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pakur

  • Dec 15 2018 11:03AM

Jharkhand : सिदो-कान्हू मेला में इस बार नहीं होगी Kissing प्रतियोगिता

Jharkhand : सिदो-कान्हू मेला में इस बार नहीं होगी Kissing प्रतियोगिता
File Photo.

पाकुड़ : झारखंड के प्रसिद्ध सिदो-कान्हू मेला में इस बार विवादास्पद दुलड़-चों (चुंबन) प्रतियोगता नहीं होगी. प्रशासन ने इस प्रतियोगिता पर रोक लगा दी है. पिछले साल इस प्रतियोगिता पर खूब बवाल मचा था.

अनुमंडल पदाधिकारी जितेंद्र कुमार देव ने यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि लिट्टीपाड़ा थाना क्षेत्र के डुमरिया में दो दिवसीय सिदो-कान्हू मेला शनिवार से शुरू हो रहा है. मेला के दौरान दुलड़-चों (चुंबन) प्रतियोगिता का आयोजन नहीं किया जायेगा. सार्वजनिक स्थल पर चुंबन प्रतियोगिता निषिद्ध है. इसके आयोजन पर प्रशासन ने प्रतिबंध लगा दिया है.

एसडीएम ने बताया कि मेला के दौरान विधि-व्यवस्था बनाये रखने के लिए अधिकारियों एवं कर्मियों की तैनाती की गयी है. दो वरीय दंडाधिकारी समेत आठ दंडाधिकारियों की तैनाती मेला क्षेत्र में की गयी है. इसके अलावा भारी संख्या में लाठी बल, महिला पुलिस, सशस्त्र बल को तैनात किया गया है.

सूत्रों ने बताया कि दुलड़-चों प्रतियोगिता का आयोजन हो सकता है. इसका फैसला आयोजन समिति करेगी. एसडीएम ने कहा कि किसी भी स्तर पर यदि ऐसा होता है, तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी. बताया कि लिट्टीपाड़ा बीडीओ एवं थाना प्रभारी से इस सिलसिले में रिपोर्ट मांगी गयी थी. थाना प्रभारी ने कहा है कि दुलड़-चों प्रतियोगिता के आयोजन से क्षेत्र में शांति भंग हो सकती है. तनाव उत्पन्न हो सकता है. विधि-व्यवस्था खराब हो सकती है.

साइमन मरांडी करेंगे उद्घाटन

मेला आयोजन समिति के अध्यक्ष बाबूजी मरांडी ने बताया कि शनिवार को स्थानीय विधायक साइमन मरांडी मेला का उद्घाटन करेंगे. मेला आयोजन को लेकर समिति द्वारा व्यापक तैयारियां की जा रही हैं. मेला में सांस्कृतिक प्रतियोगिता के अलावा संताली नृत्य, गीत का कार्यक्रम भी होगा. साथ ही ऑर्केस्ट्रा, आतिशबाजी का भी कार्यक्रम तय है.

विधायक ने बताया प्रेम का प्रदर्शन

लिट्टीपाड़ा के विधायक का कहना है कि दुलड़-चों (चुंबन) प्रतियोगिता आपसी प्रेम का प्रतीक है. प्रतियोगिता के माध्यम से लोग अपने जीवन साथी के प्रति प्रेम प्रदर्शित करते हैं. उन्होंने कहा कि आयोजन समिति की ओर से मुझे कोई सूचना नहीं मिली है़

खूब हुई थी आलोचना

खुले में प्रेम प्रदर्शन के नाम पर आयोजित इस चुंबन प्रतियोगिता की खूब आलोचना हुई थी. कहा गया था कि यह आदिवासी संस्कृति का हिस्सा नहीं है. ज्ञात हो कि प्रतियोगिता में 18 विवाहित जोड़ों ने भाग लिया और एक-दूसरे को देर तक चूमते रहे और चुंबन लेते हुए आयोजकों द्वारा तय की गयी एक दूरी तय की. सबसे अधिक समय तक एक-दूसरे को चूमने वाले तीन जोड़ों को पुरस्कृत भी किया गया था.

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