धनबाद से अशोक और अजय की रिपोर्ट
Dhanbad Special Story: झारखंड का सबसे प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक टेक्निकल इंस्टीट्यूट बीआईटी सिंदरी आज गंभीर एजुकेशनल क्राइसिस के दौर से गुजर रहा है. आजादी के बाद स्थापित देश का पहला सरकारी इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट कभी ज्वाइंट बिहार का गौरव था. अलग राज्य बनने के बाद यह झारखंड की एजुकेशनल पहचान बना. आज भी हजारों स्टूडेंट्स के सपने इस इंस्टीट्यूट से जुड़े हैं, लेकिन यह इंस्टीट्यूट टीचरों की भारी कमी से जूझ रहा है.
306 सैंक्शन पोस्ट, 40% से भी कम टीचर
बीआईटी सिंदरी में शिक्षकों के लिए कुल 306 सैंक्शन पोस्ट हैं, लेकिन हालत बेहद चिंताजनक है. इंस्टीट्यूट में अभी केवल 83 रेग्युलर टीचर, 25 कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर और 7 नीड बेस्ड टीचर काम कर रहे हैं. यानी सिर्फ करीब 115 टीचरों के भरोसे 4,500 से अधिक स्टूडेंट्स के एकेडमिक सेशन चलाया जा रहा है. टीचरों की कमी का सीधा असर क्लासरूम टीचिंग, लैब वर्क, रिसर्च और स्टूडेंट्स के एकेडमिक गाइडेंस पर पड़ रहा है. कई फैकल्टीज में एक ही टीचर को एक साथ कई सब्जेक्ट पढ़ाने पड़ रहे हैं. इससे पढ़ाई की क्वालिटी पर भी असर पड़ रहा है.
रिसोर्स की कमी झेल रहा इंस्टीट्यूट
बीआईटी सिंदरी का इतिहास देश के टेक्निकल एजुकेशन के क्षेत्र में एक गौरवपूर्ण अध्याय रहा है. यह इंस्टीट्यूट देश के पहले आईआईटी कॉलेज खड़गपुर से भी पहले अस्तित्व में आया था. शुरुआत से ही यह इंस्टीट्यूट इंडस्ट्री को स्किल्ड और एक्सपर्ट इंजीनियर देता रहा है. यहां से पढ़कर निकलने वाले स्टूडेंट्स देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं. बीआईटी सिंदरी ने कई जाने-माने साइंटिस्ट, शिक्षाविद, टेक्नोक्रेट्स और प्रशासक दिए हैं. लेकिन आज वही बीआईटी सिंदरी टीचरों की कमी से जूझ रहा है.
सीटें 60% बढ़ीं, टीचर्स नहीं बढ़े
साल 2023 में बीआईटी सिंदरी में बीटेक की कुल सीटें 680 से बढ़ाकर 1125 कर दी गईं. यानी इसमें करीब 60% से ज्यादा बढ़ोतरी की गई. एमटेक और पीएचडी प्रोग्राम्स भी लगातार विस्तार में हैं. सीटें बढ़ाने के बावजूद शिक्षकों के सैंक्शन पोस्ट में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई. नतीजा यह हुआ कि मौजूदा फैकल्टी पर अधिक बोझ बढ़ गया. बड़े बैच, लिमिटेड टीचर और बढ़ती एकेडमिक एक्सपेक्टेशंस का कॉम्बिनेशन बीआईटी सिंदरी के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है.
जेपीएससी से होती है भर्ती, लेकिन प्रोसेस बेहद धीमी
बीआईटी सिंदरी में टीचरों का अप्वाइंटमेंअ झारखंड पब्लिक सर्विस कमिशन (जेपीएससी) के माध्यम से होती है. आखिरी बार साल 2023 में जेपीएससी के जरिए 20 टीचरों को अप्वाइंट किया गया था. इसके बाद अभी तक इस दिशा में कोई ठोस प्रोग्रेस नहीं हो पाया है. इंस्टीट्यूट के लेवल पर बार-बार वैकेंट पोस्ट की जानकारी सरकार को भेजी जा चुकी है, लेकिन भर्ती प्रक्रिया की धीमी गति के कारण स्थिति जस की तस बनी हुई है.
झारखंड के स्टूडेंट्स का फर्स्ट च्वाइस है बीआईटी सिंदरी
बीआईटी सिंदरी, झारखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी (जेयूटी) के अंदर ऑपरेट किया जाता है. यह झारखंड के इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स की पहली पसंद माना जाता है. यहां बीटेक के 11 प्रोग्राम्स में 4,000 से अधिक स्टूडेंट्स पढ़ाई कर रहे हैं. एमटेक के 10 प्रोग्राम्स में 250 से ज्यादा स्टूडेंट्स और पीएचडी के 150 से अधिक स्कॉलर्स रिसर्च कर रहे हैं. कुल मिलाकर बीआईटी सिंदरी में करीब 4,500 स्टूडेंट्स पढ़ाई कर रहे हैं, जिनके लिए मौजूदा फैकल्टी स्ट्रेंथ नाकाफी साबित हो रही है.
नए इंजीनियरिंग कॉलेज खुले तो बीआईटी से भेजे गए टीचर
झारखंड में नए सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों के खुलने का असर भी बीआईटी सिंदरी पर पड़ा है. लगभग हर नए कॉलेज के लिए स्थायी शिक्षकों का ट्रांसफर बीआइटी सिंदरी से ही किया गया. पलामू इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए 15 टीचर, चंदनकियारी के लिए 2, गोड्डा के लिए 3 और झारखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी के लिए 3 टीचर बीआईटी सिंदरी से भेजे गए. इससे पहले से जूझ रहे संस्थान में फैकल्टी की संख्या और भी घटती चली गई.
इसे भी पढ़ें: Rajarappa News: रजरप्पा में बोले नौसेना प्रमुख – हर चुनौती का पूरी कड़ाई से दिया जाएगा जवाब
सरकार को भेजी गई रिपोर्ट, जल्द भर्ती की उम्मीद
बीआईटी सिंदरी की ओर से झारखंड सरकार को टीचरों के स्टेटस को लेकर विस्तृत रिपोर्ट भेजी जा चुकी है. इसी आधार पर हायर एंड टेक्निकल एजुकेशन डिपार्टमेंट ने जेपीएससी को अप्वाइंटमेंट प्रोसेस शुरू करने का डायरेक्शन दिया है. बीआईटी सिंदरी के डायरेक्टर डॉ पंकज राय ने कहा कि जल्द ही इस दिशा में ठोस पहल होगी और संस्थान को पर्याप्त संख्या में शिक्षक उपलब्ध कराए जाएंगे.
इसे भी पढ़ें: Netaji Jayanti 2026: रांची के लालपुर के इस घर में आज भी जिंदा हैं नेताजी की यादें, फणिंद्र आयकत साथ थे खड़े
