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USA

  • Feb 9 2019 7:58AM

अमेरिका में ग्रीन कार्ड की लंबी वेटिंग, 70 साल बाद आ सकता है नंबर

अमेरिका में ग्रीन कार्ड की लंबी वेटिंग, 70 साल बाद आ सकता है नंबर

नेशनल कंटेंट सेल
-अमेरिकी संसद में ग्रीन कार्ड जारी करने में देशों का कोटा खत्म करने वाला बिल पेश

वाशिंगटन : अमेरिका के ग्रीन कार्ड (स्थायी निवास का कार्ड) बनाने के लिए यदि आप अप्लाई करने की सोच रहे हैं तो इसके लिए आपको करीब 70 साल का इंतजार करना पड़ सकता है. मौजूदा कानून के तहत एक वित्त वर्ष में किसी भी देश के सात फीसदी से अधिक नागरिकों को ग्रीन कार्ड नहीं दिया जा सकता है. अभी अमेरिका प्रति वर्ष करीब 1,40,000 लोगों को ग्रीन कार्ड देता है. इस हिसाब से भारत के खाते में 9800 ग्रीन कार्ड आते हैं.

यूएससीआईएस द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, 2018 में ही रोजगार आधारित प्राथमिकता श्रेणी के तहत 395,025 विदेशी नागरिकों ने ग्रीन कार्ड के लिए अप्लाई किया था. इनमें से 306,601 भारतीय थे. इसका मतलब यह हुआ कि सिर्फ 2018 के अप्लीकेशन को मंजूरी देने में करीब 31 साल लग जायेंगे. इससे लोगों का हो रही परेशानी के मद्देनजर शुक्रवार को अमेरिका के दोनों सदनों में ग्रीन कार्ड में देशों का कोटा खत्म करनेवाला संशोधन पेश किया गया. इसमें एक ही तरह के दो विधेयक पेश किये गये हैं जिनमें हर देश के हिसाब से इस कार्ड पर लगी अधिकतम सीमा समाप्त करने का प्रस्ताव है.

यदि ये विधेयक पारित हो गये तो अमेरिका की स्थायी नागरिकता का इंतजार कर रहे हजारों भारतीय पेशेवरों को फायदा मिल सकता है. रिपब्लिक पार्टी के सांसद माइक ली और डेमोक्रेटिक सांसद कमला हैरिस ने सीनेट में इस एक्ट को पेश किया. इसी तरह का एक अन्य विधेयक फेयरनेस फोर हाई स्किल्ड इमिग्रेंट्स एक्ट (एचआर 1044) सांसदों जोए लॉफग्रेन और केन बक ने हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स में पेश किया. अमेरिका में स्थायी निवास करने के लिए एच-1 बी वीजा धारकों की लंबे समय से मांग है कि उन्हें अमेरिकी नागरिक का दर्जा दिया जाये. करीब 151 साल से अप्रवासी पेशेवर इसकी मांग कर रहे थे.

क्या है ग्रीन कार्ड वीजा

ग्रीन कार्ड वह सुविधा है जिसे प्राप्त कर कोई भी विदेशी नागरिक कुछ शर्तो के साथ अमेरिका में स्थायी रूप से रह सकता है और वहां काम कर सकता है.

पेशेवर आप्रवासी के साथ नहीं होगा भेदभाव : कमला

कमला हैरिस ने कहा कि विविधता में एकता ही हमारी विशेषता है. अमेरिका आने वाले किसी भी पेशेवर के साथ हमें भेदभाव नहीं करना चाहिए क्योंकि वे हमारी अर्थव्यवस्था में योगदान देते हैं. 

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