asansol

  • Dec 11 2019 2:23AM
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ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देश पर पांच अवैध ईंटभट्ठा की चिमनी तोड़ी गयी

ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देश पर पांच अवैध ईंटभट्ठा की चिमनी तोड़ी गयी

रानीगंज : रानीगंज के मंगलपुर इलाके में अवैध रूप से  चलाए जा रहे पांच ईटभट्ठों की चिमनी ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशानुसार मंगलवार को एसडीएल एंड एलआरओ के निर्देश पर तोड़ी गई. मिली जानकारी के अनुसार एक लंबे अरसे से ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देश की अवमानना कर मंगलपुर अंचल में चल रहे पांच ईंटभट्टा में फिक्स चिमनी की जगह पाथ(मोबाइल) चिमनी के द्वारा ईटभट्टा चलाया जा रहा था.

जबकि कई वर्ष पूर्व से ही यह सरकारी निर्देश जारी की गई थी कि किसी भी रूप में पाथ चिमनी वाले ईंटभट्टा को चलने नहीं दिया जायेगा. इसके बावजूद रानीगंज के मंगलपुर अंचल में एसकेएस, पापोन यादव के वाईबीएफ , मानस तफादार के सनी, अमर घोष के लोहा, साधु यादव के एसबीएफ  ब्रांड के ईटभट्टे चल रहे थे.

मंगलवार को एसडीएल एंड  एलआरओ समुन्द्र नंदा के नेतृत्व में इन  ईटभट्टों में अभियान चलाया गया. एक और जहां चार ईंटभट्टों की चिमनी तोड़ डाली गई, वहीं एसकेएस ईटभट्टा में मौजूद ईंट को तोड़ दिया गया. साथ ही साथ पानी डालकर काफ़ी ईंट को नष्ट कर दिया गया. इस अभियान में रानीगंज के बीडीओ अभिक बनर्जी, रानीगंज के बीएलआरओ सुमन सरकार, रानीगंज पुलिस , रानीगंज फायर बिग्रेड तथा अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद थे.

दूसरी ओर एसकेएस ईंटभट्टा में तोड़फोड़ किए जाने के दौरान मंगलपुर ब्रिक्स ऑनर्स एसोसिएशन के सचिव मानस तपादार के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन किया गया, जिसे देखते हुए अन्य चारों ईंटभट्टों की सिर्फ चिमनी ही तोड़ी गई.  रानीगंज के बीएलआरओ सुमन सरकार ने बताया कि वर्ष 2016 से ही इन ईंटभट्टों के मालिकों को बार-बार फिक्स चिमनी लगाने के लिए कहा जा रहा था. अवैध रूप से ईंटभट्टा चलाया जा रहा था.

सरकार को रायल्टी भी नहीं मिल रही थी. जिसे देखते हुए प्रशासन की ओर से यह फैसला लिया गया.  दूसरी ओर मानस तपादार ने बताया कि  फिक्स चिमनी से ईंटभट्टों में सालाना लगभग 30 से 35 लाख ईट का उत्पादन होती है ,जबकि पाथ चिमनी से मात्र 5 से 6 लाख ही ईट बन पाता है.

जबकि विभाग का कहना है कि फिक्स चिमनी की भांति पाथ चिमनी के मालिक को भी सालाना रायल्टी के आधार पर 2 लाख 25 हजार रुपये विभाग को देने होंगे. जिसका विरोध पाथ चिमनी के मालिक कर रहे हैं. क्योंकि उनकी सालाना आमदनी ही ढाई से तीन लाख रुपये है.

उन्होंने बताया कि फिक्स चिमनी लगाने के लिए अधिक रुपयों की जरूरत पड़ती है. चाह कर ही हम फिक्स चिमनी नहीं लगा पा रहे हैं. उन्होंने कहा कि बीएलआरओ विभाग ने आकर हमारा ईटभट्टा तोड़ दिया. जबकि इस अंचल में चल रहे अवैध कोयला कारोबार को रोक पाने में वे  असमर्थ हैं.

इस बारे में जब उनसे पूछा गया तो अधिकारियों ने चुप्पी साध ली. उन्होंने कहा कि 5 ईंटभट्टा तोड़े जाने से लगभग 500 से अधिक श्रमिक  बेकार हो गए तथा 10 ईंटभट्टों के मालिकों के सामने रोजी-रोटी का सवाल खड़ा हो गया है. उनका कहना था कि इस समस्या के समाधान के लिए बुधवार प्रातः ईटभट्टा मालिकों को लेकर एक बैठक बुलाई गई है ,जिसमें आगे की रणनीति बनाई जाएगी. 

 
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