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ranchi

  • Aug 10 2017 7:47AM

आदिवासी का सिर्फ प्रकृति धर्म है, उन पर कोई और धर्म नहीं थोपा जाये : अग्निवेश

आदिवासी का सिर्फ प्रकृति धर्म है, उन पर कोई और धर्म नहीं थोपा जाये : अग्निवेश
रांची  : आर्य समाज व बंधुआ मजदूर मुक्ति आंदोलन के अध्यक्ष स्वामी अग्निवेश ने कहा कि  आदिवासी प्रकृति को देवता मानते हैं. उनका धर्म प्रकृति है. आदिवासी पर कोई अौर धर्म नहीं थोपा जाये. प्रकृति ही उनके लिए सर्वश्रेष्ठ है. पूरे देश में झारखंड में ही आदिवासियों की स्थिति थोड़ी ठीक है, लेकिन नये-नये कानून से आदिवासियों के साथ अन्याय हो रहा है. पांचवीं अनुसूची व पेशा एक्ट का उल्लंघन हो रहा है. 56 साल के बाद भी आदिवासियों के विकास पर ध्यान नहीं दिया गया. आदिवासी के नाम पर नेता ऊपर तक पहुंच जाते (चाहे वह किसी भी दल के हों) हैं, लेकिन उसके बाद कभी आदिवासी का हित नहीं करते हैं.   

स्वामी अग्निवेश ने बुधवार को आदिवासी बुद्धिजीवी मंच के प्रेमचंद मुर्मू के साथ राज्यपाल द्रौपदी मुरमू से मुलाकात की. उन्हें ज्ञापन भी सौंपा. इस दौरान श्रीमती मुरमू से स्वामी अग्निवेश ने कहा कि पांचवीं अनुसूची व पेशा एक्ट का उल्लंघन हो रहा है. नये-नये कानून बना कर आदिवासियों को उजाड़ा जा रहा है. वे अपनी जमीन से भी वंचित हो रहे हैं. 

राज्यपाल ने भी आश्वस्त किया है कि आदिवासियों के हित व विकास के मुद्दे पर हर मोरचे पर विचार-विमर्श होना चाहिए. शांतिपूर्वक आंदोलन की आवश्यकता है. झारखंड में शीघ्र ही राष्ट्रीय स्तर की संगोष्ठी होगी, जिसमें कई विचार उभर कर सामने आयेंगे. स्वामी अग्निवेश ने कहा कि  आदिवासियों को माओवादियों का समर्थक बता कर उनके ऊपर जुल्म ढाये जा रहे हैं. झारखंड में भी बिहार की तरह पूरी तरह से शराबबंदी होनी चाहिए. शराब से कई समाज प्रभावित हो रहे हैं. हर तबका परेशान है. वे स्वयं झारखंड में शराबबंदी को लेकर आंदोलन चलायेंगे.

उन्होंने कहा कि राज्यपाल भी शराबबंदी के पक्ष में हैं. सरकार शराब बेच रही है, इससे दुखद बात और क्या हो सकती है. राजस्व कमाने के और भी तरीके हैं. उन्होंने कहा कि बस्तर में आदिवासियों पर घोर अन्याय हो रहा है. वहां दलित/मुसलिम से ज्यादा अन्याय अादिवासियों पर हो रहा है. गुजरात चुनाव के मद्देनजर मेधा पाटकर को गलत तरीके से पकड़ा गया है. उन्हें एक तरह से बंधक बना लिया गया है. वह जनहित में कुछ कहना भी चाहती हैं, तो नहीं बोलने दिया जा रहा है.
 

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