मुसाफिरों के लिए आफत हैं चुनाव

Published at :09 May 2014 4:29 AM (IST)
विज्ञापन
मुसाफिरों के लिए आफत हैं चुनाव

मैं चुनाव आयोग का ध्यान इस तथ्य की ओर खींचना चाहूंगा कि सरकारी कामकाज और राजनीतिक रैलियों के चलते इन दिनों रोडवेज और निजी बसों की भयंकर कमी हो गयी है. गरमी में यातायात के साधनों का खराब हाल हो, तो व्यवस्था कैसे पटरी पर रहेगी? दरअसल, राजनीतिक पार्टियां अपनी रैलियों और सभाओं में भीड़ […]

विज्ञापन

मैं चुनाव आयोग का ध्यान इस तथ्य की ओर खींचना चाहूंगा कि सरकारी कामकाज और राजनीतिक रैलियों के चलते इन दिनों रोडवेज और निजी बसों की भयंकर कमी हो गयी है. गरमी में यातायात के साधनों का खराब हाल हो, तो व्यवस्था कैसे पटरी पर रहेगी? दरअसल, राजनीतिक पार्टियां अपनी रैलियों और सभाओं में भीड़ जुटाने के लिए अधिक से अधिक स्थानीय वाहनों पर पहले ही कब्जा कर लेती हैं.

दूसरी तरफ, सरकारी वाहनों को इस समय चुनाव के कामकाज में लगा दिया जाता है. नतीजतन, मुसाफिरों को काफी दिक्कतें होती हैं. न केवल छोटी दूरी, बल्कि लंबी दूरी की बसें भी नहीं मिल पाती हैं. इन सबका खमियाजा आर्थिक गतिविधियों को भी भुगतना पड़ता है. अगर लंबी चुनाव प्रक्रिया से देश को आर्थिक नुकसान पहुंच रहा है, तो नुकसान को कम करने के क्या रास्ते हो सकते हैं, इस बारे में सोचना चाहिए. पाखी कुमारी

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola