कौन है भविता मांडवा, जो ब्रिटिश वोग मैगजीन पर छपने वाली दूसरी भारतीय महिला बनी?

Bhavitha Mandava : भविता मांडवा, क्या आप इस नाम से परिचित हैं? अगर नहीं तो जानिए कि ये वो लड़की है जिसने फैशन इंडस्ट्री में ब्यूटी स्टैंडर्ड्स को फिर से डिफाइन करने का काम किया है. हालांकि भविता मांडवा के पहले भी कई इंडियन डस्की स्किन की माॅडल्स फैशन इंडस्ट्री में आईं, लेकिन ब्रिटिश वोग मैगजीन पर सोलो पब्लिश होने वाली वो सिर्फ दूसरी महिला हैं. बदलकर रख दिया है. वोग मैगजीन को फैशन इंडस्ट्री का बाइबिल कहा जा सकता है क्योंकि इसके अनुसार ही फैशन के ट्रेंड्‌स सेट होते हैं.

Bhavitha Mandava : भविता मांडवा भारत की दूसरी ऐसी महिला हैं, जिन्हें ब्रिटिश वोग मैगजीन में जगह मिली है. भविता मांडवा की यह उपलब्धि इतिहास रचने की भांति हैं. इसकी वजह यह है कि भविता मांडवा दूसरी ऐसी भारतीय हैं, जिन्होंने भारतीय सौंदर्य यानी डस्की स्किन टोन के साथ यह अवसर प्राप्त किया है. उनसे पहले प्रियंका चोपड़ा ने यह इतिहास बनाया था और प्रियंका चोपड़ा भी भारत के डस्की टोन की मल्लिका हैं.

कौन है भविता मांडवा?

भविता मांडवा मैथ्यू ब्लेजी के साथ

भविता मांडवा एक तेलुगू परिवार में जन्मी युवती हैं. 25 साल की 5 फुट 9 इंच लंबी इस माॅडल का बचपन हैदराबाद में गुजरा है. उन्होंने हैदराबाद के जवाहरलाल नेहरू प्रौद्योगिकी विश्वविश्वविद्यालय से आर्किटेक्चर में ग्रेजुएशन किया है. उसके बाद उन्होंने न्यूयार्क में आगे की पढ़ाई की है. उसी दौरान भविता की पहचान डिजाइनर मैथ्यू ब्लेजी से हुई और भविता को 2025 के स्प्रिंग/समर शो में विशेष माॅडल के रूप में रैंप वाॅक करने का मौका मिला. इसके बाद भविता मंडावा मेटियर्स डीआर्ट 2026 शनेल फैशन शो को ओपन करने वाली माॅडल बनीं. भविता का यह एचीवमेंट बहुत ही खास है क्योंकि वह ऐसा करने वाली पहली भारतीय महिला हैं.

मार्च 2026 में भविता और जनवरी 2023 में प्रियंका को मिली थी वोग के कवर पेज पर जगह

वोग की पत्रिका पर भविता की जो तस्वीर छपी है उसमें वह ऑरेंज कलर की फर वाली जैकेट पहनी हुई हैं. उनके जैकेट पर काले और सफेद रंग की धारियां भी बनी हुई हैं. उनके बाल खुले हैं और लहराते बादल की तरह लग रहे हैं. भविता के चेहरे पर बहुत ही खूबसूरत मुस्कान खिल रही है और मैगजीन के कवर पेज पर टैग लाइन छपा है Feel the joy, A new mood of spring.

इससे यह साफ जाहिर है कि यह फैशन स्प्रिंग सीजन यानी वसंत ऋतु को ध्यान में रखकर बनाया गया है. इस तस्वीर का बैकग्राउंड चमकीला नीला है और फेदरी जैकेट के साथ भविता ने स्कर्ट कैरी किया है. उसका अंदाज आत्मविश्वास से परिपूर्ण नजर आ रहा है. उन्होंने हैंगिंग एमरल्ड इयररिंग्स पहना है, जो उसके लुक को और भी बेहतरीन बना रहे हैं.  

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क्या भारतीय महिलाओं को ट्रेडिशनल रूप से सुंदर माना जाता है?

भविता ने अपने इंटरव्यू में यह कहा है कि शैनेल फैशन शो की ओपनिंग मेरे लिए बहुत ही खास थी. पश्चिम के देशों में मेरी इस उपलब्धि ने इस आइडिया को जन्म दिया कि क्या भारतीय महिलाओं को ट्रेडिशनल रूप में सुंदर माना जा सकता है? भारत में रंगभेद हावी है इससे इनकार नहीं किया जा सकता और सुंदरता का पहला मापदंड ही यही है कि लड़की को गोरी होना चाहिए.

वैसी दुनिया में भविता मांडवा की एचीवमेंट बहुत ही मायने रखती है. वोग की पत्रिका पर भविता मांडवा के पहले भी कई डस्की स्किन वाली लड़कियों ने जगह बनाई है, लेकिन उनकी संख्या बहुत सीमित है, जिनमें प्रियंका चोपड़ा भी एक हैं. फैशन इंडस्ट्री में डस्की स्किन की माॅडल्स का जलवा भी आजकल खूब चल रहा है और इसने सुंदरता की परिभाषा को बदलकर रख दिया है.

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By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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