नागरिकता संशोधन विधेयक: अमित शाह की शरणार्थी-घुसपैठिए की परिभाषा कितनी सही?

By Prabhat Khabar Digital Desk
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<figure> <img alt="अमित शाह" src="https://c.files.bbci.co.uk/108AD/production/_110075776_gettyimages-1138682136.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2019 सोमवार को लोकसभा में पास कर दिया गया. </p><p>इस विधेयक पर चर्चा के दौरान 48 सदस्यों ने इस बिल के पक्ष और विपक्ष में बोला था. इसके बाद रात 10 बजे के क़रीब गृह मंत्री अमित शाह ने सभी सवालों के जवाब देने शुरू किए. उन्होंने एक घंटे से अधिक समय तक अपना भाषण दिया. </p><p>गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि आज लाखों-करोड़ों शरणार्थियों की यातनाओं को ख़त्म करने वाला दिन है जो नरक का जीवन जी रहे हैं. </p><p>शरणार्थियों के लिए <a href="https://www.unhcr.org/protection/operations/50001ec69/india-fact-sheet.html">संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त की 2016 की रिपोर्ट</a> के अनुसार, भारत में दो लाख से अधिक शरणार्थी मौजूद हैं.</p><p>इनमें तिब्बत, श्रीलंका, अफ़ग़ानिस्तान, म्यांमार, पाकिस्तान, सोमालिया से आए शरणार्थी शामिल हैं. 2015 में, सीरिया के 39 शरणार्थी भी भारत आए थे. </p><p>हालांकि, नए नागरिकता विधेयक में केवल पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और बांग्लादेश के अल्पसंख्यक समुदायों को भारत में नागरिकता देने की बात कही गई है. इन अल्पसंख्यकों में हिंदू, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी समुदाय के लोग शामिल हैं. </p><figure> <img alt="हिंदू" src="https://c.files.bbci.co.uk/156CD/production/_110075778_gettyimages-1047626270.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><h1>अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान-बांग्लादेश मुस्लिम राष्ट्र हैं?</h1><p>गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कहा कि अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के संविधान में राज्य का धर्म इस्लाम माना गया है. इस कारण वहां के अल्पसंख्यकों को न्याय मिलने की उम्मीद कम हो जाती है. </p><p>उन्होंने कहा कि 1971 में बांग्लादेश को संविधान में धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र माना गया था लेकिन उसके बाद 1977 में राज्य का धर्म इस्लाम माना गया. </p><p>जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में दक्षिण एशियाई स्टडीज़ में प्रोफ़ेसर संजय भारद्वाज कहते हैं कि इसमें कोई शक नहीं है कि यह तीनों मुस्लिम राष्ट्र हैं लेकिन बांग्लादेश ख़ुद को मुस्लिम होते हुए भी धर्म-निरपेक्ष मानता है.</p><p>वो कहते हैं, &quot;इन तीनों राष्ट्रों में सबसे ज़्यादा सॉफ़्ट इस्लाम बांग्लादेश का है लेकिन इस देश के संविधान में 1977 में धर्म-निरपेक्ष शब्द को हटाकर इस्लाम जोड़ दिया गया. 2011 में कोर्ट ने आदेश दिया कि 1971 के संविधान की आत्मा को बचाए रखा जाना चाहिए जिसके बाद इसमें फिर से धर्म-निरपेक्ष जोड़ा गया लेकिन उसने ख़ुद को इस्लामी राष्ट्र ही माना.&quot;</p> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/in-depth-50725720?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">नेहरू-लियाक़त समझौता जिसका ज़िक्र शाह ने किया</a></li> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-50723389?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">नागरिकता संशोधन विधेयक: क्या हैं राज्यसभा के समीकरण</a></li> </ul><h1>पाकिस्तान-बांग्लादेश में कुल कितने अल्पसंख्यक? </h1><p>गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि 1950 में दिल्ली में नेहरू-लियाकत समझौता हुआ था और उस समझौते के तहत यह निश्चित किया गया कि भारत और पाकिस्तान अपने-अपने अल्पसंख्यकों का ख़याल रखेंगे. पाकिस्तान ने भारत को विश्वास दिलाया था कि वो अपने यहां हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, ईसाई और पारसियों का ध्यान रखेगा. </p><p>इसके बाद उन्होंने कहा कि 1947 में पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की संख्या 23 फ़ीसदी थी और 2011 में यह कम होकर 3.7 फ़ीसदी हो गई. </p><p>अमित शाह ने कहा कि 1947 में बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की संख्या 22 फ़ीसदी थी और 2011 में यह कम होकर 7.8 फ़ीसदी रह गई जबकि बांग्लादेश 1971 में बना, 1947 से 1971 के बीच वो पूर्वी पाकिस्तान था.</p><p>प्रोफ़ेसर संजय भारद्वाज कहते हैं कि गृह मंत्री अमित शाह ने या तो जल्दबाज़ी में या फिर कुल मिलाकर यह आंकड़ा दिया होगा लेकिन 1947 से 1971 की पूरी यात्रा के दौरान पूर्वी पाकिस्तान में सिर्फ़ 15 फ़ीसदी अल्पसंख्यक बचे थे, बांग्लादेश बनने के बाद भी यह संख्या घटती रही और 1991 में वहां सिर्फ़ 10 फ़ीसदी अल्पसंख्यक बचे जबकि 2011 में वहां सिर्फ़ 8 फ़ीसदी अल्पसंख्यक बचे. </p> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/international-50724277?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">नागरिकता संशोधन विधेयक: 'अमरीकी आयोग का बयान ग़ैर ज़रूरी'</a></li> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-50722257?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">नागरिकता संशोधन बिल मुग़लों के आक्रमण जैसा: आसू</a></li> </ul><p>वो कहते हैं कि पाकिस्तान में घटते-घटते अब अल्पसंख्यकों की संख्या एक फ़ीसदी तक पहुंच गई है.</p><p>प्रोफ़ेसर भारद्वाज कहते हैं कि पाकिस्तान के मुक़ाबले बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय को विकास की दिक्कतें नहीं हैं क्योंकि वो वहां पर ब्रिटिश काल से ज़मींदार और व्यापारिक समुदाय का हिस्सा रहे हैं, विभाजन के बाद भी उनकी आर्थिक स्थिति में कमी नहीं आई लेकिन उनके साथ राजनीतिक दिक्कते हैं, उनके साथ रोज़गार, सुरक्षा और राजनीति में ज़रूर भेदभाव होता है. </p><p>गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत के अंदर 1951 में 84 फ़ीसदी हिंदू थे और 2011 में वो घटकर 79 फ़ीसदी हो गए जबकि बाकी के देशों में वहां के बहुसंख्यकों की संख्या बढ़ी है. </p><p>उन्होंने भारत में मुसलमानों की संख्या को भी बताया. अमित शाह ने कहा कि 1951 में भारत में मुसलमानों की संख्या 9.8 फ़ीसदी थी और आज मुसलमानों की संख्या 14.23 फ़ीसदी है. </p><p>गृह मंत्री के यह आंकड़े 2011 की जनगणना के अनुसार बिलकुल सही थे.</p><figure> <img alt="रोहिंग्या मुसलमान" src="https://c.files.bbci.co.uk/7055/production/_110075782_144e3670-4594-4056-82a3-6635bc718557.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><h1>कौन है शरणार्थी या घुसपैठिया?</h1><p>गृह मंत्री अमित शाह ने सदन में चर्चा के दौरान कई बार एक ही बात दोहराई. उन्होंने कहा कि जो अपने देश में प्रताड़ित होता रहा है और जो अपना धर्म और महिलाओं की इज़्ज़त बचाने के लिए भारत आया है, वो शरणार्थी है और जो बिना अनुमति अवैध रूप से देश में घुस आया है वो घुसपैठिया है.</p><p>इस बिल में मुसलमानों को शामिल क्यों नहीं किया गया है? इस सवाल का भी गृह मंत्री अमित शाह ने जवाब दिया.</p><p>उन्होंने कहा, &quot;पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और बांग्लादेश के मुसलमान उन देशों में अल्पसंख्यक नहीं हैं इसलिए उनके लिए यह प्रावधान नहीं किया जा रहा है. म्यांमार के रोहिंग्या मुसलमान वाया बांग्लादेश भारत आते हैं और म्यांमार धर्मनिरपेक्ष देश है. रोहिंग्या मुसलमानों को कभी भी स्वीकार नहीं किया जाएगा.&quot;</p><p>म्यांमार के रोहिंग्या मुसलमान उस देश में अल्पसंख्यक हैं और उन पर अत्याचार की ख़बरें छिपी नहीं रही हैं. तकरीबन 40 हज़ार रोहिंग्या मुसलमान इस समय भारत में शरण लिए हुए हैं तो उन्हें क्यों घुसपैठिया कहा जा रहा है?</p><p>इस सवाल पर प्रोफ़ेसर भारद्वाज कहते हैं कि रोहिंग्या मुसलमान शरणार्थी ही हैं क्योंकि उन्होंने अपने देश में अत्याचार सहा है. </p><p><a href="https://www.unrefugees.org/refugee-facts/what-is-a-refugee/">संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी के अनुसार</a>, शरणार्थी वो शख़्स है जिसे उत्पीड़न, युद्ध या हिंसा के कारण अपने देश से भागना पड़ा है, शरणार्थियों को डर रहता है कि नस्ल, धर्म, राजनीतिक मत या किसी सामाजिक समूह के कारण उनका उत्पीड़न किया जाएगा.</p><figure> <img alt="संसद" src="https://c.files.bbci.co.uk/BE75/production/_110075784_6d47b3ba-e03c-4061-a18e-6312c05ea88b.