ePaper

इस वजह से आत्महत्या करना चाहते थे 'नातू नातू' के कोरियोग्राफर प्रेम रक्षित, उधारी की साइकिल ने बचाई जान

Updated at : 29 Jan 2023 4:48 PM (IST)
विज्ञापन
इस वजह से आत्महत्या करना चाहते थे 'नातू नातू' के कोरियोग्राफर प्रेम रक्षित, उधारी की साइकिल ने बचाई जान

‘नातू’ का मतलब ‘नाचना’ होता है और इस गीत को देख-सुनकर पैर अपने आप थिरकने लगते हैं. इसमें प्रेम रक्षित के नृत्य निर्देशन की जितनी तारीफ की जाए कम है. उनके शानदार नृत्य निर्देशन ने सात समंदर पार भारतीय सिनेमा का डंका बजा दिया.

विज्ञापन

उम्दा गीत और कानों में रस घोलने वाला संगीत हमेशा से भारतीय सिनेमा का एक अहम हिस्सा रहा है. उस पर नृत्य ‘सोने पर सुहागा’ का काम करता है. कहते हैं कि संगीत की कोई जुबान नहीं होती और नृत्य को किसी जुबान की जरूरत नहीं होती, तभी तो निर्देशक एस एस राजामौली की फिल्म ‘आरआरआर’ के लोकप्रिय गीत ‘‘नातू नातू’’ को 2023 के गोल्डन ग्लोब अवॉर्ड समारोह में सर्वश्रेष्ठ ‘ओरिजिनल सॉन्ग’ चुना गया.

इस गीत और इसके संगीत में कुछ नया है

इस तेलुगु गीत के बोल हमारे देश में ही कम लोगों की समझ में आए होंगे, लेकिन यह सबने महसूस किया कि इस गीत और इसके संगीत में कुछ नया है. इसके अलावा, फिल्म के दोनों कलाकारों रामचरण और जूनियर एनटीआर ने ‘‘नातू नातू’’ में जो बेहतरीन नृत्य किया है, उसका इस गीत की लोकप्रियता में बहुत बड़ा योगदान है. यही वजह है कि फिल्म के निर्माता निर्देशक, कलाकारों, गीतकार और संगीतकार के साथ-साथ नृत्य निर्देशक प्रेम रक्षित भी इन दिनों चर्चा में हैं.

नृत्य निर्देशन की जितनी तारीफ की जाए कम है

‘नातू’ का मतलब ‘नाचना’ होता है और इस गीत को देख-सुनकर पैर अपने आप थिरकने लगते हैं. इसमें प्रेम रक्षित के नृत्य निर्देशन की जितनी तारीफ की जाए कम है. उनके शानदार नृत्य निर्देशन ने सात समंदर पार भारतीय सिनेमा का डंका बजा दिया.

चेन्नई में हुआ था जन्म

प्रेम रक्षित का जन्म 14 दिसंबर 1977 को तमिलनाडु के चेन्नई में हुआ था. उन्होंने चेन्नई के ही सेंट गैब्रियल हाईस्कूल से स्कूली शिक्षा पूरी की और बाद में ग्राफिक्स और वीएफएक्स डिजाइन में डिग्री हासिल की. प्रेम रक्षित के परिवार में माता-पिता के अलावा एक छोटा भाई है. उनकी पत्नी का नाम राजलक्ष्मी और बेटे का नाम परीक्षित है.

उनके पिता हीरों के व्यापारी थे

तेलुगु और तमिल भाषा में 70 से ज्यादा फिल्मों में नृत्य निर्देशन करने वाले प्रेम रक्षित का परिवार एक समय खासा संपन्न हुआ करता था. उनके पिता हीरों के व्यापारी थे और मां गृहिणी थीं. 1993 में किन्हीं कारणों से उनके पिता को अपने पारिवारिक कारोबार से अलग होना पड़ा और वहीं से उनके परिवार के तंगी के दिन शुरू हुए.

