कर संधियों का फायदा उठाने के लिए मॉरीशस के रास्ते भारत में निवेश करे रहे हैं निवेशक
Updated at : 03 Jun 2015 6:53 PM (IST)
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नयी दिल्ली : कर संधियों का लाभ उठाने के लिए निवेशक मॉरीशस के रास्ते अपना निवेश भारत ला रहे हैं. विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) ने यह बात कही है. डब्ल्यूटीओ द्वारा तैयार भारत की छठी व्यापार नीति समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, ऐसा प्रतीत होता है कि इस बडे प्रवाह का एक बडा हिस्सा मॉरीशस व […]
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नयी दिल्ली : कर संधियों का लाभ उठाने के लिए निवेशक मॉरीशस के रास्ते अपना निवेश भारत ला रहे हैं. विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) ने यह बात कही है.
डब्ल्यूटीओ द्वारा तैयार भारत की छठी व्यापार नीति समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, ऐसा प्रतीत होता है कि इस बडे प्रवाह का एक बडा हिस्सा मॉरीशस व भारत के बीच संधि का लाभ उठाने के लिए किया गया है. संभवत: निवेशक तरजीही प्रावधानों का लाभ लेने के लिए मॉरीशस के रास्ते निवेश करते हैं. इनमें पूंजीगत लाभ कर छूट जैसे प्रावधान भी शामिल हैं.
औद्योगिक नीति एवं संवर्द्धन विभाग (डीआईपीपी) के आंकड़ों के अनुसार देश में 2012-13 में मॉरीशस के रास्ते 9.49 अरब डालर व 2013-14 में 4.85 अरब डालर का एफडीआई आया. वहीं 2013-14 में सिंगापुर के जरिये 5.98 अरब डालर का एफडीआई आया.
इसमें कहा गया है कि विदेशी निवेश का प्रवाह सेवाओं मसलन वित्तीय, बैंकिंग, बीमा, बिजनेस आउटसोर्सिंग, शोध एवं विकास, कुरियर व तकनीकी सेवाओं, वाहन उद्योग व दूरसंचार क्षेत्रों में काफी मजबूत रहा है.
हालांकि सामान्य कर परिवर्जन रोधक नियम (गार) को लेकर चिंता तथा भारत सरकार द्वारा उठाए गए अन्य कदमों से पिछले कुछ साल में देश में मॉरीशस के रास्ते एफडीआई का प्रवाह घटा है. इसके अलावा देश में अमेरिका, नीदरलैंड और जर्मनी जैसे देशों से विदेशी निवेश बढ रहा है.
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