IIT Kanpur Student Suicide: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कानपुर में रामस्वरूप ईश्वराम की मौत दूसरी घटना बताई जा रही है. इससे पहले इंस्टीट्यूट के एक बीटेक स्टूडेंट ने सुसाइड कर लिया था. डॉ. सिद्धार्थ सिन्हा(Ranchi Institute of Neuro- psychiatry and Allied Sciences) ने बताया कि स्टूडेंट्स में स्ट्रेस और मानसिक तनाव होना आम समस्या है. लेकिन ये क्यों होता है और इसका सॉल्यूशन क्या है, उन्होंने इस पर भी बात की.
Bipolar Disorder क्या होता है? आसान भाषा में समझें
बाइपोलर डिसऑर्डर एक मानसिक बीमारी है. इसमें इंसान का मूड बहुत तेजी से बदलता रहता है. कई बार तो बहुत एक्टिव फील होता है. लेकिन कई बार बहुत लो फील होता है. अचानक उदास और किसी काम में मन नहीं लगने जैसा महूसस करते हैं.
क्या बाइपोलर डिसऑर्डर में मौत के ख्याल आते हैं?
RINPAS के डॉ सिद्धार्थ ने बताया कि नॉर्मल डिप्रेशन (Normal Depression) की तुलना में Bipolar Disorder में सुसाइड करने के ख्याल अधिक बढ़ जाते हैं.
स्टूडेंट्स में बाइपोलर डिसऑर्डर
उन्होंने कहा कि हायर एजुकेशन हासिल करने वालों पर पढ़ाई का लोड रहता है. कुछ मामलों में देखा गया है कि युवा कॉलेज/यूनिवर्सिटी पहुंचने के बाद शराब, गांजा और अन्य ड्रग्स की आदत पकड़ लेते हैं. स्ट्रेस और इस तरह की हैबिट से Bipolar Disorder ट्रिगर होना कॉमन है.
(Note:- यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि कॉमन रीजन को डिस्कस किया गया है. ऐसा नहीं है कि आईआईटी कानपुर या अन्य केसेज में ऐसा ही हुआ है. हम इस प्रकार का कोई दावा नहीं कर रहे हैं)
Bipolar Disorder Symptoms: क्या हैं लक्षण?
स्टूडेंट्स में बाइपोलर डिसऑर्डर के लक्षण –
- डिप्रेसिव एपिसोड शुरू होना
- क्लास नहीं जाना या पढ़ाई में मन नहीं लगना
- वर्चुअल वर्ल्ड में ज्यादा समय बिताना
Bipolar Disorder Solutions: क्या है सॉल्यूशन?
छोटे और बड़े लेवल पर कॉलेज या यूनिवर्सिटी में ऐसे कई सुधार किए जा सकते हैं, जिससे इस तरह की घटना को रोका या कम किया जा सके. इनमें से कुछ कारण को यहां डिस्कस करेंगे.
कॉलेज में साइकेट्रिस्ट मौजूद हों
डॉ सिद्धार्थ ने कहा कि कॉलेज या यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट को बाइपोलर डिसऑर्डर या किसी भी तरह के मानसिक तनाव से बचाने के लिए बहुत जरूरी है कि इंस्टीट्यूट में पूरी व्यवस्था हो. रेगुलर क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट (Clinical Psychologists) और साइकेट्रिस्ट (Psychiatrist) होने चाहिए. साथ ही इस तरह के किसी केस में परिवार और घर वालों को शामिल करना चाहिए.
नशे का बैड इफेक्ट समझाया जाए
डॉक्टर ने बताया कि इंस्टीट्यूट में बड़े लेवल पर ड्रग्स स्क्रीनिंग होनी चाहिए. साथ ही शराब और ड्रग्स का बैड इफेक्ट समझाया जाए. कई स्टूडेंट्स पीयर प्रेशर में बुरी आदतें पकड़ लेते हैं.
मेंटल परेशानी के लिए हेल्प लेने पर कोई भेदभाव न हो
उन्होंने समझाया कि मेंटल हेल्थ को लेकर कई लोगों में स्टिगमा (बदनामी) की फीलिंग है. जो स्टूडेंट हेल्प ले रहे हैं, उन्हें पागल न समझा जाए. साथ ही कई बार स्टूडेंट्स पर इस तरह का प्रेशर होता है कि अगर उन्होंने इस तरह की काउंसलिंग या हेल्प ली है तो बड़ी कंपनी उन्हें प्लेसमेंट ऑफर नहीं करेगी.
IIT Kanpur Student Suicide: कौन है सुसाइड करने वाला पीएचडी स्टूडेंट?
राजस्थान के चेरू जिले के रहने वाले रामस्वरूप ईश्वराम की जान आईआईटी कानपुर के हॉस्टल में गई. 25 साल के रामस्वरूप अर्थ साइंस सब्जेक्ट से पीएचडी कर रहे थे. कुछ समय से मानसिक तनाव और एंजाइटी से परेशान थे. यही वजह है कि पत्नी और बेटी उनके साथ रह रहे थे. घटना के एक दिन पहले ही उन्होंने इंस्टीट्यूट के काउंसलिंग सेल में जाकर काउंसलिंग ली थी.
कॉलेज के डीन ने मीडिया से बातचीत में कहा कि रामस्वरूप ने जुलाई 2023 में इंस्टीट्यूट में एडमिशन लिया था. उनका अकैडमिक रिकॉर्ड अच्छा था और उनका स्कोर सीपीआई 9 था. रिपोर्ट्स की मानें तो स्टूडेंट को बाइपोलर डिसोऑर्डर था. हालांकि, सुसाइड का क्या कारण था अभी तक ये क्लियर नहीं है.
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