दर्जी की दुकान पर छोटी-मोटी नौकरी करने लगे

पिता ने परिवार चलाने के लिए फिल्मों में नृत्य निर्देशक के तौर पर काम करना शुरू कर दिया. वहीं, प्रेम रक्षित एक दर्जी की दुकान पर छोटी-मोटी नौकरी करने लगे. प्रेम रक्षित ने एक अखबार को दिए साक्षात्कार में बताया कि पिता की कमाई से घर चलाना मुश्किल था, वह खुद भी डांस यूनियन फेडरेशन के सदस्य थे, लेकिन कहीं काम न मिलने से परेशान थे.

तंगहाली से परेशान होकर आत्महत्या करना चाहते थे

उन्होंने कहा कि परिवार की तंगहाली से परेशान होकर उन्होंने एक बार तो आत्महत्या करने तक का मन बना लिया था, क्योंकि उन्हें लगा कि अगर वह जान दे देंगे तो फेडरेशन अपने नियम के अनुसार उनके परिवार को 50 हजार रुपये देगी, जिससे उसे काफी मदद मिलेगी.

उधारी की साइकिल ने रक्षित को खुदकुशी से रोक दिय

रक्षित बताते हैं कि वह आत्महत्या का मन बनाकर किसी से साइकिल उधार लेकर चेन्नई के मरीना बीच की तरफ चल पड़े, लेकिन वहां पहुंचकर ख्याल आया कि जिसकी साइकिल लेकर आए हैं, वह उनके परिवार से अपनी साइकिल मांगने आएगा तो क्या होगा? उधारी की साइकिल ने रक्षित को खुदकुशी से रोक दिया. रक्षित साइकिल लेकर घर पहुंचे तो उनके पिता ने बताया कि उन्हें एक फिल्म में बैंकग्राउंड डांसर के तौर पर काम मिल गया है. इसके बाद धीरे-धीरे उन्हें काम मिलने लगा और उनके दिन बदलने लगे. साल 2004 में आई तेलुगु फिल्म ‘विद्यार्थी’ से उन्होंने नृत्य निर्देशक के तौर पर सिनेजगत में कदम रखा और 2005 में प्रदर्शित राजामौली की फिल्म ‘छत्रपति’ ने उन्हें मशहूर कर दिया.

Also Read: सुशांत सिंह राजपूत को इग्नोर करने को लेकर अनुराग कश्यप को है पछतावा, मौत से 3 हफ्ते पहले की थी रिक्वेस्ट
राजामौली के बच्चों को डांस भी सिखाया था

मजे की बात यह है कि फिल्म ‘विद्यार्थी’ के बाद उन्हें ज्यादा काम नहीं मिल रहा था और तंगी के दिनों में उन्होंने राजामौली के बच्चों को डांस भी सिखाया था. तब तक राजामौली को यह नहीं पता था कि ‘विद्यार्थी’ का नृत्य निर्देशन रक्षित ने ही किया था. उन्होंने एक दिन हिम्मत करके राजामौली को सच बता दिया. इसके बाद, राजामौली ने उन्हें फिल्म ‘छत्रपति’ के नृत्य निर्देशन का जिम्मा सौंप दिया.

रक्षित के काम की हर तरफ तारीफ होने लगी

‘छत्रपति’ के नृत्य निर्देशन के बाद रक्षित के काम की हर तरफ तारीफ होने लगी. उन्हें बहुत-सी फिल्मों में बेहतरीन काम के लिए ढेरों अवॉर्ड मिले, लेकिन ‘छत्रपति’ के जरिये राजामौली के साथ उनका जो रिश्ता जुड़ा था, वह आज तक कायम है. इन दोनों का काम इन्हें ऑस्कर पुरस्कार की दौड़ में ले आया है.

विज्ञापन
Agency

लेखक के बारे में

By Agency

Agency is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola