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सीबीआई में घमासान: केंद्र ने दिखायी सख्‍ती, आलोक वर्मा की छुट्टी, CBI मुख्यालय सील

Updated at : 24 Oct 2018 8:23 AM (IST)
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सीबीआई में घमासान: केंद्र ने दिखायी सख्‍ती, आलोक वर्मा की छुट्टी, CBI मुख्यालय सील

नयी दिल्ली : सीबीआई में शीर्ष अधिकारियों के बीच जारी घमासान में केंद्र सरकार ने दखल दिया है और सीबीआई चीफ आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेज दिया है. वर्मा के स्थान पर एम. नागेश्वर राव को अंतरिम डायरेक्टर का कार्यभार सौंपने का काम केंद्र सरकार ने किया है. यहां […]

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नयी दिल्ली : सीबीआई में शीर्ष अधिकारियों के बीच जारी घमासान में केंद्र सरकार ने दखल दिया है और सीबीआई चीफ आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेज दिया है. वर्मा के स्थान पर एम. नागेश्वर राव को अंतरिम डायरेक्टर का कार्यभार सौंपने का काम केंद्र सरकार ने किया है. यहां चर्चा कर दें कि वर्तमान में राव सीबीआई में जॉइंट डायरेक्टर के तौर पर कार्यरत थे. केंद्र द्वारा जारी आदेश में राव को तत्काल प्रभाव से वर्मा की जगह नियुक्त किया गया.

इधर , सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार सीबीआई मुख्यालय की इमारत को सील किया गया है. यहां न तो कर्मियों और न ही बाहरी लोगों को जाने की इजाजत दी गयी है.आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना के ऑफिस में आज दोपहर 2 बजे तक किसी अधिकारी या फाइल की आवाजाही पर रोक लगायी गयी है.

इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को अंतरिम राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर सोमवार तक के लिए रोक लगा दी. इस मामले में अगली सुनवाई अब 29 अक्टूबर को होगी. साथ ही अदालत ने सीबीआइ को निर्देश दिया कि वह अस्थाना के खिलाफ शुरू की गयी आपराधिक कार्यवाही पर यथास्थिति बरकरार रखे. हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले में जारी जांच पर किसी तरह का स्थगन नहीं है.

अस्थाना ने घूस के आरोप में अपने खिलाफ दायर एफआईआर को चुनौती दी थी. जस्टिस नाजिम वजीरी ने अस्थाना और घूस मामले में गिरफ्तार डीएसपी देवेंद्र कुमार द्वारा अलग-अलग दायर याचिकाओं पर जांच एजेंसी, उसके निदेशक आलोक कुमार वर्मा और संयुक्त निदेशक एके शर्मा से जवाब मांगा है. अदालत ने कहा कि अस्थाना और कुमार मामले से जुड़े रेकॉर्ड को संरक्षित रखा जायेगा. अभियुक्तों के मोबाइल, लैपटॉप भी संरक्षित रखे जायेंगे. सुनवाई के दौरान सीबीआई ने कहा कि अस्थाना के खिलाफ गंभीर आरोप हैं और एजेंसी मामले की जांच कर रही है.
अस्थाना के वकील अमरेंद्र सरन ने कहा कि यह सीबीआई के विशेष निदेशक के खिलाफ आरोपित के बयान पर आधारित एफआईआर के अवैध पंजीकरण का मामला है.
अस्थाना ने अपने खिलाफ एफआईआर को दी थी चुनौती
अस्थाना ने हाईकोर्ट से यह निर्देश देने की मांग की कि उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाये. उन्होंने अपने खिलाफ दायर एफआईआर को चुनौती दी थी. अस्थाना और डीएसपी देवेंद्र कुमार ने अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं. इधर, सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार सीबीआई निदेशक आलोक कुमार वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के बीच जारी घमसान से काफी नाराज है. दोनों अफसरों के सारे अधिकार वापस लेने पर विचार कर रही है. इस मामले में कानूनी राय लेने के बाद फैसला लिया जा सकता है. फरवरी में आलोक वर्मा रिटायर हो रहे हैं.
डीएसपी को सात दिनों की हिरासत में भेजा गया
दिल्ली की विशेष अदालत ने घूस मामले में सीबीआई को उसके डीएसपी देवेंद्र कुमार को सात दिन की हिरासत सौंपा है. एजेंसी ने आरोपित अधिकारी से पूछताछ के लिए 10 दिन तक हिरासत मांगी थी. सीबीआई ने दलील दी कि उनके कार्यालय एवं आवास पर छापे में अहम दस्तावेज तथा सबूत मिले हैं. इसमें दावा किया गया कि कुमार जांच की आड़ में वसूली करने वाले गिरोह का हिस्सा थे. सीबीआई ने सोमवार को घूस से जुड़े एक मामले में अपने डीएसपी देवेंद्र कुमार को गिरफ्तार किया था. इस मामले में जांच एजेंसी में दूसरे नंबर के अधिकारी अस्थाना का भी नाम आ रहा है. मीट निर्यातक मोइन कुरैशी से जुड़े मामले में जांच अधिकारी रहे कुमार पर कारोबारी सतीश सना के बयान दर्ज करने में धोखाधड़ी के आरोप हैं.

अपने कदाचार को छिपाने के लिए मुझे फंसा रहे वर्मा : अस्थाना

राकेश अस्थाना ने मंगलवार को आरोप लगाया कि सीबीआई प्रमुख आलोक कुमार वर्मा धन के बदले जांच को प्रभावित करने के अपने आपराधिक कदाचार को छिपाने के लिए रिश्वत मामले में उन्हें ‘झूठा फंसाने’ की कोशिश कर रहे हैं. एजेंसी के पुलिस उपाधीक्षक देवेंद्र कुमार ने भी आरोप लगाया कि कार्यवाही सिर्फ पद के दुरुपयोग को नहीं दिखातीं, बल्कि यह भी दिखाती हैं कि अवैध उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए उन्हें किस तरह ‘बलि का बकरा’ बनाया जा रहा है. दोनों अधिकारियों ने हाइकोर्ट में दायर अलग-अलग याचिकाओं में कहा कि जब अस्थाना के नेतृत्व में विशेष जांच टीम ने जांच को प्रभावित करने के लिए रिश्वत देने के आरोप में कारोबारी सतीश सना की गिरफ्तारी प्रस्तावित की, तो उसका पालन नहीं किया गया.
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