US Oil Sanctions: डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने उन देशों को कड़ी चेतावनी दी है जो ईरान से तेल खरीदना जारी रखेंगे. स्कॉट बेसेंट के मुताबिक, अगर किसी भी देश के बैंक में ईरान का पैसा जमा है, तो अमेरिका उन पर ‘सेकेंडरी सैंक्शंस’ यानी कड़े प्रतिबंध लगाने के लिए तैयार है. अमेरिका अब ईरान को सैन्य ताकत के बजाय आर्थिक रूप से पूरी तरह निचोड़ने की रणनीति अपना रहा है. रॉयटर्स की रिपोर्ट में एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि ट्रेजरी विभाग अब ईरान पर ‘इकोनॉमिक फ्युरी’ (आर्थिक कहर) के साथ काम कर रहा है, जो उनके सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन एपिक फ्युरी’ का ही हिस्सा है.
भारत पर क्या होगा असर?
दुनिया के सबसे बड़े तेल खरीदारों में से एक भारत के लिए यह खबर बाजार में दबाव बढ़ा सकती है. हालांकि भारत सरकार का मानना है कि उसके पास तेल का पर्याप्त स्टॉक है और सप्लाई के लिए कई विकल्प मौजूद हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले हफ्ते ही 7 साल बाद ईरान से करीब 40 लाख बैरल तेल भारत पहुंचा था, जो अस्थायी छूट की वजह से मुमकिन हो पाया था. लेकिन अब यह छूट खत्म होने से ईरान से तेल मंगाना फिर से मुश्किल हो जाएगा. फिलहाल भारत रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीद रहा है.
अल जजीरा की रिपोर्ट: कई कंपनियों पर नए प्रतिबंध
अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के ‘ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल’ (OFAC) ने ईरान के तेल तस्करी नेटवर्क पर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं. इसमें करीब दो दर्जन लोग, कंपनियां और जहाज शामिल हैं. ट्रेजरी विभाग ने बताया कि यह नेटवर्क मोहम्मद हुसैन शमखानी से जुड़ा है, जो ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के सलाहकार के बेटे हैं. अमेरिका का मकसद ईरान के इस अवैध नेटवर्क को पूरी तरह तबाह करना है ताकि वह अपने समर्थित गुटों की मदद न कर सके.
ओमान में बातचीत और तेल की कीमतें
इस बीच रॉयटर्स ने बताया है कि अमेरिका और ईरान के बीच ओमान में दूसरे दौर की शांति वार्ता होने वाली है. रिपोर्ट के अनुसार, अगर समझौता होता है तो ईरान ओमान की तरफ से जहाजों को गुजरने की अनुमति दे सकता है. इसी उम्मीद में गुरुवार को तेल की कीमतों में थोड़ी गिरावट देखी गई. व्हाइट हाउस ने संकेत दिए हैं कि वे ईरान के साथ विवाद खत्म करने के पक्ष में हैं, लेकिन अगर ईरान नहीं माना तो आर्थिक दबाव और ज्यादा बढ़ाया जाएगा.
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कब खत्म हो रही है डेडलाइन?
ट्रेजरी विभाग ने स्पष्ट किया है कि ईरान के तेल के लिए जो राहत दी गई थी, उसकी समय सीमा कुछ ही दिनों में खत्म हो जाएगी. 21 मार्च को दी गई इस राहत के तहत 20 मार्च तक जहाजों पर लदे तेल की बिक्री और डिलीवरी के लिए 19 अप्रैल 2026 तक का समय दिया गया था. लेकिन अब ट्रंप प्रशासन अपनी पुरानी ‘मैक्सिमम प्रेशर’ वाली नीति पर लौट आया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल बढ़ना तय है.
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