केरल हाईकोर्ट ने फिल्मकार आयशा सुल्ताना की गिरफ्तारी पर लगाई रोक, अग्रिम जमानत पर आदेश सुरक्षित
Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 17 Jun 2021 5:40 PM
न्यायमूर्ति अशोक मेनन ने कहा कि पूछताछ के बाद गिरफ्तारी की स्थिति में उन्हें अंतरिम जमानत दी जाएगी. आरोप हैं कि फिल्मकार सुल्ताना ने 7 जून 2021 को मलयालम न्यूज चैनल द्वारा प्रसारित एक डिबेट में कहा था कि केंद्र सरकार ने लक्षद्वीप के लोगों के खिलाफ जैविक हथियार का इस्तेमाल किया है. मामले की सुनवाई होने पर सुल्ताना ने इस बयान के लिए खेद भी जताया है.
कोच्चि : राजद्रोह के आरोपों का सामना कर रही लक्षद्वीप की फिल्मकार आयशा सुल्ताना की गिरफ्तारी पर केरल हाईकोर्ट ने फिलहाल एक सप्ताह के लिए रोक लगा दी है. मनी कंट्रोल की अंग्रेजी वेबसाइट पर प्रकाशित खबर के अनुसार, लक्षद्वीप की फिल्म निर्माता आयशा सुल्ताना को उनके खिलाफ दर्ज देशद्रोह के मामले में केरल हाईकोर्ट ने एक सप्ताह के लिए गिरफ्तारी पर रोक लगाने का निर्देश दिया है.
इसके साथ ही समाचार एजेंसी पीटीआई की खबर के अनुसार, अदालत ने आयशा सुल्ताना की ओर से अग्रिम जमानत के लिए दायर याचिका पर गुरुवार को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है, लेकिन उसने पुलिस से गिरफ्तारी की स्थिति में उन्हें अंतरिम जमानत पर छोड़ने का निर्देश भी दिया है. अदालत ने सुल्ताना को 20 जून को पूछताछ के लिए कवारत्ती पुलिस के सामने पेश होने का भी निर्देश दिया.
खबरों के अनुसार, फिल्मकार की याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अशोक मेनन ने कहा कि पूछताछ के बाद गिरफ्तारी की स्थिति में उन्हें अंतरिम जमानत दी जाएगी. आरोप हैं कि फिल्मकार सुल्ताना ने 7 जून 2021 को मलयालम न्यूज चैनल द्वारा प्रसारित एक डिबेट में कहा था कि केंद्र सरकार ने लक्षद्वीप के लोगों के खिलाफ जैविक हथियार का इस्तेमाल किया है. मामले की सुनवाई होने पर सुल्ताना ने इस बयान के लिए खेद भी जताया है.
फिल्मकार ने कहा कि उन्हें इसका अंदाजा नहीं था कि जैविक हथियार शब्द का इस्तेमाल करना एक अपराध है और उन्होंने लोगों के बीच घृणा पैदा करने की मंशा से यह टिप्पणी नहीं की थी. सुल्ताना ने कहा कि वह पूछताछ के लिए पुलिस के सामने पेश होने को तैयार हैं, लेकिन उन्होंने गिरफ्तारी से सुरक्षा का अनुरोध भी किया है. कवारत्ती में रहने वाले एक नेता द्वारा दिए गए आवेदन के आधार पर 9 जून 2021 को भारतीय दंड संहिता की धारा 124 ए (राजद्रोह) और 153 बी (नफरत फैलाने वाली टिप्पणी) के तहत मामला दर्ज किया गया था.
उनकी अग्रिम जमानत की याचिका का विरोध करते हुए लक्षद्वीप प्रशासन ने कहा कि सुल्ताना ने ऐसे बयान देकर स्कूली बच्चों समेत सबके मन में अलगाववाद और सांप्रदायिकता को बढ़ावा देने का काम किया है. लक्षद्वीप प्रशासन के वकील ने कहा कि पुलिस का इरादा उनको गिरफ्तार करने का नहीं है और उन्हें जांच में सहयोग करना चाहिए. इसके बाद ही गिरफ्तारी पर फैसला किया जाएगा.
Posted by : Vishwat Sen
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