Bankipur Bypoll: बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव से पहले भाजपा ने उम्मीदवार बदलाव किया है. पार्टी के उम्मीदवार अभिषेक कुमार बंटी ने नामांकन दाखिल करने के अगले ही दिन अपना नाम वापस ले लिया.
गुरुवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा की मौजूदगी में अभिषेक बंटी ने शक्ति प्रदर्शन के साथ नामांकन किया था. लेकिन शुक्रवार को उन्होंने पारिवारिक कारणों का हवाला देते हुए चुनावी मैदान से हटने का फैसला कर लिया.
इसके तुरंत बाद भाजपा ने नीरज कुमार सिन्हा को बांकीपुर सीट से अपना नया उम्मीदवार घोषित कर दिया. इस अचानक हुए बदलाव ने बिहार की राजनीति में कई सवाल खड़े कर दिए हैं.
आधिकारिक वजह परिवार, लेकिन राजनीतिक गलियारों में अलग चर्चा
भाजपा की ओर से अभिषेक बंटी के नाम वापस लेने की वजह पारिवारिक कारण बताई गई है. हालांकि, राजनीतिक हलकों में इसे लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं.
सूत्रों के अनुसार, कुछ लोगों ने अभिषेक बंटी के परिवार से जुड़े पुराने मामलों को चुनावी मुद्दा बनाए जाने की आशंका जताई थी. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उनके पिता-माता का नाम चारा घोटाला मामले से जोड़कर देखा जा रहा था.
हालांकि, इस दावे की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही भाजपा या किसी आधिकारिक एजेंसी की ओर से इसे उम्मीदवार बदलने की वजह बताया गया है. लेकिन माना जा रहा है कि पार्टी किसी भी संभावित विवाद को चुनावी मुद्दा बनने से पहले खत्म करना चाहती थी.
प्रशांत किशोर की एंट्री से बढ़ी भाजपा की चुनौती
बांकीपुर उपचुनाव इस बार सामान्य चुनाव नहीं माना जा रहा है. जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर खुद इस सीट से चुनाव मैदान में हैं. वे लगातार क्षेत्र में जनसंपर्क कर रहे हैं और उन्होंने इस चुनाव को सरकार के कामकाज पर जनता की राय से जोड़ने की कोशिश की है.
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, प्रशांत किशोर की सक्रियता ने भाजपा के लिए मुकाबले को चुनौतीपूर्ण बना दिया है. ऐसे में पार्टी किसी भी तरह के विवाद से बचना चाहती है.
अभिषेक कुमार सिन्हा बंटी लंबे समय से भाजपा से जुड़े रहे हैं. वह करीब दो दशक से पार्टी के जमीनी कार्यकर्ता के तौर पर सक्रिय बताए जाते हैं. उनके हलफनामे के मुताबिक, उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं है और उन्हें किसी मामले में दोषसिद्धि भी नहीं हुई है.
इसके बावजूद चुनावी माहौल में विपक्षी दल उनके परिवार से जुड़े मुद्दे को बड़ा बनाने की कोशिश कर सकते थे. यही वजह मानी जा रही है कि भाजपा ने उम्मीदवार बदलने का फैसला लिया.
स्थानीय संगठन की नाराजगी की भी चर्चा
राजनीतिक सूत्रों की मानें तो टिकट बदलने के पीछे स्थानीय संगठन से जुड़े फीडबैक की भी भूमिका रही है. अभिषेक बंटी को नितिन नवीन का करीबी माना जाता है. टिकट मिलने के बाद भाजपा के कुछ स्थानीय नेताओं और संभावित दावेदारों में नाराजगी की बात भी सामने आई थी. पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी कि चुनावी मैदान में संगठन पूरी ताकत के साथ उतरे.
दिल्ली से आया फैसला, बदली चुनावी रणनीति
बांकीपुर सीट भाजपा के लिए प्रतिष्ठा की सीट मानी जा रही है. ऐसे में उम्मीदवार बदलने का फैसला सिर्फ स्थानीय स्तर का नहीं बल्कि केंद्रीय नेतृत्व की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. पार्टी ने अंतिम समय में ऐसा चेहरा चुना जिस पर संगठन और सामाजिक समीकरण दोनों को साधा जा सके.
कायस्थ वोट बैंक को साधने की कोशिश
बांकीपुर विधानसभा सीट लंबे समय से कायस्थ समाज के प्रभाव वाली सीट रही है. भाजपा ने उम्मीदवार बदलने के बाद भी इस सामाजिक समीकरण को बरकरार रखा है. नीरज कुमार सिन्हा भी कायस्थ समाज से आते हैं. पार्टी को उम्मीद है कि उनके जरिए परंपरागत वोट बैंक को मजबूत रखा जा सकेगा.
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अब मुकाबला हुआ त्रिकोणीय
उम्मीदवार बदलने के बाद बांकीपुर का चुनावी मुकाबला और दिलचस्प हो गया है. अब यहां भाजपा के नीरज कुमार सिन्हा, जन सुराज के प्रशांत किशोर और राजद की रेखा गुप्ता के बीच सीधी टक्कर मानी जा रही है.
भाजपा ने आखिरी समय में उम्मीदवार बदलकर अपनी रणनीति जरूर बदली है, लेकिन इसका फायदा कितना मिलेगा यह चुनाव परिणाम ही तय करेगा. अब नजरें 30 जुलाई को होने वाली वोटिंग पर हैं, जहां बांकीपुर की जनता इन उम्मीदवारों के भविष्य का फैसला करेगी.
