैलाने में जुटे हुए थे. उन सारे समूहों को बीएनपी सरकार कंट्रोल करती है या नहीं, यह देखने वाली बात होगी. इन सारे मुद्दों के साथ-साथ बीएनपी के लिए भारत के साथ अपने संबंधों को सुधारने की भी चुनौती है. यह भारत के लिए भी चुनौती है, क्योंकि जिस तरह भारत विरोधी भावनाएं वहां भड़कायी गयी हैं, उसे सुधारने में समय लगेगा. हालांकि दोनों देश एक-दूसरे के साथ संबंध सुधारने की कोशिश में जुटे हुए हैं, और ऐसा करना दोनों देशों की मजबूरी भी है.

—————————

भारत से अच्छे रिश्ते रखना चाहेगी बीएनपी

आनंद कुमार, एसोसिएट फेलो, एमपीआइडीएसए

 बीएनपी की इतनी शानदार जीत की उम्मीद नहीं थी, क्योंकि सर्वे में बीएनपी और जमात के बीच का फर्क ज्यादा नहीं था. गारमेंट सेक्टर में काम करने वाली महिलाओं ने भारी संख्या में बीएनपी को वोट दिया, क्योंकि उन्हें जमात पर भरोसा नहीं था. इसके बावजूद जमात का प्रदर्शन अब तक का सबसे बढ़िया रहा. यह बांग्लादेश के भविष्य का चिंताजनक संकेत हो, तो आश्चर्य नहीं. खालिदा जिया के दौर में जमात भले ही बीएनपी की सहयोगी रही हो, पर अब खुद बीएनपी जमात से दूरी बनाना चाहेगी.

नयी संसद के अलावा नये संविधान के लिए भी वोटिंग हुई. बीएनपी ने भले ही संविधान संशोधन का विरोध नहीं किया था, पर अपने घोषणापत्र में उसने इसका जिक्र नहीं किया था. ऐसे में, मानने का कारण है कि वह संविधान संशोधन के रास्ते पर नहीं जायेगी. ऐसे में, मोहम्मद यूनुस का भविष्य क्या होगा, यह सोचने की बात है. हालांकि इसकी गारंटी नहीं दी जा सकती कि बीएनपी की नयी सरकार अपनी धर्मनिरपेक्ष छवि गढ़ेगी ही. पार्टियां चुनाव से पहले जो वादे करती हैं, उन पर पूरी तरह अमल करना जरूरी नहीं. बांग्लादेश की नयी सरकार भारत के साथ अच्छे रिश्ते रखना चाहेगी, क्योंकि भारत बड़ा देश है, जिसकी अनदेखी नहीं कर सकते.

—————————

पहले की नीति में बदलाव लायेगी बीएनपी  

अनिल त्रिगुणायत, पूर्व राजनयिक

बांग्लादेश में चूंकि दो ही मुख्य राजनीतिक पार्टियां रही हैं, और अवामी लीग को चुनावी मैदान से बाहर कर दिया गया, ऐसे में मतदाताओं ने एकजुट होकर बीएनपी को वोट दिया है. मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार कुछ कर नहीं पाई, इसलिए लोगों में गुस्सा तो था ही. दरअसल तारिक रहमान के कुछ बयानों का अच्छा संदेश गया है, ऐसे में, मानना चाहिए कि बीएनपी अपनी पिछली नीतियों में बदलाव लायेगी और धर्मनिरपेक्ष छवि बनाने की कोशिश करेगी. जहां तक भारत-बांग्लादेश रिश्ते की बात है, तो चुनाव की घोषणा के बाद से ही हमारी ओर से बीएनपी जतायी गयी. पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में विदेश मंत्री जयशंकर पहुंचे थे, और बीएनपी की जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को बधाई संदेश भेजा. द्विपक्षीय रिश्ते बेहतर होने की उम्मीद है.  

—————————

नयी सरकार में यूनुस का कोई भविष्य नहीं

सुबीर भौमिक, वरिष्ठ पत्रकार

तारिक रहमान को पता है कि उनकी पार्टी को मिली शानदार जीत यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार की नाकामी का नतीजा है. इसलिए बीएनपी की नयी सरकार कानून-व्यवस्था और अपनी छवि पर ध्यान देगी. जहां तक संविधान संशोधन के लिए किये गये जनमत संग्रह का सवाल है, तो बीएनपी के इस मुद्दे पर शुरू से ही जमात-एनसीपी गठबंधन से मतभेद थे. भारी जीत के बाद अब बीएनपी पर इसे लागू करने का दबाव नहीं होगा, लेकिन जमात इसके विरोध में सड़कों पर उतर सकती है. मुझे नहीं लगता कि इस चुनावी नतीजे के बाद बांग्लादेश की राजनीति में मोहम्मद यूनुस का कोई भविष्य है. चूंकि जमात पीछे रह गयी है, ऐसे में बीएनपी यूनुस को राष्ट्रपति बनाने के बारे में विचार नहीं करेगी.

भारत के लिए बीएनपी और तारिक रहमान मौजूदा विकल्पों में सबसे अच्छे हैं. बीएनपी की नयी सरकार के साथ कई मुद्दों पर भारत के गंभीर मतभेद बने रह सकते हैं, इसके बावजूद आपसी संबंध सामान्य बने रहने की उम्मीद है. आखिर तारिक रहमान भी यह जानते होंगे कि पाकिस्तान उन्हें आतंकवाद के सिवा कुछ नहीं दे सकता. ऐसे में, बीएनपी के पाकिस्तान से रिश्ते पहले जैसे नहीं रहने वाले.

ये भी पढ़ें : क्या खालिदा के बेटे तारिक रहमान भारत–बांग्लादेश संबंधों को देंगे ऊंचाई या कायम रहेगी अराजकता

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >