Infosys सीएफआे का आखिरी भुगतान मामले में बोले बालाकृष्णन : भावना नहीं, कानून का है मसला

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Infosys सीएफआे का आखिरी भुगतान मामले में बोले बालाकृष्णन : भावना नहीं, कानून का है मसला

बेंगलुरु : आईटी कंपनी इंफोसिस के पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) वी बालाकृष्णन ने कहा है कि पूर्व सीएफओ राजीव बंसल को कंपनी छोड़कर जाने के एवज में किये गये विवादास्पद भुगतान का मामला ह्विसिल ब्लोअर यानी राज उजागर करने वाले आंतरिक कर्मचारी की भावना का मामला नहीं है. उन्होंने कहा कि बाजार विनियामक सेबी […]

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बेंगलुरु : आईटी कंपनी इंफोसिस के पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) वी बालाकृष्णन ने कहा है कि पूर्व सीएफओ राजीव बंसल को कंपनी छोड़कर जाने के एवज में किये गये विवादास्पद भुगतान का मामला ह्विसिल ब्लोअर यानी राज उजागर करने वाले आंतरिक कर्मचारी की भावना का मामला नहीं है. उन्होंने कहा कि बाजार विनियामक सेबी के लिए यह एक कानून का सवाल है. वह कानून के आधार पर ही तय करेगा कि इसमें कंपनी की ओर से निपटान के लिए दायर अर्जी को मंजूर किया जा सकता है या नहीं.

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व्हिसिल ब्लोअर ने कर दिया अपना काम

बालाकृष्णन ने कहा कि व्हिसिल ब्लोअर को जो कहना था, उसने कह दिया है. ये कानूनी मुद्दे हैं और इनके बारे में साक्ष्यों के आधार पर निर्णय लिए जाते हैं, न कि किसी की भावना के आधार पर. इस मामले में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) बाजार नियामक के तौर पर क्या सोचता है, सिर्फ यही मायने रखता है. गौरतलब है कि इस साल की शुरुआत में इंफोसिस के ही एक कर्मचारी ने इस्राइल की कंपनी पनाया के अधिग्रहण के सौदे तथा बंसल के आखिरी भुगतान के पैकेज में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए सेबी को पत्र लिखा था.

मामले से जुड़े हैं विशाल सिक्का आैर डेविड कनेडी

पत्र में के अनुसार, बंसल के कंपनी छोड़ने के पैकेज को तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) विशाल सिक्का और कंपनी के तत्कालीन प्रमुख विधि सलाहकार डेविड केनेडी ने तय किया था. व्हिसिल ब्लोअर ने पूछा था कि इंफोसिस इस पैकेज के बारे में सवालों का जवाब देने में आनाकानी क्यों कर रही है? उसने इस राशि को मुंह बंद रखने के लिए किया गया भुगतान बताया है.

इंफोसिस को नहीं मिलनी चाहिए छूट

उसने पत्र में कहा था कि कंपनियों को पीछे के दरवाजे से मामले को सुलझाने का चलन भले ही है, लेकिन इस मामले में इंफोसिस को इसकी छूट नहीं मिलनी चाहिए. सेबी को कंपनी के निदेशक मंडल तथा प्रबंधन दोनों की जांच करनी चाहिए. उसने कहा था कि मामले को निपटाने की इंफोसिस की अर्जी को मौका देना पिछले दरवाजे से समझौता करने के समान है. यदि इंफोसिस को ऐसा करने की अनुमति दी गयी, तो आगे से कोई भी व्हिसिल ब्लोअर कॉरपोरेट क्षेत्र में होने वाली धांधलियों का खुलासा करने का जोखिम नहीं उठायेगा.

सेबी कानूनी प्रक्रिया का करेगा पालन

बालाकृष्णन ने दोहराया कि हो सकता है कि उठाये गये मामले के बारे में व्हिसिल ब्लोअर की भावनाएं बहुत मजबूत रही हों, लेकिन नियामक (सेबी) इस मामले कानूनी प्रक्रिया का पालन करेगा और तभी कोर्इ फैसला करेगा. इस पत्र ने इंफोसिस द्वारा मामला सुलझाने के लिए सेबी के आवेदन के बाद खराब कंपनी संचालन के मुद्दे को एक बार फिर से सतह पर ला दिया था.

टीवी मोहनदास पर्इ ने शुरू कर दिया था पहला हमला

इसके बाद बालाकृष्णन और एक अन्य पूर्व सीएफओ टीवी मोहनदास पई ने कंपनी के खिलाफ हमला शुरु कर दिया था. बालाकृष्णन ने इस मामले में निदेशक मंडल के सदस्यों रूपा कुड़वा और रवि वेंकटेशन के इस्तीफे की मांग की थी.

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