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SCO के युवा वैज्ञानिकों के कॉन्क्लेव में बोले डॉ हर्षवर्धन, विकास के विभिन्न चरणों में भारत में 30 वैक्सीन, युवा वैज्ञानिकों को दिये चार मंत्र

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
एससीओ के युवा वैज्ञानिक कॉन्क्लेव के वर्चुअल सम्मेलन में भाग लेते केंद्रीय स्वास्थ्य डॉ हर्षवर्धन
एससीओ के युवा वैज्ञानिक कॉन्क्लेव के वर्चुअल सम्मेलन में भाग लेते केंद्रीय स्वास्थ्य डॉ हर्षवर्धन
सोशल मीडिया

नयी दिल्ली : केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने मंगलवार को कहा कि भारत में लगभग 30 वैक्सीन विकास के विभिन्न चरणों में हैं. इनमें से दो वैक्सीन कोवैक्सीन और कोविशील्ड विकास के सबसे उन्नत चरण में हैं. उक्त बातें केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के युवा वैज्ञानिक कॉन्क्लेव के प्रथम वर्चुअल सम्मेलन में कहीं.

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान मंत्री ने कहा कि हमारे फार्मा दिग्गजों में से एक डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज अंतिम चरण के मानव परीक्षणों और रेग्युलेटरी से अप्रूवल मिलने के बाद भारत में रूसी वैक्सीन वितरित करेगी.

डॉ हर्ष वर्धन ने कहा, ''इस कॉन्क्लेव का व्यापक उद्देश्य प्रतिभाशाली युवा माइंडफ्रॉम एससीओ (शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन) को एक सामान्य प्लेटफॉर्म पर लाना है, जो अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से आम सामाजिक चुनौतियों के समाधान के लिए उनके ज्ञान का उपयोग किया जा सके."

डॉ हर्षवर्धन ने कहा, ''स्वदेशी वैक्सीन के विकास से लेकर, पारंपरिक ज्ञान पर आधारित नॉवेल पॉइंट-ऑफ-केयर डायग्नोस्टिक्स और चिकित्सीय, अनुसंधान संसाधन स्थापित करने को लेकर सार्वजनिक और निजी संस्थाएं महामारी का मुकाबला करने के लिए अथक रूप से काम कर रहे हैं.''

उन्होंने कहा कि सरकार के समर्थन की मदद से 100 से अधिक स्टार्ट अप ने कोविड-19 से निबटने के लिए अभिनव उत्पाद और समाधान प्रदान किये हैं.'' मंत्री ने कहा कि मानव कल्याण और दुनिया के कल्याण के लिए, "युवाओं को आगे आना चाहिए और कोरोना की वर्तमान महामारी सहित सामान्य सामाजिक चुनौतियों के समाधान के लिए हाथ मिलाना चाहिए.

डॉ हर्षवर्धन ने बताया कि कोविड-19 वैक्सीन अनुसंधान के लिए भारत सरकार ने 12 करोड़ अमेरिकी डॉलर देने की घोषणा की थी. यह कोविड सुरक्षा मिशन के लिए प्रदान किया जा रहा है. साथ ही कोविड-19 वैक्सीन अनुसंधान और विकास के लिए पूरी तरह से उपयोग किया जाना है.

उन्होंने कहा कि ''भारत स्टार्ट-अप और नवाचार के लिए एक हब बनकर उभरा है. भारतीय युवाओं ने अपने भविष्य को लेकर अलग पहचान बनायी है.'' युवा प्रतिभाओं को विज्ञान के चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में अवसर और नेतृत्व प्रदान करने के लिए भारत ने पांच विशेष अनुसंधान प्रयोगशालाएं स्थापित की हैं. प्रत्येक प्रयोगशाला विज्ञान के एक केंद्रित क्षेत्र से संबंधित है.

इन प्रयोगशालाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम टेक्नोलॉजी, कॉग्निटिव टेक्नोलॉजी, एसीममेट्रिक टेक्नोलॉजी और स्मार्ट मेटिरियल शामिल हैं. उन्होंने कहा, ''इन प्रयोगशालाओं में निदेशक सहित सभी को 35 वर्ष से कम आयु के मानदंड दिये गये हैं.''

मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने उन सभी युवा वैज्ञानिकों को बधाई दी, जिन्हें भारत द्वारा आयोजित इस पहले एससीओ युवा वैज्ञानिक कॉन्क्लेव के लिए नामित किया गया है. साथ ही उन्होंने प्रौद्योगिकी विभाग, भारतीय रासायनिक प्रौद्योगिकी संस्थान और विदेश मंत्रालय को कोविड-19 महामारी द्वारा उत्पन्न चुनौतियों और बाधाओं के बावजूद कॉन्क्लेव की मेजबानी के लिए आभार व्यक्त किया.

अंत में उन्होंने युवा वैज्ञानिकों के लिए आदर्श वाक्य इनोवेट, पेटेंट, प्रोड्यूस और प्रॉस्पर का मंत्र दिया. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि ये चार कदम हमारे देशों को तेजी से विकास की ओर ले जायेंगे.''

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