डाकू पर्यटन केंद्र

Updated at : 05 Mar 2018 6:48 AM (IST)
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डाकू पर्यटन केंद्र

II आलोक पुराणिक II वरिष्ठ व्यंग्यकार करीब 72 बार उस टीवी चैनल ने उस बैंक की मुंबईवाली वह शाखा दिखायी, जहां से करीब 13 हजार करोड़ रुपये पार कर दिये गये थे. पब्लिक भभ्भड़ मचाये दे रही थी वह ठिकाना देखने के लिए. पब्लिक की दिलचस्पी लूट-पाट के ठिकानों में बहुत होती है. कुछ दशक […]

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II आलोक पुराणिक II
वरिष्ठ व्यंग्यकार
करीब 72 बार उस टीवी चैनल ने उस बैंक की मुंबईवाली वह शाखा दिखायी, जहां से करीब 13 हजार करोड़ रुपये पार कर दिये गये थे. पब्लिक भभ्भड़ मचाये दे रही थी वह ठिकाना देखने के लिए. पब्लिक की दिलचस्पी लूट-पाट के ठिकानों में बहुत होती है. कुछ दशक पहले चंबल का इलाका डाकुओं के लिए जाना जाता था. उस इलाके से गुजरनेवाली बसों और रेलगाड़ियों में लोग बताते थे कि यह वही इलाका है, जहां फलां डाकू रहता है. ग्वालियर के किले में उन ठिकानों को बताया जाता है, जहां चंबल की कसम फिल्म की शूटिंग हुई थी.
कुछ समय पहले यह बात भी सामने आयी थी कि कर्नाटक में करीब 7.5 करोड़ रुपये खर्च करके शोले का रामगढ़ गांव विकसित किया जायेगा. इसमें शोले के कालजयी डायलागों और दृश्यों पर आधारित एक शो भी बनाया जायेगा. पब्लिक को डाकू बहुत प्यारे होते हैं, बात सिर्फ गब्बर सिंह की नहीं हो रही है. डाकुओं से पब्लिक इतना प्यार करती है कि उनमें से कुछ को चुनकर अपना प्रतिनिधि तक बना देती है.
गब्बर सिंह इतने पाॅपुलर हुए कि बाद में वह बिस्कुट बेचते पाये गये. डाकू बिस्कुट बेचने के लिए माॅडलिंग करे, ऐसा कमाल इस मुल्क ने देखा है.
डाकू इंश्योरेंस पाॅलिसी बेचें, समझ में आता है. कई इंश्योरेंस पाॅलिसी खालिस डाका हैं. डाकू मोबाइल प्लान बेचें, तो भी समझ में आता है. कई कंपनियों के मोबाइल टेरिफ प्लान भी डाके के स्तर की वारदात होते हैं. पर डाकू बिस्कुट बेचने लग जायें, तो समझ लेना चाहिए कि मुल्क की जनता का डाकुओं से विशेष प्यार है. इसी तरह वह बैंक शाखा भी डाकू पर्यटन केंद्र के तौर पर विकसित की जा सकती है.
गब्बर के भेष में 13 हजार करोड़ के उड़ाऊ दिखाये जाएं. उस शाखा पर कुछ ऐसा साउंड और विजुअल शो विकसित किया जा सकता है- कितने आदमी थे- गब्बर सिंह पूछे.
कालिया बताये- सरदार, अब आदमियों के नंबर का लूट के साइज से कोई रिश्ता नहीं है. एक बंदे को कंप्यूटर पासवर्ड पता हो, तो अरबों पार हो जाते हैं. आप पासवर्ड का जुगाड़ो.
गब्बर सिंह- तो क्या डाकू होने के लिए अब हमको पढ़ना-लिखना पड़ेगा?
सांभा- जी सरदार, अगर आप नेता नहीं हैं, तो बड़ी लूट बिना पढ़ाई के नहीं हो पाती.
गब्बर सिंह- (घमंड में) हम किसी से कम नहीं हैं. अरे ओ सांभा, कितना ईनाम हम पर रखे है सरकार ने?
सांभा- सरदार ओरिजनली तो पचास हजार का इनाम था, इसे बढ़ाकर पांच करोड़ भी कर दिया जाये, तो भी आप 13 हजार करोड़ तक न पहुंच पायेंगे. सरदार, आपका पूरा अड्डा भी उस बैंक की अकेली ब्रांच का मुकाबला न कर पायेगा.
इन्हीं संवादों के साथ अगर उस बैंक की उस ब्रांच पर शो हो, तो 13 हजार करोड़ रुपये इस शो से ही वसूले जा सकते हैं. गब्बर सिंह की कसम!
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