फिल्मों के माध्यम से हमेशा शास्त्रीय नृत्य को ही बढ़ावा दिया है:माधुरी

Updated at : 16 Jun 2014 10:08 AM (IST)
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फिल्मों के माध्यम से हमेशा शास्त्रीय नृत्य को ही बढ़ावा दिया है:माधुरी

नयी दिल्ली: माधुरी दीक्षित ने अपने लंबे फिल्मी करियर में नृत्य पर आधारित मात्र एक ही फिल्म आजा नचले की है, लेकिन बॉलीवुड की इस खूबसूरत अदाकारा का कहना है कि हमेशा अपने काम से वे शास्त्रीय नृत्य कलाओं को बढ़ावा देने की कोशिश करती रही हैं. माधुरी ने हाल में आई अपनी फिल्म डेढ […]

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नयी दिल्ली: माधुरी दीक्षित ने अपने लंबे फिल्मी करियर में नृत्य पर आधारित मात्र एक ही फिल्म आजा नचले की है, लेकिन बॉलीवुड की इस खूबसूरत अदाकारा का कहना है कि हमेशा अपने काम से वे शास्त्रीय नृत्य कलाओं को बढ़ावा देने की कोशिश करती रही हैं.

माधुरी ने हाल में आई अपनी फिल्म डेढ इश्किया में एक कत्थक नृत्यांगना का किरदार निभाया था. फिल्म में उनपर एक गाना भी फिल्माया गया है जिसमें उन्होंने पारंपरिक नृत्य किया है और इसका नृत्य निर्देशन स्वयं कत्थक सम्राट बिरजू महाराज ने किया है.

माधुरी ने कहा, हालांकि मैंने आजा नचले के सिवाय कोई अन्य नृत्य आधारित फिल्म नहीं की है लेकिन अपने करियर के शुरुआत से ही मैंने अपनी फिल्मों के माध्यम से शास्त्रीय नृत्य-संगीत को बढावा देने का प्रयास किया है.

माधुरी ने कहा, मेरी फिल्म (डेढ इश्किया) में मैंने एक कत्थक नृत्यांगना का किरदार निभाया था और एक प्यारे से शास्त्रीय गाने पर नृत्य किया जिसे खुद महाराज जी (बिरजू) ने कोरियोग्राफ किया था.अपने तीन दशक लंबे फिल्मी जीवन में 47 वर्षीय अभिनेत्री ने फिल्म इंडस्टरी को कुछ बेहतरीन नृत्य गीत दिए हैं. उन्होंने कहा कि जिन गानों में भारतीय परंपराओं से जुडा नृत्य होता है वह जनमानस के पटल पर लंबे समय तक विद्यमान रह जाते हैं.

उन्होंने कहा, पश्चिमी और अन्य प्रभाव वाली नृत्य शैलियां आजकल हर जगह दिखाई देती हैं यहां तक कि बॉलीवुड में भी वे शुरुआती दिनों से हैं. लेकिन अगर आप गौर से देखेंगे तो पाएंगे कि जो गाने सुपरहिट हुए हैं उनका कहीं न कहीं भारतीयता से जुडाव रहा है. नगर में माधुरी ताजमहल चाय के नए स्वाद को लांच करने आयी थी. शाम के एक कार्यक्रम में माधुरी और युवा सितारवादक नीलाद्री कुमार ने एक संगीत प्रस्तुति भी दी.

धक धक गर्ल के नाम से मशहूर माधुरी का कहना है कि युवा पीढी को आगे आकर शास्त्रीय कला-संगीत के बारे में जागरुकता फैलानी चाहिए क्योंकि एक तो वे युवा मन की आकांक्षाओं को बखूबी समझते हैं और साथ ही पारंपरिक मूल्यों की भी उन्हें बेहतर समझ है. इसलिए वही हैं जो शास्त्रीय संगीत की मशाल को लेकर आगे चल सकते हैं.

माधुरी ने कहा, उन्हें (युवा) इस मशाल को लेकर आगे चलना चाहिए और संगीत को सबके लिए सुलभ बनाने का प्रयास करना चाहिए और उन्हें यह अहसास दिलाना चाहिए कि ये बहुत कठिन नहीं है. लोगों को जागरुक करने के लिए हम सभी को साथ आकर प्रयास करने होंगे.

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