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कोरोना संकट से त्रस्त उद्योग को मोदी सरकार का दिवाली गिफ्ट, 10 सेक्टरों को मिलेगा 2 लाख करोड़ का पैकेज

By Agency
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केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद जानकारी देतीं वित्त मंत्री निर्मला सीमारमण.
केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद जानकारी देतीं वित्त मंत्री निर्मला सीमारमण.
फोटो : पीटीआई.

नयी दिल्ली : कोरोना संकट से त्रस्त उद्यमियों को राहत देने के लिए मोदी सरकार ने बुधवार को 2 लाख करोड़ रुपये के पैकेज के दिवाली गिफ्ट देने का फैसला किया है. सरकार ने 10 सेक्टरों को उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) देने का फैसला किया है. बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगा दी गई है.

केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सरकार के फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार कुल 10 सेक्टरों को उत्पादन आधारित प्रोत्साहन देने और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की वायबिलिटी गैप फंडिंग के लिए अगले पांच साल में 2 लाख करोड़ रुपये खर्च करेगी.

उन्होंने कहा कि इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, उभरते हुए सेक्टरों को सहयोग और आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा मिलेगा. कोरोना महामारी से परेशान देश की जनता और उद्योग जगत को राहत देने के लिए सरकार लगातार राहत पैकेज का ऐलान कर रही है. इसे एक और राहत पैकेज के रूप में देखा जा सकता है.

किन सेक्टरों को होगा फायदा

वित्त मंत्री ने बताया कि सरकार के इस फैसले से जिन सेक्टरों को राहत मिलेगी, उनमें एडवांस केमिस्ट्री सेल बैटरी (18,100 करोड़ रुपये), इलेक्ट्रॉनिक ऐंड टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट (5000 करोड़ रुपये), ऑटोमोबाइल और ऑटो कम्पोनेंट्स (57,042 करोड़ रुपये), फार्मास्यूटिकल ड्रग्स (15,000 करोड़ रुपये), टेलीकॉम एवं नेटवर्किंग प्रोडक्ट (12,195 करोड़ रुपये), टेक्सटाइल उत्पाद (10,683 करोड़ रुपये), फूड प्रोडक्ट्स (10,900 करोड़ रुपये), सोलर पीवी मॉड्यूल्स (4,500 करोड़ रुपये), व्हाइट गुड्स (6,238 करोड़ रुपये) और स्पेशलिटी स्टील (6,322 करोड़ रुपये) शामिल हैं. इसके अलावा, बुनियादी ढांचा के कई क्षेत्रों के लिए वाय​बिलिटी गैप फंडिंग के तहत कई पीपीपी परियोजनाओं को मदद का ऐलान भी किया गया है. इसके तहत भी सरकार बड़ी रकम खर्च करेगी.

क्या होता है पीएलआई

सरकार ने देश में निर्माण को बढ़ावा देने और निर्यात बिल में कमी लाने के लिए इस साल मार्च में उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) का ऐलान किया था. इसके तहत, देश के कारखानों में बनने वाले उत्पादों की बिक्री में बढ़त के आधार पर कंपनियों को प्रोत्साहन राशि दी जाती है. इससे विदेशी कंपनियां भी भारत में कारखाने लगाकर उत्पादन करने को प्रोत्साहित होती हैं.

इसके पहले इस योजना का लाभ मोबाइल हैंडसेट और दवा कंपनियों को दिया जा चुका है. इससे खासकर देश के विनिर्माण क्षेत्र को राहत मिलेगी और उसमें तेजी आएगी. इस क्षेत्र का देश के जीडीपी में करीब 16 फीसदी का योगदान है. इससे भारतीय विनिर्माण क्षेत्र को दुनिया में प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकेगा और निर्यात को भी बल मिलेगा.

posted By : Vishwat Sen

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