नयी दिल्ली : उत्तर प्रदेश में सोमवार को उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य गायों के लिए एंबुलेंस सेवा ही शुरुआत कर रहे थे और ठीक उसी वक्त इटावा में एक मजदूर अपने 15 वर्षीय बच्चे के शव को अपने कंधे पर लेकर सड़क पर जा रहा था.
दरअसल सोमवार को उदयवीर सिंह नाम का एक व्यक्ति अपने 15 साल के बच्चे पुष्पेंद्र का इलाज कराने के लिए सरकारी अस्पताल लेकर आया था. लेकिन अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. उदयवीर ने बताया कि डॉक्टरों ने उसके बच्चे को महज पांच मिनट ही देखा और बताया कि वो मर चुका है. अस्पताल की ओर से उसे और कोई भी सुविधा नहीं दी गयी. उसके पास पैसे नहीं थे जिस कारण उसे अपने बच्चे के शव को कंधे पर रखकर सड़क पर चलना पड़ा. मजदूर का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला सामने आया.
इधर इस बारे में अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी का कहना है कि जिस समय उदयवीर अपने बच्चे को लेकर अस्पताल आया उसी समय सड़क हादसे में घायल कई लोगों को अस्पताल लाया गया. शायद यही कारण रहा होगा कि मृत बच्चे को शव वाहन नहीं मिल पाया होगा. इधर मीडिया में खबर आने के बाद उस समय ड्यूटी में तैनात डॉक्टरों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है.
गौरतलब हो कि यह पहली घटना नहीं है इससे पहले भी ऐसी खबरें आती रही हैं. जिससे पता चलता है कि आज भी सरकारी अस्पताल में अव्यवस्था कूट-कूट कर भरा हुआ है. इसी प्रकार की एक और खबर बेंगलुरु से है. यहां के एक सरकारी अस्पताल से अपने तीन वर्षीय पुत्र का शव दो पहिया पर ले जाने वाले एक असमी व्यक्ति के वीडियो फुटेज को लेकर अधिकारियों के खिलाफ लोगों में इस बात को लेकर नाराजगी उत्पन्न हुई है कि वे यह सुनिश्चित करने में असफल रहे कि शव को किसी एंबुलेंस में सही तरीके से घर ले जाने का इंतजाम किया जाए.
दुखी पिता असम का रहने वाला एक श्रमिक है. वह अपने पुत्र का शव एक दो पहिया वाहन पर लेकर गया. उसके पुत्र को अनेकल सरकारी अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया. व्यक्ति रविवार को एक सडक दुर्घटना के बाद अपने पुत्र को अस्पताल लेकर आया था.पुलिस ने बताया कि बच्चे को किसी अज्ञात वाहन सवार ने रविवार को अनेकल में कार्पुर गेट के पास टक्कर मार दी थी. उसके बाद बच्चे को अस्पताल ले जाया गया जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया.