अमेरिका के एक पूर्व फाइटर पायलट को चीन की सेना को सीक्रेट ट्रेनिंग देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. 65 साल के जेराल्ड एडी ब्राउन जूनियर पर आरोप है कि उन्होंने अमेरिका के सबसे एडवांस स्टील्थ एयरक्राफ्ट F-35 लाइटनिंग II की बारीकियां चीनी पायलटों को सिखाईं. अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) के अनुसार, ब्राउन ने बिना किसी आधिकारिक अनुमति के चीन को ‘डिफेंस सर्विस’ दी, जिसे देश के साथ गद्दारी माना जा रहा है.
कौन है जेराल्ड ब्राउन और क्या है पूरा मामला?
जेराल्ड ब्राउन अमेरिकी एयरफोर्स में 24 साल तक सेवा दे चुके हैं और मेजर के पद से रिटायर हुए थे. वे एक ‘एलिट फाइटर पायलट’ माने जाते हैं. उनके पास F-4 फैंटम, F-15 ईगल, F-16 फाइटिंग फाल्कन और A-10 थंडरबोल्ट जैसे घातक विमान उड़ाने का अनुभव है. रिटायरमेंट के बाद वे अमेरिकी डिफेंस कॉन्ट्रैक्टर्स के लिए F-35 के सिम्युलेटर इंस्ट्रक्टर के तौर पर काम कर रहे थे.
चीन के साथ कैसे हुई सीक्रेट डील?
जांच में सामने आया है कि ब्राउन ने स्टीफन सू बिन नाम के एक चीनी नागरिक के जरिए यह डील की थी. सू बिन वही शख्स है जिसे 2016 में अमेरिकी डिफेंस डेटा हैक करने के जुर्म में सजा हुई थी. अभियोक्ताओं (Prosecutors) के अनुसार, अगस्त 2023 से ही ब्राउन चीन की एयरफोर्स (PLAAF) को ट्रेनिंग देने की प्लानिंग कर रहे थे. उन्होंने अपने बायोडाटा में भी साफ लिखा था कि उनका मकसद ‘इंस्ट्रक्टर फाइटर पायलट’ बनना है.
दिसंबर 2023 से फरवरी 2026 तक चीन में थे ब्राउन
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्राउन दिसंबर 2023 में चीन गए और फरवरी 2026 की शुरुआत तक वहीं रहे. वहां उन्होंने पहले ही दिन अमेरिकी एयरफोर्स के बारे में 3 घंटे तक सवालों के जवाब दिए और दूसरे दिन एक पर्सनल ब्रीफिंग दी. FBI के काउंटर इंटेलिजेंस डिवीजन के असिस्टेंट डायरेक्टर रोमन रोझाव्स्की ने कहा कि ब्राउन ने उन लोगों को ट्रेनिंग दी, जिनसे सुरक्षा की उन्होंने कसम खाई थी.
इन धाराओं में दर्ज हुआ केस
ब्राउन को इंडियाना के जेफरसनविले से गिरफ्तार किया गया है. उन पर ‘आर्म्स एक्सपोर्ट कंट्रोल एक्ट’ (AECA) के उल्लंघन का आरोप है. नियमों के मुताबिक, किसी भी विदेशी सेना को ट्रेनिंग देने के लिए स्टेट डिपार्टमेंट से लाइसेंस लेना जरूरी है, जो ब्राउन के पास नहीं था. 26 फरवरी, गुरुवार को उन्हें मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया जाएगा.
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चीन की बढ़ती ‘हंटिंग’ से दुनिया अलर्ट
यह मामला सामने आने के बाद पश्चिमी देशों में हड़कंप मच गया है. FBI डायरेक्टर काश पटेल ने इसे एक बड़ी कामयाबी बताया है. दरअसल, चीन पिछले कुछ सालों से पश्चिमी देशों के पूर्व सैनिकों को लालच देकर अपनी सेना को आधुनिक बनाने की कोशिश कर रहा है. इससे पहले 2017 में डैनियल एडमंड डगन नाम के एक अमेरिकी मरीन पायलट पर भी ऐसे ही आरोप लगे थे, जो अभी ऑस्ट्रेलिया में प्रत्यर्पण (एक्सट्राडिशन) का सामना कर रहे हैं.
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