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nalanda

  • Aug 11 2017 4:49AM

संस्कृत भाषा सिखाती है जीने की कला : प्राचार्य

 अव्वल प्रतिभागियों को किया गया सम्मानित 

राजगीर : संस्कृत विश्व की सबसे वैज्ञानिक भाषा है. संस्कृत भाषा जीने की कला सिखाती है. यह भारतीय संस्कृति की संरक्षिका व जनमानस का आदर्श है. संस्कृत से दूरी बनाकर भारती संस्कृति की रक्षा असंभव है. उक्त बातें केंद्रीय विद्यालय आयुध निर्माणी नालंदा राजगीर में चल रहे संस्कृत सप्ताहोत्सव के समापन पर प्राचार्य रामजी सिंह ने कहीं. समारोह की शुरुआत विद्यालय के छात्र- छात्राओं ने सरस्वती वंदना से की. इस अवसर पर कई कार्यक्रम का आयोजन किया गया. जिसमें विद्यालय के छात्र- छात्राओं ने संस्कृत और भारतीय सभ्यता संस्कृति की झलक प्रस्तुत की. कार्यक्रम का संचालन ग्यारहवीं कक्षा की छात्रा वंदना कुमारी व सोनाली सिंह ने संस्कृत भाषा में की. अपने उदघाटन भाषण में प्राचार्य रामजी सिंह ने कहा कि संस्कृत शब्द भारतीय ससभ्यता संस्कृति की मूल भाषा है.
 
साथ ही यह पूरी तरह से वैज्ञानिक भी है. विद्यार्थियों को इस भाषा से जोड़ने व इसे संवर्धित करने में हर किसी के योगदान की आवश्यकता है. मीडिया प्रभारी सह कार्यक्रम समन्वयक आनंद कुमार त्रिपाठी ने बताया कि विद्यालय में चार अगस्त से संस्कृत सप्ताहोत्सव मनाया जा रहा था. इस सप्ताहोत्सव के दौरान श्लोक पाठ, संस्कृत प्रश्नोत्तरी, निबंध लेखन, कहानी कथन आदि प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. 
इन प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र छात्राओं मे शामिल ईशिन्का, आलिया सिंह, लाडला कुमार, सत्यम, अनामिका, संतन, आयुष आदि को प्रशस्ति पत्र एवं शील्ड प्रदान कर पुरस्कृत व सम्मानित किया गया. इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षकों में क्रमशः एके सिंह, मनोज कुमार, डॉ. वीएन भारती, एससी शाह, आरके सिंह, संतोष कुमार, राजेश सिन्हा, आरपी राम, पूनम कुमारी, ॠषिकेश, राखी, नीतू, प्रवाल, राजेन्द्र प्रसाद, निर्मल सागर सहित अन्य शिक्षक व विद्यार्थी मौजूद थे.
 
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