राजन का दूसरा टर्म : पीएम व जेटली के समर्थन के बाद भी कौन सा लॉबी कर रहा है विरोध ?

By Prabhat Khabar Digital Desk
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मुंबई : रिजर्व बैंक के गर्वनर रघुराम राजन के दूसरे कार्यकाल को लेकर कयासों का दौर जारी है. इस बीच मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक राजन अपने कार्यकाल का विस्तार नहीं चाहते हैं. सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली रघुराम राजन का सेवा विस्तार चाहते हैं.दूसरी पारी की चर्चा के बीच राजन एक बार कह भी चुके हैं कि उनसेउनकीराय पूछी जाये कि वे क्या चाहते हैं.

बिजनेस अखबारइकोनॉमिक टाइम्स की वेबसाइट में छपी खबर के अनुसार राजन के करीबी सूत्रों के मुताबिक रघुराम राजन ने केंद्र सरकार से कहा है कि कार्यकाल पूरा होने के बाद उन्हें अमेरिका वापस जाना है. खबर यह है कि वो फिर से अमेरिका के कोई यूनिवर्सिटी ज्वाइन करेंगे और वहां इंडियन इकोनॉमी पर रिसर्च करेंगे. उधर मीडिया में चल रही खबरों के मुताबिक राजन के कार्यकाल विस्तार रोकने के पीछे उद्योगपतियों का एक बड़ा लॉबी काम कर रहा है.
रघुराम राजन के समर्थन में कई जाने-माने उद्योगपति भी आये थे. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि उनके ऊपर निजी हमले नहीं होने चाहिए. रघुराम राजन के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि महंगाई दर में कमी और रुपये का डॉलर के मुकाबले एक हद तक मजबूती को बरकरार रखना है.
स्वामी ने उठाये थे सवाल
गौरतलब है कि रघुराम राजन के दूसरे कार्यकाल को लेकर भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने सवाल उठाए थे. स्वामी ने कहा था राजन दिमागी रूप से अमेरिकी हैं, उनके द्वारा तय की गयी नीतियों से नौकरियों की संख्या में कमी आयी है. उन्होंने कहा था कि रघुराम राजन ने एमएनसी कंपनियों को फायदा पहुंचाया है उनकी नीतियों से कृषि और लघु उद्योग बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं. नौकरियां कम हुई है.
वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण एक से अधिक बार राजन की आलोचना कर चुकी हैं. वहीं, पूर्व वित्तमंत्री व वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी चिदंबरम राजन का बचाव करते हुए कह चुके हैं कि यूपीए सरकार ने सबसे प्रतिभाशाली अर्थशास्त्रियों में से एक को गवर्नर बनाया था.
कौन सा लॉबी कर रहा है राजन का विरोध ?
आर्थिकी जगत के कई विश्लेषकों का मानना है कि रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन को दूसरे कार्यकाल विस्तार से रोकने के पीछे पूंजीपतियों का एक लॉबी काम कर रहा है.टी वी मोहनदास पई ने कहा कि राजन को दूसरे टर्म से रोकने के पीछे उन उद्योगपतियों का हाथ हो सकता है जिनका बैंकों पर भारी कर्ज बकाया है.
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