लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्ताव पास हुआ, तो क्या सरकार पर होगा कोई असर?

Lok Sabha Speaker Om Birla : लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पर भेदभावपूर्ण व्यवहार करने और विपक्ष की आवाज अनसुनी करने का आरोप लगा है. लोकतांत्रिक व्यवस्था में सबको अपनी बात कहने का हक होता है, विपक्ष को भी यह अधिकार है कि वह अपनी बात कहे. इस आलेख में यह जानकारी दी जा रही है कि अगर किसी लोकसभा अध्यक्ष को पद से हटाने के लिए नोटिस दिया जाता है, तो आगे की क्या प्रक्रिया है और अगर प्रस्ताव पास हो जाता है तो उसका असर सरकार पर और लोकसभा अध्यक्ष पर क्या होगा?


Lok Sabha Speaker Om Birla : ओम बिरला को पद से हटाने के लिए कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने संविधान के अनुच्छेद 94 (C) के तहत लोकसभा सचिवालय को नोटिस सौंपा है. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रस्ताव की जांच करने और आगे की कार्रवाई तेजी से करने को कहा है. विपक्ष का कहना है कि संसद में उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया जाता है और अध्यक्ष का व्यवहार भेदभावपूर्ण है. अध्यक्ष को पद से हटाने के प्रस्ताव पर विपक्ष के 100 से अधिक सांसदों ने हस्ताक्षर किया है.

लोकसभा अध्यक्ष को पद से हटाने के लिए क्या किया जाता है?

भारत की संसदीय व्यवस्था में लोकसभा अध्यक्ष का पद बहुत महत्वपूर्ण है. यह पद बहुत जिम्मेदारी से भरा होता है. इस पद पर बैठे व्यक्ति को धैर्यवान और शांतचित्त का होना चाहिए, तभी वह पूरी निष्ठा से बिना पक्षपात के सदन की कार्यवाही का संचालन कर पाएगा. विधायी मामलों के जानकार अयोध्यानाथ मिश्र ने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 94(ग) के अनुसार किसी भी लोकसभा अध्यक्ष को हटाने के लिए नोटिस दिया जा सकता है. हां, उन्हें हटाने के लिए जो प्रक्रिया है, उसे अविश्वास प्रस्ताव नहीं कहा जाता है. बस उन्हें पद से हटाने की प्रक्रिया होती है. विपक्ष को अगर यह लगता है कि उनके हितों की अनदेखी हो रही है और उनके साथ भेदभाव हो रहा है, तो वे नोटिस में स्पष्टता के साथ अपनी बात कहकर नोटिस दे सकते हैं. नोटिस में बातें बिलकुल स्पष्ट होनी चाहिए, वह आरोप या मानहानि जैसी नहीं होनी चाहिए. तर्क–वितर्क, व्यंग्य और गलत शब्दों में इसे प्रस्तुत नहीं किया जाएगा.

नोटिस प्राप्त होने के 14 दिन बाद ही प्रस्ताव सदन में लाया जाएगा

लोकसभा

नोटिस के 14 दिन के बाद ही लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्ताव सदन में लाया जाएगा. अयोध्या नाथ मिश्र बताते हैं कि इस प्रस्ताव के लिए यह बताना जरूरी होता है कि कम से कम 50 सांसद इस प्रस्ताव के समर्थन में हैं. उससे कम में यह प्रस्ताव सदन में नहीं लाया जा सकता है.

सदन में प्रस्ताव पर होती है बहस

लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ जब प्रस्ताव सदन में आता है, तो पक्ष और विपक्ष के सांसद इसपर बहस करते हैं. हालांकि यह बहस घंटों नहीं चलती है. बहस सीमित होती है. उसके बाद प्रस्ताव पर मतदान होता है. अगर प्रस्ताव के पक्ष में यानी अध्यक्ष को पद से हटाने के समर्थन में बहुमत से वोटिंग होती है, तो लोकसभा अध्यक्ष को पद त्यागना पड़ता है और अगर प्रस्ताव के विरोध में बहुमत होता है, तो प्रस्ताव निरर्थक हो जाता है और अध्यक्ष पद पर बने रहते हैं. चूंकि अध्यक्ष सत्तापक्ष का सदस्य होता है और सत्तापक्ष बहुमत में होता है, इसलिए अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्ताव के पास होने की उम्मीद बहुत कम होती है.

प्रस्ताव जब संसद में आता है, तो कौन करता है सदन का संचालन?

लोकसभा अध्यक्ष को पद से हटाने के लिए जब प्रस्ताव सदन में पेश किया जाता है, अध्यक्ष सदन का संचालन नहीं करते हैं. उपाध्यक्ष या कोई अन्य व्यक्ति जिसे सदन के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी जाती है, वह कार्यवाही का संचालन करता है. इसकी वजह यह है कि प्रस्ताव अध्यक्ष के खिलाफ होता है.

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क्या प्रस्ताव पास हुआ तो सरकार पर होगा कोई असर?

लोकसभा अध्यक्ष को पद से हटाने के लिए लाया गया प्रस्ताव अगर सदन में साधारण बहुमत से पास हो जाता है, तो अध्यक्ष अपने पद पर कायम नहीं रह सकता है, लेकिन सरकार पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता है. लोकसभा का अध्यक्ष मात्र सदन का संचालक होता है, उसके ऊपर यह जिम्मेदारी होती है कि वह सदन को पूरी गरिमा और भेदभाव के बिना चलाए. उसकी सरकार चलाने में कोई भूमिका नहीं होती है, इसलिए उन्हें हटाए जाने से सरकार पर कोई असर नहीं होता है.

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लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

राजनीति,सामाजिक, इतिहास, खेल और महिला संबंधी विषयों पर गहन लेखन किया है. तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन में रुचि. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक. IM4Change, झारखंड सरकार तथा सेव द चिल्ड्रन के फेलो के रूप में कार्य किया है. पत्रकारिता के प्रति जुनून है. प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव.

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