रोहित वेमुला का सुसाइड नोट पढ़ा, तो मुझे रोना आ गया : वरुण गांधी

Updated at : 22 Feb 2017 9:08 AM (IST)
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रोहित वेमुला का सुसाइड नोट पढ़ा, तो मुझे रोना आ गया : वरुण गांधी

नयी दिल्ली : भाजपा के कद्दावर और बड़े बोल बोलने वाले नेताओं में शुमार वरुण गांधी ने एक बार फिर बगावती तेवर अपनाते हुए इशारों ही इशारों में रोहित वेमुला के बहाने सीधा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ही निशाना साध दिया है. सबसे बड़ी बात यह है कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर यह निशाना उस […]

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नयी दिल्ली : भाजपा के कद्दावर और बड़े बोल बोलने वाले नेताओं में शुमार वरुण गांधी ने एक बार फिर बगावती तेवर अपनाते हुए इशारों ही इशारों में रोहित वेमुला के बहाने सीधा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ही निशाना साध दिया है. सबसे बड़ी बात यह है कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर यह निशाना उस समय साधा जब यूपी में विधानसभा चुनाव के चौथे चरण के मतदान के लिए चुनाव प्रचार थमने का दिन था.

यूपी में तीन चरण के लिए मतदान हो चुके हैं. इस चुनाव में जीत हासिल करने के लिए समाजवादी पार्टी, भाजपा और कांग्रेस पूरे जोर-शोर से अपनी ताकत झोंके हुए है, लेकिन इसमें चुनाव प्रचार से भाजपा के फायरब्रांड नेता वरुण गांधी को दूर ही रखा गया है. आलम यह कि पार्टी की ओर से उन्हें यूपी चुनाव के स्टार प्रचारकों में भी शामिल नहीं किया गया है. ऐसे में उन्होंने इंदौर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी पर जमकर निशाना साधा.

इंदौर के एक स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे गांधी ने रोहित वेमुला के सुसाइड का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जब मैंने उसका सुसाइड नोट पढ़ा, तो मुझे रोना आ गया. मैं इसलिए जान दे रहा हूं क्योंकि मैंने एक दलित के रूप में जन्म लेकर पाप किया है, मुझे जीने का हक कहां है.

दरअसल, वरुण गांधी ने अल्पसंख्यकों के विकास पर सवाल उठाते हुए मोदी सरकार पर सवालिया निशान लगाया. देश की आबादी में 17.18 फीसदी अल्पसंख्यक हैं, लेकिन इनमें से केवल चार फीसदी लोग उच्च शिक्षा हासिल कर पाते हैं. हमें इन समस्याओं को हल करना होगा. हम इनके विकास में नाकाम हो रहे हैं।

इतना ही नहीं, उन्होंने किसानों द्वारा आत्महत्या किये जाने के मसले पर भी उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की सरकार को घेरते हुए कहा कि हमारे समाज में असामनता है. कर्ज वसूली में भेदभाव है, जिसकी वजह से किसानों की ये हालत खस्ता है. उन्होंने देश के बड़े औद्योगिक घरानों पर बकाया कर्ज माफ करने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि अमीरों को रियायत दी जाती है और गरीब कर्ज न चुकाने पर अपनी जान दे रहे हैं.

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