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शिक्षा के क्षेत्र में है असीम संभावनाएं, जानिए शिक्षक बनने के लिए देनी होती है कौन सी परीक्षाएं

शिक्षण को दुनिया भर में बेहद सम्मानित पेशे के तौर पर देखा जाता है. भारतीय संस्कृति में तो गुरु को ईश्वर के समतुल्य बताया गया है. गुरु-शिष्य परंपरा वाले हमारे देश में समय के साथ शिक्षण का तरीका बेशक बदला है, लेकिन इस क्षेत्र में संभावनाएं लगातार बढ़ी हैं.

जुनून, दृढ़ता और धीरज, ये शब्द एक शिक्षक को परिभाषित करते हैं. शिक्षक को समाज निर्माता के तौर पर देखा जाता है, जो छात्रों के समग्र विकास में अहम भूमिका निभाते हैं. छात्रों को शिक्षा देने के साथ-साथ जीवन और आजीविका के लिए तैयार करना, उनके चरित्र का निर्माण करना, व्यक्तित्व को आकार देना शिक्षक का काम है. आप अगर एक शिक्षक के तौर पर करियर बनाना चाहते हैं, तो अपनी शैक्षणिक योग्यता एवं संचार कौशल के अनुकूल राह चुन इस दिशा में आगे बढ़ सकते हैं.

एक राह चुन करें खुद को तैयार

स्कूल शिक्षक से लेकर कॉलेज अध्यापक तक शिक्षक के तौर पर आगे बढ़ने के कई विकल्प हैं. आप अपनी रुचि और योग्यता के अनुसार एक विकल्प चुन कर खुद को तैयार करेंगे, तो शिक्षक के तौर पर जॉब हासिल करना आपके लिए आसान होगा. आप प्ले स्कूल, नर्सरी स्कूल, प्राइमरी/ एलिमेंटरी स्कूल, सेकेंडरी स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी, एजुकेशनल रिसर्च इंस्टीट्यूट, स्पेशल स्कूल टीचिंग में से किसी एक राह को चुन सकते हैं.

नर्सरी, प्राइमरी/ एलिमेंटरी स्कूल : आप नर्सरी या प्राइमरी टीचर के तौर पर जॉब करना चाहते हैं, तो 12वीं के बाद नर्सरी टीचर ट्रेनिंग (एनटीटी) कर अच्छी शुरुआत कर सकते हैं. एनटीटी एक साल का कोर्स है, जिसमें कई जगह प्रवेश परीक्षा, तो कहीं-कहीं 12वीं के अंकों के आधार पर एडमिशन दिया जाता है. जूनियर बेिसक ट्रेनिंग एवं डिप्लोमा इन एजुकेशन (डीएड) जैसे कोर्स प्राइमरी टीचर बनने का रास्ता बनाते हैं. इन कोर्सेज में प्रवेश के लिए न्यूनतम योग्यता 12वीं है.

सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी

आमतौर पर सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी स्कूल (9वीं से 12वीं तक) में हर एक विषय के विशेष शिक्षक होते हैं. सेकेंडरी एवं सीनियर सेकेंडरी के छात्रों को पढ़ाने की न्यूनतम योग्यता ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन के साथ बैचलर ऑफ एजुकेशन (बीएड) एवं मास्टर ऑफ एजुकेशन (एमएड) है.

सेंट्रल टीचर एलिजबिलिटी टेस्ट

शिक्षक बनने के लिए जरूरी परीक्षाएं

केंद्रीय विद्यालय, तिब्बती स्कूल और नवोदय विद्यालयों समेत तमाम सरकारी विद्यालयों में शिक्षक बनने के लिए सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसइ) की ओर से आयोजित परीक्षा सीटेट पास करना आवश्यक है. 12वीं पास होने के साथ दो वर्षीय प्राथमिक शिक्षा में डिप्लोमा या 12वीं के साथ चार वर्षीय बैचलर ऑफ एलिमेंटरी एजुकेशन या न्यूनतम 50 प्रतिशत अंकों में स्नातक के साथ बीएड डिग्री धारक यह परीक्षा दे सकते हैं.

सीटेट का आयोजन वर्ष में दो बार किया जाता है. सीटेट-2021 के दूसरी बार के आयोजन के लिए तारीखों की घोषणा अभी नहीं हुई है. अभ्यर्थियों को परीक्षा से संबंधित अपडेट के लिए आधिकारिक वेबसाइट विजिट करते रहने की सलाह दी गयी है.

टीजीटी एवं पीजीटी

राज्य स्तर पर आयोजित होनेवाली परीक्षाएं-टीजीटी (ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर) देने के लिए ग्रेजुएट व बीएड एवं पीजीटी (पोस्ट ग्रेजुएट टीचर) के लिए पोस्ट ग्रेजुएट और बीएड होना आवश्यक है. टीजीटी पास शिक्षक 6वीं से लेकर 10वीं तक एवं पीजीटी के शिक्षक सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी छात्रों को पढ़ाते हैं.

टीचर एलिजबिलिटी टेस्ट

कई राज्यों में बीएड करने के बाद शिक्षक बनने के लिए टीइटी पास करना अनिवार्य है. इस टेस्ट को पास करने पर एक सर्टिफिकेट मिलता है, जो सरकारी स्कूल में शिक्षक की जॉब में आवेदन के लिए मान्य होता है.

Posted by: Pritish Sahay

Prabhat Khabar News Desk
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