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Black Wheat Sowing Time : 'काला गेहूं' किसानों और डायबिटीज रोगियों के लिए है रामबाण, घर में बरसेगा 'सोना', जानिए कैसे...?

By Prabhat Khabar Digital Desk
Updated Date
मधुमेह का रामबाण है.
मधुमेह का रामबाण है.
फाइल फोटू.

Black Wheat Sowing Time : क्या आप किसान हैं? अगर नहीं तो कस्बों, नगरों या फिर महानगरों में नौकरी कीजिए और यदि हां तो फिर आपके लिए काम की खबर है. आप इधर आइए. आपके लिए काम की खबर है. किसान भाइयों, क्या आप हमेशा यही चाहते हैं कि आप कर्ज लेकर फसलों की बुआई करें और आपके गेहूं की फसल का मुनाफा बहुराष्ट्रीय या फिर देश में ही बहुराष्ट्रीय कंपनियों की तर्ज पर पैदा होने वाली कंपनियां मार ले जाएं? नहीं, न! अगर नहीं, तो इस नवंबर के महीने में आप सचेत हो जाएं और आज ही से रबी की सर्वोत्तम फसलों में से एक गेहूं की बुआई शुरू कर दें.

डायबिटीज को भगाता है काला गेहूं

दरअसल, आपको इस बात की जानकारी नहीं होगी कि खेतों में पैदा वाला काला रंग का गेहूं डायबिटीज या फिर मधुमेह की सबसे बड़ी दवा है. यही काला गेहूं मधुमेह के रोगियों की पाचनशक्ति बढ़ाने के साथ ही शरीर में एक अलग प्रकार के शक्तिवर्द्धक एंजाइम्स पैदा करता है और यही काला गेहूं आपके लिए कुबेर का खजाना साबित हो सकता है. अगर आपने इस नवंबर के महीने में इसकी बुआई नहीं की, तो फिर आप मान लीजिए कि आपने खेती-बाड़ी के लिए कुछ नहीं किया. फिलहाल, जानिए कि कैसे काला गेहूं कुबेर का खजाना साबित हो सकता है.

शोधित बीज से बढ़ेगी पैदावार

देश के वैज्ञानिकों के अनुसार, पारंपरिक बीज से अलग काले गेंहू का शोधित बीज अपनाएंगे तो निश्चित रूप से उपज के साथ कमाई में भी बढ़ोतरी होने के आसार अधिक हैं. देश के कई किसान काला गेहूं की बंपर खेती करके नोट पीट रहे हैं. काले गेहूं की फसल को कृषि विभाग के अधिकारी अच्छा संकेत मान रहे हैं. कृषि अधिकारी मानते हैं कि ये गेहूं डायबिटीज वाले लोगों के लिए बहुत ही फायदेमंद है. मौजूदा समय में उत्तर प्रदेश के कई जिलों में धीरे-धीरे काला गेहूं की फसल की बुवाई का रकबा बढ़ रहा है.

30 नवंबर से पहले करें बुआई

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि मौजूदा समय काला गेहूं खेती के लिए उपयुक्त है, क्योंकि इसकी खेती के लिए खेत में पर्याप्त नमी होनी चाहिए. किसान 30 नवंबर तक की इस गेहूं की बुवाई आसानी से कर सकते हैं. अगर इसकी बुवाई देर से की जाए, तो फसल की पैदावार में कमी आ जाती है. जैसे-जैसे बुवाई में देरी होती है, वैसे-वैसे गेहूं की पैदावार में गिरावट आ जाती है.

अधिकतम 6000 रुपये क्विंटल बाजार में बिकता है काला गेहूं

उत्तर प्रदेश के रायबरेली में पिछले साल महज 8 किसानों ने काले गेहूं की खेती की थी, लेकिन इस साल लगभग करीब 100 से अधिक किसानों ने काला गेहूं की बुआई की तैयारी शुरू कर दी है. इसकी खेती की खासियत यह है कि फसल का न सिर्फ उत्पादन अधिक होता है, बल्कि यह बाजार में 4,000 से 6,000 हजार रुपये प्रति क्विंटल की कीमत पर बिकता है, जो अन्य गेहूं की फसल से दोगुना है.

कैसे करें बुआई?

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, किसानों को काला गेहूं की बुआई सीडड्रिल से करनी चाहिए. ऐसा करने से उर्वरक और बीज की अच्छी बचत की जा सकती है. काला गेहूं का उत्पादन सामान्य गेहूं की तरह ही होता है. इसकी पैदावार 10 से 12 क्विंटल प्रति बीघे होती है. किसान बाजार से बीज खरीद कर बुआई कर सकते हैं. यह सीजन इसकी बुआई के लिए बेहतरीन माना जाता है.

क्या कहते हैं वैज्ञानिक?

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि मौजूदा समय काला गेहूं खेती के लिए उपयुक्त है, क्योंकि इसकी खेती के लिए खेत में पर्याप्त नमी होनी चाहिए. किसान 30 नवंबर तक की इस गेहूं की बुवाई आसानी से कर सकते हैं. अगर इसकी बुवाई देर से की जाए, तो फसल की पैदावार में कमी आ जाती है. जैसे-जैसे बुआई में देरी होती है, वैसे-वैसे गेहूं की पैदावार में गिरावट आ जाती है.

Posted BY : Vishwat Sen

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