पाकिस्तान में दिन दहाड़े युवा हिंदू की गोली मारकर हत्या, सड़कों पर जनता का सैलाब, हो रहा भारी विरोध प्रदर्शन

Pakistan Hindu Activist Kailash Kohli Shot Dead: पाकिस्तान के सिंध प्रांत में 25 वर्षीय हिंदू किसान और सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश कोहली की गोली मारकर हत्या कर दी गई. एक प्रभावशाली जमींदार सरफराज निजामानी पर इस घटना का आरोप लगा है. यह विवाद जमींदार की जमीन पर एक झोपड़ी बनाने को लेकर हुआ था. घटना के बाद सिंध में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए. हाइवे को ब्लॉक कर दिया गया, जनता की मांग है कि अपराधियों को जल्द से जल्द पकड़ा जाए.

By Anant Narayan Shukla | January 10, 2026 12:24 PM

Pakistan Hindu Activist Kailash Kohli Shot Dead: बांग्लादेश में हाल के दिनों में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा, हमलों और असुरक्षा की घटनाओं ने समाज को दहलाया था. अब पाकिस्तान के सिंध प्रांत से एक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने एक बार फिर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर बहस तेज कर दी है. पाकिस्तान के सिंध प्रांत में 25 वर्षीय हिंदू किसान और सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश कोहली की गोली मारकर हत्या कर दी गई. इस घटना ने बदीन जिले में भारी तनाव पैदा कर दिया है. स्थानीय हिंदू समुदाय में गहरा रोष और भय व्याप्त है. लोगों का कहना है कि वे पहले से ही असुरक्षा के माहौल में जी रहे थे और यह हत्या उसी डर की सबसे भयावह पुष्टि है. इस घटना के बाद जनता सड़को पर नजर आ रही है, लोगों न्याय के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. 

पाकिस्तानी मीडिया आउटलेट द नेशन की रिपोर्ट के मुताबिक, कैलाश कोल्ही नामक हिंदू किसान की कथित तौर पर एक प्रभावशाली जमींदार सरफराज निजामानी ने गोली मारकर हत्या कर दी. बताया गया है कि यह विवाद जमींदार की जमीन पर एक झोपड़ी बनाने को लेकर हुआ था, जिसके बाद यह हिंसक वारदात सामने आई. न्यूज 18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह वारदात 4 जनवरी 2026 को बदीन जिले के तालुका तल्हार स्थित गोथ दाहो, पीरू लशारी क्षेत्र के राही कोल्ही गांव में हुई. आरोप है कि हमलावर दिन के उजाले में कैलाश कोहली के पास पहुंचे और बेहद नजदीक से उनकी छाती में दो गोलियां मार दीं. घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई.

कैलाश कोहली इलाके में एक सक्रिय सामाजिक चेहरा थे. वे स्थानीय समस्याओं को उठाने और हिंदू अल्पसंख्यकों के अधिकारों की बात करने के लिए जाने जाते थे. सिंध के ग्रामीण इलाकों में हिंदू पहले ही सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक रूप से हाशिए पर हैं. इस हत्या के बाद बदीन के कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए. आक्रोशित ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने मुख्य सड़कों को जाम कर धरना दे दिया. गुस्साए लोगों ने बदीन-हैदराबाद नेशनल हाईवे और बदीन-थार कोल रोड पर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया. सैकड़ों वाहन घंटों तक सड़कों पर फंसे रहे. प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक दोषियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता, तब तक वे आंदोलन खत्म नहीं करेंगे.

पुलिस के आश्वासन के बावजूद गिरफ्तारी नहीं

इससे पहले पीड़ित परिवार और स्थानीय समुदाय के लोगों ने कैलाश का शव पीरू लशारी स्टॉप पर रखकर विरोध प्रदर्शन किया था. उस दौरान एसएसपी बदीन ने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया था कि 24 घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा. यह घटना चार दिन पहले पीरू लशारी शहर क्षेत्र के राही कोल्ही गांव में हुई थी. हालांकि जिला पुलिस अधिकारियों के आश्वासन के बावजूद मुख्य आरोपी की अब तक गिरफ्तारी नहीं हो सकी है, जिससे लोगों में आक्रोश और बढ़ गया है.

सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर गुस्सा फूट पड़ा. #JusticeForKailashKolhi जैसे हैशटैग के जरिए लोग न्याय की मांग कर रहे हैं और प्रांतीय सरकार से तत्काल कार्रवाई की अपील कर रहे हैं. अल्पसंख्यक अधिकार कार्यकर्ता शिवा कच्छी द्वारा साझा किए गए बयान के अनुसार, यह विरोध प्रदर्शन बिना किसी रुकावट के जारी है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि कैलाश कोल्ही के हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर हो रहा यह धरना “इतिहास रच रहा है”.

पाकिस्तान दरावर इत्तेहाद के अध्यक्ष और माइनॉरिटी राइट्स ऑर्गनाइजेशन के प्रमुख शिवा कच्छी ने इस हत्या को “निर्मम और सुनियोजित अपराध” बताया. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि कैलाश कोहली की हत्या केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे समुदाय के खिलाफ हिंसा है और उनका खून न्याय की पुकार कर रहा है. उनके अनुसार, विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है. बुधवार सुबह 10 बजे शुरू हुआ धरना पूरी रात चला और अगले दिन भी खत्म नहीं हुआ. प्रदर्शन में पुरुषों के साथ महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल हुए.

स्थानीय हिंदू समुदाय का कहना है कि वे वर्षों से जबरन धर्मांतरण, अपहरण और हिंसक धमकियों जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं. कैलाश कोहली की हत्या ने उनके भीतर बैठा डर और गहरा कर दिया है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका संघर्ष सिर्फ एक हत्या के खिलाफ नहीं, बल्कि उस व्यवस्था के खिलाफ है जिसमें ताकतवरों को संरक्षण मिलता है और कमजोर, गरीब व अल्पसंख्यक समुदायों को न्याय के लिए सड़कों पर उतरना पड़ता है.

वहीं, सिंध सरकार के प्रवक्ता और सिंध ह्यूमन राइट्स कमीशन के सदस्य सुखदेव हेमनानी ने कहा कि कैलाश कोहली की निर्मम हत्या समाज की अंतरात्मा पर गहरा घाव है. सिंध सरकार उनके परिवार के लगातार संपर्क में है और पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि दोषी को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए. इस मामले को सिंध मानवाधिकार आयोग (SHRC) के माध्यम से भी उठाया गया है और 13 जनवरी तक पुलिस कार्रवाई पर रिपोर्ट तलब की गई है. सिंध सरकार पीड़ितों के साथ खड़ी है और न्याय सुनिश्चित किया जाएगा. हालांकि, मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर पाकिस्तान में नोटिस तो जारी होते हैं, लेकिन दोषियों को सजा मिलने के मामले बेहद कम हैं. इससे दंडहीनता का माहौल बनता है, जो ऐसे अपराधों को और बढ़ावा देता है.

बांग्लादेश से लेकर पाकिस्तान तक सामने आ रही घटनाएं यह दिखाती हैं कि दक्षिण एशिया में भारत के बाहर, हिंदू अल्पसंख्यक लगातार हिंसा, भेदभाव और असुरक्षा का सामना कर रहे हैं. कैलाश कोहली की हत्या ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या क्षेत्र के देश अपने सबसे कमजोर नागरिकों की सुरक्षा करने में पूरी तरह विफल हो चुके हैं.

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