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><h1>नागरिकता बिल संवैधानिक उल्लंघन है?</h1><p>चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी समेत कई सांसदों ने अनुच्छेद 14 का हवाला देते हुए इस बिल को असंवैधानिक बताया था. इस पर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि किसी भी तरह से यह बिल ग़ैर-संवैधानिक नहीं है और यह अनुच्छेद 14 का उल्लंघन नहीं करता है, संविधान की दृष्टि से यह ठीक है.</p><p>उन्होंने कहा, &quot;अनुच्छेद 14 में समानता का अधिकार दिया गया है, उसके तहत उचित वर्गीकरण का प्रवाधान है और क़ानून बनाने से कोई रोक नहीं है, अनुच्छेद-14 में कहा गया है कि जिसमें समानता का अधिकार न हो उस पर संसद क़ानून नहीं बना सकती. मगर यह किसी एक धर्म के लिए नहीं हुआ है. इसमें से सिर्फ़ एक धर्म के लिए करते तो अनुच्छेद-14 ज़रूर आड़े आता.&quot;</p><p>नैलसार लॉ यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर और क़ानून विशेषज्ञ फ़ैज़ान मुस्तफ़ा कहते हैं कि यह बिल अनुच्छेद 14 के सभी मापदंडों को पूरा नहीं करता है. वो अमित शाह के कई धर्मों को इसमें शामिल करने पर कहते हैं कि इस बिल में एक धर्म तो छोड़ दिया गया है जो समानता के अधिकार के ख़िलाफ़ है.</p> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-50713677?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">नागरिकता संशोधन बिल: असम क्यों उबल रहा है</a></li> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-50723382?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">नागरिकता संशोधन विधेयक का प्रशांत किशोर ने क्यों किया विरोध?</a></li> </ul><p>वो कहते हैं, &quot;अनुच्छेद 14 कहता है कि वो नागरिकों को क़ानून के प्रति एक समान समझेगा और सभी के लिए एक सा क़ानून रखेगा. इसमें क़ानून के प्रति एक समान समझने का मतलब है कि किसी शख़्स को ख़ास सुविधाएं दी जाएं. सभी के लिए समान क़ानून का मतलब है कि सब क़ानून सबके लिए बराबर हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आप किसी वर्ग के लिए क़ानून बना सकते हैं. चिरंजीत राव केस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी एक व्यक्ति के लिए भी क़ानून बनाया जा सकता है अगर वो अपने आप में एक वर्ग है.&quot;</p><p>&quot;संविधान धर्म, जाति, जन्मस्थान के हिसाब से क़ानून बनाने की अनुमति नहीं देता है लेकिन इस बिल में धर्म के आधार पर यह प्रावधान किया गया है. मैं यह समझता हूं कि यह क़ानून अनुच्छेद 14 के टेस्ट को पूरा नहीं करता है. साथ ही इसमें सभी पड़ोसी देशों को शामिल नहीं किया गया है. इसमें म्यांमार, चीन, श्रीलंका को नहीं रखा गया है. इस क़ानून में किए गए वर्गीकरण तर्कसंगत नहीं हैं.&quot; </p><p>गृह मंत्री अमित शाह ने अपने भाषण के दौरान तर्क दिया कि अनुच्छेद-14 के आधार पर ऐसे क़ानून नहीं बन सकते हैं तो अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थानों के लिए क़ानून कैसे बना है. </p><p>इस पर फ़ैज़ान मुस्तफ़ा कहते हैं कि यह ग़लतफ़हमी में कहा गया है कि अनुच्छेद-14 के तहत अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान बनाए गए हैं, यह संस्थान अनुच्छेद-30 के तहत बनाए गए हैं.</p><p>वो कहते हैं, &quot;अनुच्छेद 30 के तहत भारत में रहने वाले अल्पसंख्यकों ने शैक्षिक संस्थान बनाए हैं. विदेशी अल्पसंख्यकों को ऐसे कोई अधिकार नहीं दिए गए हैं. उत्तर प्रदेश का ब्राह्मण अगर तमिलनाडु में हिंदी संस्थान खोलना चाहता है तो वहां पर अल्पसंख्यक होते हुए वो संस्थान खोल सकता है.&quot; </p><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप </strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">यहां क्लिक</a><strong> कर सकते हैं. आप हमें </strong><a href="https://www.facebook.com/bbchindi">फ़ेसबुक</a><strong>, </strong><a href="https://twitter.com/BBCHindi">ट्विटर</a><strong>, </strong><a href="https://www.instagram.com/bbchindi/">इंस्टाग्राम </a><strong>और </strong><a href="https://www.youtube.com/user/bbchindi">यूट्यूब</a><strong>पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</strong></p>
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