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  • Nov 19 2019 10:21PM
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जेएनयू के हॉस्टल की बढ़ी फ़ीस पर इतना हंगामा क्यों?

जेएनयू के हॉस्टल की बढ़ी फ़ीस पर इतना हंगामा क्यों?
JNU, जेएनयू
Getty Images

दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में होस्टल फ़ीस बढ़ाए जाने का मामला इतना तूल पकड़ा कि इसके विरोध में छात्र न केवल सड़कों पर उतर आए बल्कि सोमवार को देश की संसद की तरफ कूच भी कर दिया. हालांकि केंद्रीय विश्वविद्यालय के छात्रों के इस संसद मार्च को पुलिस ने रोक दिया और इलाके में धारा 144 लगा दी.

मंगलवार को संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा में इस पर हंगामे के बाद सदन को स्थगित करना पड़ा.

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चलिए जानते हैं कि आख़िर क्या है पूरा मामला?

जेएनयू प्रसाशन ने एक नवंबर को एक विज्ञप्ति जारी कर इस विश्वविद्यालय के हॉस्टल में रह रहे छात्रों से वसूले जा रहे शुल्क को बढ़ा दिया. इसमें कमरे का किराया से लेकर बिजली, पानी और मेंटेनेंस के शुल्क तक शामिल हैं.

जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक़ विश्वविद्यालय परिसर के दो हॉस्टल में रहने वाले छात्र बिजली और पानी की कीमतें पहले से ही चुका रहे हैं लेकिन अन्य 16 छात्रावास के छात्रों को मेंटेनेस की ये फ़ीस नहीं देनी पड़ती थी.

जेएनयू रजिस्ट्रार की तरफ से जारी इस विज्ञप्ति के मुताबिक़ मेंटेनेस पर सालाना 10 करोड़ रुपए ख़र्च किए जाते हैं और अब देश के बाक़ी विश्वविद्यालयों की तरह ही यहां के सभी छात्रों को खपत के मुताबिक़ बिजली, पानी, अन्य सर्विस चार्ज (सैनिटेशन, मेंटेनेंस, रसोइया, मेस हेल्पर इत्यादि) चुकता करने होंगे. इस शुल्क को 1700 रुपए मासिक रखा गया.

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जेएनयू के छात्र बढ़ी फ़ीस से नाखुश हुए और इसके विरोध में तब से ही जेएनयू परिसर के एडमिन ब्लॉक के पास धरने पर बैठे हैं.

जेएनयू के प्रशासनिक भवन पर छात्रों के लगातार विरोध प्रदर्शन के बाद जेएनयू प्रशासन ने बढ़ी हुई फ़ीस को बीपीएल छात्रों के लिए कम करने की घोषणा कर दी लेकिन छात्रों ने यह कहते हुए इस आंदोलन को और तेज़ कर दिया कि पुराने शुल्क ही लागू किए जाएं, उन्हें इसमें किसी भी तरह की बढ़ोतरी मंज़ूर नहीं है.

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एक छात्र ने बीबीसी संवाददाता विनीत खरे को बताया कि अब तक मेस के लिए जो 2500 रुपए चुकाने पड़ते थे अब 6500 रुपए देने पड़ेंगे.

एक छात्र ने बीबीसी को बताया, "जेएनयू के होस्टल में रहने के लिए छात्रों को अब तक जो शुल्क देने पड़ते थे उसमें काफी बदलाव कर दिया गया है. पहले ऐसी कई सुविधाएं थीं जिसके लिए छात्रों को कोई पैसे नहीं चुकाने पड़ते थे. लेकिन संशोधित शुल्क पहले की तुलना में कहीं अधिक हैं. छात्रों के प्रदर्शन के बाद इनमें से कुछ शुल्कों को वापस लिया गया."

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फ़ीस वृद्धि को वापस लेने पर छात्र क्यों अड़े?

2017-18 में दी गई विश्वविद्याल की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक यहां 40 फ़ीसदी छात्रों के परिवार की मासिक कमाई 12 हज़ार रुपए से कम है.

आर्थिक रूप से कमज़ोर छात्रों को विश्वविद्यालय की तरफ से 2000 रुपए की मासिक सहायता दी जाती है लेकिन इन छात्रों के लिए बढ़ा हुआ होस्टल फ़ीस चुका पाना इससे भी संभव नहीं होगा.

छात्र संघ ने इसकी जानकारी केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को भी दी थी.

उनके मुताबिक़ अगर फ़ीस में वृद्धि की जाती तो इसका मतलब यह होगा कि 40 फ़ीसदी छात्रों को अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ सकती है.

जेएनयू की वेबसाइट के मुताबिक यहां हॉस्टल में छात्रों की कुल संख्या 6,349 है. 2017 में यहां 1,556 छात्रों ने एडमिशन लिया था. इनमें 623 छात्रों के परिवार की मासिक आय 12 हज़ार रुपए से कम थी.

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होस्टल फ़ीसः क्या थी, कितनी बढ़ाई गई, विरोध प्रदर्शन के बाद की स्थिति

जेएनयू मेस के लिए (रिफंडेबल) सिक्योरिटी फ़ीस जो पहले 5,500 रुपए थी उसे बढ़ाकर 12 हज़ार रुपए किया गया था. अब विरोध प्रदर्शन के बाद इसे वापस 5,500 रुपए कर दी गई है.

पहले सैनिटेशन और मेंटेनेंस इत्यादि का फ़ीस नहीं लिया जाता था लेकिन इसे 1700 रुपए प्रति माह कर दिया गया है.

बिजली पानी को लेकर भी कोई शुल्क नहीं लगता था लेकिन अब इसके इस्तेमाल के मुताबिक छात्रों को शुल्क चुकता करने होंगे. हालांकि ग़रीबी रेखा से नीचे के छात्रों के लिए 50 फ़ीसदी रियायत देने की घोषणा की गई है.

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छात्रावास में जिस दो तरह के कमरे दिए जाते थे उनकी फ़ीस में भी 30 गुना वृद्धि की गई.

जेएनयू स्टूडेंट्स हॉस्टल के सिंगल रूम के लिए पहले 20 रुपए प्रति छात्र फ़ीस थी, जिसे बढ़ा कर सभी छात्रों के लिए 600 रुपए कर दिया गया है. संशोधन के बाद ग़रीबी रेखा से नीचे के छात्रों को अब 300 रुपए देने होंगे.

जेएनयू स्टूडेंट्स हॉस्टल में सिंगल रूम के लिए पहले 20 रुपए प्रति माह चुकाने होते थे. इसे बढ़ाकर सभी छात्रों के लिए 600 रुपए प्रति माह कर दिया गया है. बाद में संशोधन कर ग़रीबी रेखा से नीचे के छात्रों के लिए इसे घटाकर 300 रुपए कर दिया गया.

दो लोगों के एक साथ रहने पर कमरे की फ़ीस 10 रुपए थी. बढ़ाए जाने के बाद यह फ़ीस 300 रुपए प्रति माह कर दी गई थी. लेकिन रॉलबैक के बाद अब अब बीपीएल के छात्रों को 150 रुपए चुकता करने होंगे.

इसके अलावा बर्तन, मेस बिल, एस्टैब्लिश्मन्ट चार्ज आदि में कोई बदलाव नहीं किए गए हैं.

वहीं, मेस के लिए वन-टाइम फ़ीस भी दोगुनी कर दी गई थी जिसे वापस 5,500 रुपए कर दिया गया है.

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