Budget 2021 : क्या इस बजट से सरकारी स्वास्थ्य तंत्र सुधरेगा और निजी अस्पतालों पर घटेगी निर्भरता, जानिए क्या है एक्सपर्ट की राय

Updated at : 02 Feb 2021 1:24 PM (IST)
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Budget 2021 : क्या इस बजट से सरकारी स्वास्थ्य तंत्र सुधरेगा और निजी अस्पतालों पर घटेगी निर्भरता, जानिए क्या है एक्सपर्ट की राय

सरकारी स्वास्थ्य तंत्र सुधरेगा, निजी अस्पतालों पर घटेगी निर्भरता

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डॉ अंशुमान कुमार

वरिष्ठ कैंसर विशेषज्ञ, दिल्ली

healthcare budget 2021 in hindi, health sector in budget 2021, Budget 2021 : इस बजट से पहले तक स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए बजट का आवंटन दो प्रतिशत से भी कम रहा है. कोरोना काल में जिस तरह से मुश्किल हालात का सामना करना पड़ा, उससे बड़ी सबक मिली है. स्वास्थ्य का मतलब केवल बीमारी का इलाज ही नहीं होता, बल्कि स्वस्थ रहना और जीवनशैली का सही होना भी है. अगर कोई बीमार पड़ जाए, तो उसका इलाज स्वास्थ्य तंत्र उपलब्ध कराता है.

सरकारी स्वास्थ्य तंत्र की लचर हालात सबके सामने आ गयी और लोग निजी अस्पतालों का रुख करने पर मजबूर हुए. इससे निजी अस्पतालों ने मनमानी शुरू कर दी. ऐसा इसलिए होता था, क्योंकि स्वास्थ्य क्षेत्र को बजट में कभी प्राथमिकता नहीं दी गयी. भारत इस पर अपने सकल घरेलू उत्पादन (जीडीपी) का मात्र 1.4 प्रतिशत ही खर्च करता था. अभी इसे 94 हजार करोड़ से बढ़ा कर 2.23 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है, यानी 137 प्रतिशत का इजाफा किया गया है.

विकसित देशों, विशेषकर यूरोपीय देशों से इसकी तुलना करें, तो अभी भी हम बहुत पीछे हैं. ज्यादातर यूरोपीय देश अपनी जीडीपी का सात से नौ प्रतिशत तक स्वास्थ्य पर खर्च करते हैं, लेकिन यह अच्छी पहल है और स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी गयी है. स्वास्थ्य क्षेत्र में मुख्य रूप से तीन बातों पर फोकस किया गया है- प्रिवेंटिव, क्यूरेटिव और वेल बीइंग. पहले हेल्थ में केवल क्यूरेटिव पर फोकस किया जाता था, यानी कोई बीमार हो, तो उसका कैसे इलाज हो जाये.

प्रिवेंटिव यानी बीमारियों की रोकथाम पर खासकर, जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों, जैसे हृदय संबंधी, डायबिटीज, कैंसर और हाइपरटेंशन आदि पर हम फोकस करें, तो देश का बहुत बड़ा खर्च इससे बच सकता है. इस बार बजट में बीमारियों की रोकथाम पर भी बात कही गयी है. जब सरकारी तंत्र मजबूत होंगे, तो निजी अस्पताल इतनी मनमानी नहीं कर पायेंगे. तीसरी बात, वेल बीइंग यानी सलामती की है.

शारीरिक व मानसिक तौर पर स्वस्थ रहने के साथ लोग कैसे स्वस्थ रह सकें, इस बात पर फोकस किया गया है. इसमें एलोपैथिक, आयुर्वेदिक, यूनानी, सिद्धा, होम्योपैथ सबको बेहतर बनाने की योजना पर काम किया जायेगा. इस बार प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना घोषित हुई है. समावेशी स्वास्थ्य व्यवस्था लाने की बात कही गयी है, जिसके लिए तकनीक का सहारा लेकर पोर्टल आदि की व्यवस्था की जायेगी. आज की जरूरतों के मद्देनजर यह बहुत आवश्यक है. पोर्टल से जुड़ने के बाद दूरदराज के इलाकों में भी स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभता बढ़ेगी.

Posted By : Sameer Oraon

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