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asansol

  • Aug 23 2019 1:29AM
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कोयला कर्मियों के पेंशन को लेकर विवाद

 सांकतोड़िया : पूर्व कोयला कर्मियों के पेंशन की गणना 30  माह के वेतन के आधार पर किए जाने से राशि कम हो जायेगी. अधिकारियों ने 45 हजार रुपये की सीलिंग हटाने की मांग की है, ताकि उन्हें वेतन के अनुरूप पेंशन मिल सके.

 
कोयला अधिकारियों ने कहा कि प्रबंधन ने पेंशन की समीक्षा बैठक की थी. इसमें पेंशन योजना में कुछ संशोधन भी किये गये  पर इससे होने वाले नुकसान से अधिकारी एवं कर्मचारियों में असंतोष है. 
 
अभी तक कोलकर्मियों की पेंशन दस माह के औसत वेतन के आधार पर निर्धारित होती थी और सेवानिवृत्ति के बाद भुगतान किया जाता था, पर अब इसकी गणना 30 माह की सेवा अवधि के वेतन के आधार पर होगा. कई कर्मी निचले ग्रेड पर रहेंगे और उनका वेतनमान कम रहेगा, तब उनके पेंशन की राशि कम हो जायेगी. 
 
एआइएसीई ने कोयला मंत्री को पत्र लिखकर वर्तमान पेंशन राशि तय करने हेतु दस माह की अवधि ही निर्धारित करने की मांग की है.  उन्होंने 45 हजार की सीलिंग भी हटाने की मांग की है. तर्क है कि भविष्य में पेंशनभोगियों के लिए जीवन यापन के खर्च बढ़ जायेंगे. 
 
वर्तमान में एक हजार रुपये न्यूनतम मासिक पेंशन का प्रस्ताव रखा गया है, यह पूर्णतः गलत है. एक कर्मचारी तीस वर्ष तक सेवा में रहने के बाद सेवानिवृत्त होता है. इसे न्यूनतम 20 हजार रुपये रखा जाना चाहिए. प्रतिवर्ष इसकी समीक्षा होनी चाहिए, ताकि पूर्व कर्मियों को इसका फायदा मिल सके. 
 
संगठन ने कहा है कि वन रैंक वन पेंशन के समान एक प्रणाली कोयला अधिकारियों पर लागू की जाती है, जो राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था का समर्थन करने के लिए अपने जीवन को जोखिम में डाल कर काम करते हैं. यूनियन प्रतिनिधियों ने कहा कि पेंशन की सीमा निर्धारित नहीं की जानी चाहिए. इससे पूर्व कर्मियों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा, क्योंकि कई कर्मचारी 30 माह की अवधि में पदोन्नति लेकर उच्च पद पर चले जायेंगे. 
 
ऐसी स्थिति में उनके पेंशन की गणना निचले क्रम के पद के वेतन अनुरूप निर्धारित की जायेगी. उच्च पद के अनुरूप पेंशन निर्धारण किए जाने से ज्यादा राशि मिलेगी.
 
 
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