Genghis Khan : क्या वहशी था चंगेज खान, फिर कैसे उसने विश्व में सबसे बड़ा साम्राज्य खड़ा किया?

Genghis Khan : चंगेज खान, इस नाम की जब भी चर्चा होती है, तो एक बेहद ही क्रूर व्यक्ति का चेहरा जेहन में उभरता है. यह व्यक्ति कितना क्रूर होगा, इसे ऐसे समझा जा सकता है कि उसकी एक भी तस्वीर उसके जीवित रहते नहीं बनाई गई थी. चंगेज खान के नाम से यह गलतफहमी होती है कि वो एक मुसलमान शासक था, जबकि सच्चाई यह है कि वह एक मंगोल था. चंगेज खान एक उपाधि थी, जिसका अर्थ होता है सर्वोच्च सत्ता.

Genghis Khan : चंगेज खान, यह नाम इतिहास में काफी चर्चित रहा है. उसके बारे में कई कथाएं प्रचलित हैं, जो उसे एक भयंकर शासक बनाती हैं. यहां सवाल यह है कि अगर चंगेज खान इतना खतरनाक था, तो फिर उसने कैसे विश्व में इतना बड़ा साम्राज्य खड़ा किया, जिसे जुड़े हुए भू–भाग में सबसे बड़ा माना जाता है? उसने अपनी शासन व्यवस्था में कई ऐसी चीजें शामिल की, जो बहुत अच्छी और भविष्य को ध्यान में रखकर बनाई गई थीं.

कौन था चंगेज खान?

चंगेज खान एक मंगोल शासक था. मंगोल लोग मध्यएशिया में रहते थे और आज के मंगोलिया देश जिसकी सीमा चीन और रूस से लगती है, वहीं उनका निवास स्थान था. मंगोल जहां रहते थे वह मरुस्थल था, इसलिए उनका जीवन कठिन था. चंगेज खान का जन्म 1155 से 1167 के बीच हुआ माना जाता है. उसके पिता एक मंगोल सरदार थे. चंगेज खान के पिता मंगोलों के सरदार थे. चंगेज खान का बचपन का नाम तेमुजिन था. जब चंगेज खान मात्र 8 साल का था उसी वक्त उसके पिता की मौत हो गई, जिसके बाद उनके परिवार को कबीले से निकाल दिया गया था, जिसकी वजह से चंगेज खान की मां के लिए यह बहुत कठिन हो गया था कि वह कैसे अपने बच्चों का लालन– पालन करे.

क्या वहशी था चंगेज खान

चंगेज खान महत्वकांक्षी था और अपने पिता की विरासत को वापस लेने के लिए उसने मंगोलों के कबीलों को एकजुट करना शुरू किया और अपना प्रभाव बनाने के लिए उसने 10–12 साल की उम्र में ही अपने सौतेले बड़े भाई का खून कर दिया था. चंगेज खान को दुश्मन कबीलों का गुलाम बनकर भी रहना पड़ा. उसने संघर्ष के दिनों में जीवटता सीखी और बहुत हिम्मत दिखाई. चंगेज खान को कुत्तों से बहुत डर लगता था, वह कुत्तों के डर से रोने लगता था, लेकिन संघर्ष करते–करते वह जब शासक बना, तो उसने अपने दुश्मनों को रूलाया और हर डर के ऊपर जीत हासिल कर ली.

क्या चंगेज खान सिर्फ एक क्रूर शासक था?

चंगेज खान के बारे में आम आदमी की राय यह है कि वह एक बेहद क्रूर व्यक्ति था, जिसने अपने दुश्मनों को क्रूरता के साथ हराया, उनकी औरतों के साथ दुर्व्यवहार किया और अपने हरम में महिलाओं की संख्या बढ़ाई, जहां वह उनके साथ अमानवीय व्यवहार करता था. लेकिन GENGHIS KHAN and the Making of the Modern World किताब के लेखक JACK WEATHERFORD इसे सच नहीं मानते हैं. वह कहते हैं कि बेशक चंगेज खाधन एक क्रूर व्यक्ति था, लेकिन वह अपने दुश्मनों के लिए क्रूर था. उसने अपने लोगों के लिए शासन की कई ऐसी व्यवस्थाएं बनाई, जो उस समय से काफी आगे थीं. चंगेज खान ने मंगोल कबीलों का एकीकरण किया, उनके साम्राज्य का विस्तार किया और चीन से यूरोप तक मंगोलों की राज्य का विस्तार किया. चंगेज खान ने कई नई व्यवस्थाएं बनाईं, जैसे उसने योग्यता के आधार पर पद दिया. टैक्स प्रणाली विकसित की और सिल्क वे को सुरक्षित करके व्यापार को आसान बनाया.

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क्या महिलाओं के प्रति काफी वहशी था चंगेज खान?

इतिहास में अगर झांक कर देखें तो महिलाओं को हर सभ्यता में युद्ध के बाद लूट की वस्तु के तौर पर देखा जाता था, जिनकी अपनी कोई इच्छा नहीं होती थी और ना ही उनका मान–सम्मान होता था. जब कोई राज्य चंगेज खान के सामने हथियार डाल देता था, वहां से लड़कियों को उठाया जाता था और फिर चंगेज खान के खाते में सुंदर और कुलीन महिलाओं को डाला जाता था, बाकी औरतों को आपस में बांट लिया जाता था. वो औरतें चंगेज खान की पत्नी, उपपत्नी और रखैल बनती थी, निश्चित तौर पर उनका उपयोग उसी तरह होता होगा जिसे अपराध की श्रेणी में रखा गया है.

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लेखक के बारे में

Author: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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