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bbc news

  • May 10 2019 1:55PM
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रविशंकर और शत्रुघ्न से क्यों नाराज़ हैं उनके गोद लिए गांव वाले

रविशंकर और शत्रुघ्न से क्यों नाराज़ हैं उनके गोद लिए गांव वाले

शत्रुघ्न सिन्हा और रवि शंकर प्रसाद

Getty Images

बिहार के पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र के लिए बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद और कांग्रेस नेता शत्रुघ्न सिन्हा के बीच मुख्य मुक़ाबला है.

प्रधानमंत्री सांसद आदर्श ग्राम योजना जिसकी शुरुआत मोदी सरकार ने अक्तूबर 2014 में की थी, उसके तहत इन दोनों ही सांसदों ने पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र के गांवों को गोद लिया था.

लेकिन इन गांवों की तस्वीर कितनी बदली है, ये वहां जाकर पता चला.

"यहां सैनिटरी पैड यूनिट, एलईडी विनिर्माण केन्द्र, पेपर प्लेट मेकिंग यूनिट, डिजिटल सेवा केन्द्र और रूरल बीपीओ खुला है, उससे अलावलपुर गांव के 20 लोगों को रोज़गार मिला है. जिसमें 18 महिलाएं और 2 पुरुष हैं. इसके अलावा एनआईईएल आईटी का कंप्यूटर साक्षरता केन्द्र भी है जहां छात्र कंप्यूटर सीखते हैं."

अलावलपुर गांव में इन सभी केन्द्रों के समन्वयक दीपक कुमार ने बहुत गर्व से ये बातें बताईं.

लेकिन इन सब केन्द्रों की ज़मीनी तस्वीर बहुत उत्साहित करने वाली नहीं है. हम जब वहां पहुंचे सैनिटरी पैड, पेपर प्लेट मेकिंग, एलईडी विनिर्माण केन्द्र में सन्नाटा पसरा था तो रूरल बीपीओ बिजली की आवाजाही झेल रहा था.

हालांकि रूरल बीपीओ में काम कर रही चांदनी और अलका ने बीबीसी से बातचीत में अपनी ख़ुशी ज़ाहिर की.

सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक कॉल सेंटर एक्जीक्यूटिव के तौर पर काम करने इन लड़कियों को 3,500 रुपये मासिक मिलते हैं.

'मंत्री कभी दलित पट्टी नहीं जाते'

वो कहती हैं, "हम पढ़ते भी हैं और कमाते भी. हमारा काम प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान के लाभ पाए लोगों का वैरिफ़िकेशन करना है."

अलावलपुर बिहार की राजधानी पटना के फतुहा प्रखंड स्थित गांव है. इसको केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत गोद लिया है.

गांव तक पहुंचने के दो रास्ते हैं. पटना से सटे गौरीचक से अलावलपुर का रास्ता जिसकी सड़क अच्छी स्थिति में है. दूसरा रास्ता फतुहा से भिखुआ मोड़ से अलावलपुर तक का है. ये दूसरा रास्ता हमें 'पुराने' बिहार की याद दिलाता है 'जहां सड़क में गढ्ढे नहीं हुआ करते थे बल्कि गढ्ढों में सड़क' थी.

अलावलपुर पंचायत के मुखिया उपासना सिंह के पति राकेश कुमार सिंह कहते है, "मंत्री जी (रविशंकर प्रसाद) ने यहां 40 से 50 लाख रुपये ख़र्च किए हैं. पूरे गांव में सोलर लाइट लगवाई और सड़क जो जर्जर अवस्था में थी उसे ठीक कराया."

हालांकि गांव घूमने पर सड़क बहुत अच्छी स्थिति में नहीं दिखती. जहां तक सोलर लाइट का मामला है तो दक्षिण पट्टी जहां दलित आबादी की रिहाइश है वहां सोलर लाइट नहीं लगी है.

यहां रहने वाले उमाकांत रविदास कहते हैं, "पूरे गांव में लाइट लगी है लेकिन दक्षिण पट्टी में एक भी लाइट नहीं लगी. मंत्री जी गांव भी आते हैं तो कभी इस पट्टी में नहीं आते."

राजपूत जाति बाहुल्य अलावलपुर संपन्न गांव है. इसलिए सरकार की कल्याणकारी योजना की पहली ज़रूरत गांव में हाशिए पर पड़ी आबादी को है.

वोटरों में ग़ुस्सा

वार्ड नंबर 6 की चन्द्रकली देवी को पक्का मकान और उज्जवला योजना का फायदा मिला लेकिन दूसरे ग़रीब परिवारों की तरह ही उन्होंने गैस सिलेंडर को दोबारा नहीं भराया.

चन्द्रकली कहती हैं, "इतना महंगा है कैसे भराएंगे सिलेन्डर. चूल्हे पर खाना बनाते हैं. एक लड़का बारहवीं पास कर गया लेकिन कोई रोज़गार नहीं मिलता. शौचालय नहीं मिला है. अब शौचालय बनाने का पैसा हम कहां से दें."

अलावलपुर से तक़रीबन 30 किलोमीटर दूर बख्तियारपुर प्रखंड में लखनपुरा गांव है. रविशंकर प्रसाद ने इस गांव को भी गोद लिया है.

जब मैं गांव के महादलित टोले पहुंची तो बजबजाती नाली के पास से छोटी उम्र की बच्चियां पीने का पानी भर रही थीं.

हैंडपम्प से कुछ दूरी पर ही कुछ महिलाएं सूप बना रही थीं. सरकारी योजनाओं का लाभ पूछने पर एक बूढ़ी औरत ग़ुस्से से बोली, "न कल (नल), न पैखाना ( शौचालय). कुछो नहीं मिलता, और क्या बोलें. घर भी नहीं मिला है, बरसात में घर चूता है. एक सिलेन्डर मिला है. पैसा नहीं है तो भराएंगे कहां से?"

एक अन्य महिला टिंकू देवी कहती हैं, "वोट काहे दें. हमको तो गैस, घर ,बाथरूम कुछ भी नहीं मिला."

गांव के स्वास्थ्य उपकेन्द्र पर भी सन्नाटा है. एक ग्रामीण से जब इस बाबत सवाल पूछा तो उन्होने बहुत बेफिक्री से कहा, "पटना - बाढ़ है ही कितनी दूर, जिसको इलाज करवाना है वहीं जाएगा."

साफ है भूमिहार जाति बहुल इस गांव की कहानी भी वही है जो अलावलपुर की है.

यहां भी सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत सैनिटरी पैड, एलईडी विनिर्माण ,पेपर प्लेट मेकिंग, रूरल बीपीओ और कंप्यूटर साक्षरता केन्द्र खुला है.

गांव के बबन शर्मा बताते हैं, "इन सारे सेंटरों में 15 लोगों को नौकरी मिली, 50 बच्चे कंप्यूटर की पढ़ाई कर रहे हैं. इसके अलावा स्कूल में कमरा और शौचालय भी बनवाए गए हैं. पूरे गांव में सोलर लाइट भी लगवाई गई है."

शत्रुघ्न सिन्हा के ख़िलाफ़ नाराज़गी

पटना साहिब के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने बख्तियारपुर प्रखंड के नरौली गांव को गोद लिया था. यहां के शिवध्यान सिंह कहते हैं, " वो तीन-चार बार आए और दो घंटे में 10 बार 'खामोश' बोले. बाक़ी कोई काम नहीं किए. एक पुस्तकालय भवन बनवाए हैं, सोलर लाइट लगवाए हैं."

राजपूत बहुल इस गांव में 3700 वोटर हैं. गांव के मंटू सिंह कहते हैं, "गांव पहले से ही सम्पन्न है. हम लोगों को यहां मूलभूत सुविधाएं नहीं चाहिए, वो हम लोग ख़ुद जुटा लेंगे. हमें बस करौंटा रेलवे स्टेशन पर ओवरब्रिज चाहिए था."

दरअसल, इलाक़े में जगदम्बा स्थान नाम का बहुत मशहूर मंदिर है. करौंटा रेलवे स्टेशन जो नरौली गांव में ही है, उसे पार करके ये मंदिर पड़ता है. स्टेशन के नीचे आने जाने का रास्ता बना है लेकिन यहां साल भर पानी जमा रहता है. वहीं अगर रेलवे लाइन क्रास करके जाने पर अक्सर हादसे होते रहते हैं.

गांव में स्वास्थ्य उपकेन्द्र बंद पड़ा रहता है. गांव के ही युवक सौरभ कुमार कहते हैं, "कभी खुलता है, कभी नहीं खुलता. सब मनमौजी है."

शत्रुघ्न सिन्हा के बनवाए गए पुस्तकालय से इतर गांव के नौजवानों ने अपना स्टडी सेंटर विकसित कर लिया है. इस सेंटर में आने वाले नौजवान कहते हैं, "पुस्तकालय भवन बनने के बाद उम्मीद जगी थी लेकिन पुस्तकालय में किताब नहीं है. जाकर क्या करेंगें?"

गौरतलब है कि 2017 में बना पुस्तकालय भवन अभी से टूटने लगा है.

नरौली के राजपुर की दलित बस्ती में रहने वाली पुष्पा देवी का हाल भी अलावलपुर और लखनपुरा की दलित बस्ती के परिवारों की ही तरह है.

शिकायतें

पुष्पा देवी कहती हैं, "चार बच्चे हैं, लेकिन न तो गैस मिली न शौचालय का पैसा."

बस्ती की ही निर्मला देवी बताती है, "500 रुपये अपना ख़र्च करके खाता खुलवाया था कि घर बनाने का पैसा आएगा लेकिन अब तक कुछ नहीं आया. अब बैंक बाबू फिर पैसा जमा करने को कहते हैं, हम क्यों करें?"

इस बस्ती के अजीत कुमार बताते हैं, "यहां शौचालय इसलिए नहीं बनता क्योंकि मुखिया ने राष्ट्रपति से निर्मल ग्राम पुरस्कार ले लिया है. अब अर्जी देने पर वो रिजेक्ट हो जाता है."

गांव में एक सैनिक भवन नाम का मकान भी है. ये देव नाथ सिंह का मकान है जिनके तीन बेटे और दो दामाद सेना में है.

वो कहते हैं," स्थानीय लोग बरगलाए बिहारी बाबू को, इसलिए बहुत काम नहीं हो पाया. बाक़ी देखिए सेना का कितना इस्तेमाल पार्टी पॉलिटिक्स में हो रहा है जो अच्छी बात नहीं है."

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