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बांध सुरक्षा विधेयक लोकसभा में पेश, बीजद ने किया विरोध

Updated at : 12 Dec 2018 2:22 PM (IST)
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बांध सुरक्षा विधेयक लोकसभा में पेश, बीजद ने किया विरोध

नयी दिल्ली : देश में बांधों की सुरक्षा, समुचित निगरानी, निरीक्षण एवं प्रचालन सुनिश्चित करने के उपबंध वाला बांध सुरक्षा विधेयक बुधवार को लोकसभा में पेश किया गया. सदन में जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बांध सुरक्षा विधेयक 2018 पेश किया. लोकसभा में विभिन्न मुद्दों पर कांग्रेस, […]

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नयी दिल्ली : देश में बांधों की सुरक्षा, समुचित निगरानी, निरीक्षण एवं प्रचालन सुनिश्चित करने के उपबंध वाला बांध सुरक्षा विधेयक बुधवार को लोकसभा में पेश किया गया. सदन में जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बांध सुरक्षा विधेयक 2018 पेश किया. लोकसभा में विभिन्न मुद्दों पर कांग्रेस, शिवसेना, अन्नाद्रमुक और तेलुगू देसम पार्टी के सदस्यों के हंगामे के बीच ही सरकार ने बांधों की सुरक्षा से संबंधित विधेयक पेश किया.

बीजद सदस्य भर्तृहरि महताब ने विधेयक पेश किये जाने का विरोध करते हुए कहा कि यह विषय इस सदन के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता क्योंकि यह राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र का विषय है. इस पर मेघवाल ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 252 के तहत दो राज्यों की सहमति हो तो विधेयक लाया जा सकता है.

आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल ने इसके लिए सहमति दी है. इसलिए यह विषय संसदीय अधिकार क्षेत्र में आता है. विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि बांध एक महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना है जिसका निर्माण, सिंचाई, विद्युत उत्पादन, बाढ़ नियंत्रण, पेयजल और औद्योगिक प्रयोजन के लिहाज से जल के बहुद्देश्यीय उपयोगों के लिये बड़े पैमाने पर निवेश किया जाता है. कोई असुरक्षित बांध मानव जीवन, पारिस्थितकी एवं सार्वजनिक एवं निजी आस्तियों के लिये खतरनाक हो सकता है, ऐसे में बांध की सुरक्षा एक मुख्य चिंता का विषय और राष्ट्रीय जिम्मेदारी है. विधेयक में कहा गया है कि आपदाओं से संबंधित बांध से जुड़ी समस्याओं के निवारण और बांध सुरक्षा मानकों को बनाये रखने के लिये संबंधित नीति विकसित करने तथा आवश्यक विनियमों की सिफारिश करने के लिये राष्ट्रीय बांध सुरक्षा समिति के गठन का प्रस्ताव किया गया है.

बांधों की समुचित निगरानी, निरीक्षण और अनुरक्षण के लिये नीति, मार्गदर्शक सिद्धांत और मानकों के क्रियान्वयन के लिये और दो राज्यों के राज्य बांध सुरक्षा संगठनों और उस राज्य में बांध स्वामी के बीच किसी मुद्दे का समाधान करने के लिये विनियामक निकाय के रूप में राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण की स्थापना का प्रस्ताव किया गया है. प्राधिकरण, बांध सुरक्षा संबंधी डाटा, व्यवहारों के मानकीकरण, तकनीकी व प्रबंधकीय सहायता, बांध विफलताओं संबंधी विवरण व कारकों का रिकॉर्ड रखेगा. प्राधिकरण, बांध सुरक्षा संबंधी उन संगठनों की मान्यता का रिकॉर्ड भी रखेगा जिन्हें बांधों की जांच, नए बांधों की डिजाइन और निर्माण कार्य सौंपा गया था. प्रत्येक राज्य में बांध सुरक्षा संगठन स्थापित करने का प्रावधान है। यह संगठन बांध सुरक्षा अधिकारियों द्वारा चलाया जाएगा.

अधिकारियों में प्राथमिक रूप से बांध डिजाइन, हाइड्रो-मैकेनिकल इंजीनियरिंग हाइड्रोलॉजी, भू-तकनीक जांच और बांध पुनर्वास क्षेत्र से संबंधित अधिकारी होंगे. राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों में एकरूप बांध सुरक्षा प्रक्रियाओं को सहज एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से जून, 2018 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बांध सुरक्षा विधेयक, 2018 को संसद में प्रस्तुत करने संबंधी प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की थी.

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