भारतपे और फोनपे ने आपस में सुलटाया 'पे-पे' का विवाद, लंबे अरसे से फंसा था पेंच
Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 27 May 2024 9:39 AM
भारतपे और फोनपे ने सुलटाया आपसी विवाद. फोटो: सोशल मीडिया
Controversy: भारतपे के निदेशक मंडल के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा कि यह इंडस्ट्री के लिए एक सकारात्मक कदम है. मैं दोनों पक्षों के प्रबंधन की ओर से दिखाई गई मैच्योरिटी और कारोबारी सूझबूझ की सराहना करता हूं.
Controversy: ऑनलाइन डिजिटल पेमेंट ऐप का मालिकाना हक रखने वाली कंपनी भारतपे और फोनपे ने कारोबारी ट्रेडमार्क नाम के पीछे लगने वाले वाले प्रत्यय वाले शब्द ‘पे-पे’ को लेकर लंबे समय से चले रहे विवाद को सुलटा लिया है. मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय प्रौद्योगिकी कंपनी भारतपे ग्रुप और फोनपे ग्रुप ने प्रत्यय ‘पे’ के साथ ट्रेडमार्क के इस्तेमाल से संबंधित लंबे समय से चले आ रहे सभी कानूनी विवादों को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलटा लिया है.
पांच साल से अदालतों में लड़ रही हैं दोनों कंपनियां
दोनों कंपनियों की ओर से जारी बयान के अनुसार, भारतपे और फोनपे पिछले पांच बरसों के दौरान कई अदालतों में लंबे समय से चले आ रहे कानूनी विवादों में फंसी रही हैं. यह समझौता सभी खुली न्यायिक कार्यवाही को समाप्त कर देगा. बयान में कहा गया कि भारतपे और फोनपे ने लंबे समय से चले आ रहे सभी ट्रेडमार्क विवादों को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलटा लिया है. बयान के अनुसार, अगले कदम के रूप में पार्टियों ने ट्रेडमार्क रजिस्ट्री में एक-दूसरे के खिलाफ सभी विरोधों को वापस लेने के लिए पहले ही कदम उठा लिया है, जिससे उन्हें अपने संबंधित ट्रेडमार्क के रजिस्ट्रेशन के साथ बढ़ने में मदद मिलेगी.
इंडस्ट्री के लिए सकारात्मक कदम
भारतपे के निदेशक मंडल के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा कि यह इंडस्ट्री के लिए एक सकारात्मक कदम है. मैं दोनों पक्षों के प्रबंधन की ओर से दिखाई गई मैच्योरिटी और कारोबारी सूझबूझ की सराहना करता हूं, जो सभी बकाया कानूनी मुद्दों को हल करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं और मजबूत डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में अपनी ऊर्जा और संसाधनों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं.
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दिल्ली-मुंबई हाईकोर्ट वापस लेंगे सारे मामले
दोनों कंपनियां दिल्ली उच्च हाईकोर्ट और मुंबई हाईकोर्ट के समक्ष सभी मामलों के संबंध में समझौते के तहत दायित्वों का पालन करने के लिए अन्य आवश्यक कदम उठाएंगे. फोनपे के संस्थापक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) समीर निगम ने कहा कि मुझे खुशी है कि हम इस मामले में एक सौहार्दपूर्ण समाधान पर पहुंच गए हैं. इस नतीजे से दोनों कंपनियों को आगे बढ़ने और समग्र रूप से देश के वित्तीय प्रौद्योगिकी उद्योग को बढ़ाने पर हमारी सामूहिक ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित करने में लाभ होगा.
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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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