विपक्षी दलों ने किया नये संसद भवन के उद्घाटन का बहिष्कार, 19 पार्टियों का संयुक्त बयान जारी

Published by : Pritish Sahay Updated At : 24 May 2023 11:59 AM

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19 विपक्षी दल नये संसद भवन के उद्घाटन का बहिष्कार कर रहे हैं. नये संसद भवन के उद्घाटन का बहिष्कार करने के लिए इन दलों ने एक संयुक्त बयान भी जारी किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 मई को संसद की नई इमारत का उद्घाटन करने वाले हैं. विपक्ष की मांग है कि भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति करें.

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Parliament New Building Inauguration: संसद के नए भवन के उद्घाटन को लेकर जारी घमासान और गहरा गया है. पहले उद्घाटन को लेकर विरोध हो रहा था लेकिन यह बहिष्कार में बदल गया है. दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 मई को संसद की नई इमारत का उद्घाटन करने वाले हैं. उधर विपक्षी दलों की मांग है कि नए भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से कराया जाए. इस बात को लेकर की विपक्षी दलों ने उद्घाटन समारोह का बहिष्कार करने का मन बना लिया है.

नये संसद भवन का उद्घाटन का बहिष्कार करने को देश के 19 विपक्षी दल एकमत हो गये हैं. 28 मई को नए संसद भवन के उद्घाटन का बहिष्कार करने के लिए इन दलों ने एक संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा है कि जब लोकतंत्र की आत्मा को संसद से चूस लिया गया है, तो हम नए भवन में कोई मूल्य नहीं पाते हैं.

राहुल गांधी के ट्वीट से शुरू हुआ विवाद: संसद भवन की नई बिल्डिंग के उद्घाटन का बहिष्कार करने की बात कई नेता कर रहे हैं. इस विवाद की शुरुआत राहुल गांधी के एक ट्वीट से हुई. दरअसल 21 मई को राहुल गांधी ने एक ट्वीट किया था कि नये संसद भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति से कराना चाहिए. इसके बाद कई नेताओं ने मांग कर दी कि संसद भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति से ही कराना चाहिए. अब बात बहिष्कार तक जा पहुंची हैं.

कई विपक्षी दलों ने किया ट्वीट: इसी कड़ी में उद्धव ठाकरे गुट के नेता संजय राउत ने ट्वीट कर कहा कि सभी विपक्षी दलों ने 28 मई को नए संसद भवन के उद्घाटन का बहिष्कार करने का फैसला किया है और हम भी ऐसा ही करेंगे. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की ओर से भी ट्वीट किया गया है कि एनसीपी नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह में शामिल नहीं होगी, पार्टी ने इस मुद्दे पर अन्य समान विचारधारा वाले विपक्षी दलों के साथ खड़े होने का फैसला किया है. डीएमके ने भी साफ कर दिया है कि नए संसद भवन के उद्घाटन का बहिष्कार करेगी.


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कांग्रेस ने भी किया विरोध: नये संसद भवन के उद्घाटन को लेकर कांग्रेस भी सरकार को घेरने में लगी है. बीते सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा था कि शिलान्यास और उद्घाटन के मौके पर राष्ट्रपति को नहीं बुलाया जाना लोकतंत्र का अपमान है. कांग्रेस बहिष्कार करना है या नहीं इसको लेकर रणनीति तैयार कर रही है. वहीं, आम आदमी पार्टी ने भी नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह के बहिष्कार का एलान कर दिया है.

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By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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