क्या टीम इंडिया, टीम हिंदुत्व है? सोशल मीडिया पर भिड़े आकाश चोपड़ा और बिहार के सीनियर पत्रकार रिफत जावेद

Aakash Chopra vs Rifat Jawaid : सैयद मुश्ताक अली, मंसूर अली खान पटौदी, मोहम्मद अजहरुद्दीन, जहीर खान, इरफान पठान ये कुछ ऐसे नाम हैं, जिनपर भारतीय क्रिकेट टीम को गर्व रहा है. अब उसी टीम पर सीनियर पत्रकार रहे रिफत जावेद यह आरोप लगा रहे हैं कि यह टीम इंडिया नहीं टीम हिंदुत्व है. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि कि आखिर उनके मन में या किसी के भी मन में यह सवाल आया, तो क्यों आया या यह महज प्रोपेगेंडा है.

Aakash Chopra vs Rifat Jawaid : जनता का रिपोर्टर वेबसाइट चलाने वाले सीनियर पत्रकार रिफत जावेद और पूर्व क्रिकेटर आकाश चोपड़ा के बीच सोशल मीडिया एक्स (ट्विटर) पर तीखी बहस चल रही है. आरोप प्रत्यारोप का दौर इस कदर जारी है कि आकाश चोपड़ा के क्रिकेटर करियर और रिफत जावेद की पत्रकारिता की जिम्मेदारियों पर भी सवाल खड़े हो गए हैं. आइए समझते हैं कि आखिर अपने–अपने क्षेत्र के इन दो दिग्गजों में किस बात को लेकर शब्दों के बाण चल रहे हैं.

आकाश चोपड़ा और रिफत जावेद के बीच बहसबाजी क्यों शुरू हुई?

आकाश चोपड़ा और रिफत जावेद के बीच बहस की शुरुआत टी20 वर्ल्ड कप के एक मैच के बाद शुरू हुई. दरअसल 22 फरवरी को भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच सुपर 8 का मुकाबला हुआ, जिसमें भारत की टीम दक्षिण अफ्रीका के सामने पस्त हो गई. इस मैच के बाद रिफत जावेद ने एक सोशल मीडिया पोस्ट एक्स पर लिखा, जिसमें उन्होंने टीम इंडिया को टीम हिंदुत्व बताते हुए लिखा –साउथ अफ्रीका ने टीम हिंदुत्व को बेइज्जत किया. कट्टर @GautamGambhir और @imAagarkar को लगता है कि कम्युनल एजेंडा उन्हें वर्ल्ड कप जिता सकता है. सपने देखते रहो!!


रिफत जावेद के इस पोस्ट के बाद आकाश चोपड़ा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और लिखा कि क्या एक सीनियर पत्रकार जो टीवी टुडे का पूर्व मैनेजिंग एडिटर रहा हो, जो 12 साल तक बीबीसी का एडिटर रहा हो उस इंसान की सोच इतनी बुरी हो सकती है. आकाश चोपड़ा ने लिखा कि इंडियन क्रिकेट इस बात का एक शानदार उदाहरण है कि मेरिटोक्रेसी (क्षमता और योग्यता के अनुसार पद दिया जाना) को कैसे सेलिब्रेट किया जाता है. आकाश चोपड़ा ने रिफत जावेद से यह सवाल पूछा कि 15 तारीख को टीम इस्लाम इंडिया से हार गई थी? आकाश चोपड़ा ने अपने पोस्ट में पाकिस्तान का जिक्र करते हुए यह भी लिखा कि दानिश कनेरिया ने अपने अनुभव से बताया था कि वहां क्या होता है. हमारे पड़ोसियों के बारे में आपकी क्या राय है? आकाश ने यह भी पूछा है कि क्या यह रिफत जावेद का फेक एकाउंट है?

सिराज और शमी को टीम में शामिल ना करने से नाराज हैं रिफत जावेद

आकाश चोपड़ा ने जब भारतीय टीम को हिंदुत्व टीम बताए जाने का विरोध किया और पाकिस्तान की उस पोस्ट में चर्चा की तो रिफत जावेद भड़क गए और उन्होंने आकाश को टैग करके लिखा कि आपने पाकिस्तान को इसमें घसीटकर अपनी संघी सोच दिखाई. आपने मेरी बात को साबित कर दिया कि यह टीम हिंदुत्व है. सिराज ने पहले मैच में 3 विकेट लिया, लेकिन उसे अगले 4 मैचों के लिए बाहर कर दिया जाता है. इंडिया सरफराज और शमी को भी दरकिनार कर रही है, जबकि उनका प्रदर्शन हमेशा अच्छा रहा है. शमी को बाहर करने के बारे में पूछे जाने पर अगरकर मुस्कुरा रहे हैं. क्या यह टीम हिंदुत्व नहीं है?

रिफत के इस जवाब के बाद आकाश नहीं रूके और उन्होंने लिखा कि साॅरी मेरा पाकिस्तान का नाम लेना आपको अच्छा नहीं लगा. माफ कीजिएगा मैंने आपकी भावनाओं को ठेस पहुंचाई. साउथ अफ्रीका से हारने के बाद जिस टीम को आपने टीम हिंदुत्व का तमगा दिया उस टीम ने 2024 के टी20 वर्ल्ड कप के पहले गेम के बाद से ICC व्हाइट-बॉल टूर्नामेंट में हर एक मैच जीता था. एक हार से आपने टीम पर धर्म के आधार पर भेदभाव का आरोप लगाकर अपनी सोच को दिखाया है.

आकाश और रिफत जावेद के बहस पर भिड़े समर्थक

आकाश चोपड़ा और रिफत जावेद के बीच जो बहस हुई उसके बाद पोस्ट पर कई तरह के कमेंट आने लगे, जिनमें से कई बहुत ही विवादित हैं. धार्मिक कमेंट भी आने लगे और आकाश चोपड़ा पर धर्म के आधार पर भेदभाव करने का आरोप लगा, तो कइयों ने यह भी कहा कि भारतीय टीम में हमेशा ही मुसलमान रहे हैं, यह रिफत जावेद की कट्टर सोच है.

भारतीय क्रिकेट टीम के मुसलमान खिलाड़ी जिन्होंने अहम योगदान दिया

भारतीय क्रिकेट टीम में चयनकर्ताओं ने कभी धर्म के आधार पर भेदभाव किया हो, इसके प्रमाण कभी मिले नहीं. स्वतंत्रता से पहले से ही टीम क्रिकेट खेलती रही है और उस वक्त भी टीम में मुस्लिम खिलाड़ी थे. मोहम्मद निसार टीम इंडिया के पहले फास्ट बाॅलर में गिने जाते हैं. सैयद मुश्ताक अली भारतीय क्रिकेट टीम के ओपनर बैट्‌समैन थे, जिन्होंने विदेश में पहला शतक जड़ा था. मोहम्मद निसार और सैयद मुश्ताक अली के नाम पर देश में क्रिकेट टूर्नामेंट भी खेला जाता है. मंसूर अली खान पटौदी, भारतीय टेस्ट टीम के सबसे युवा कप्तान थे. इनके अलावा भी कई नाम है जिनमें मोहम्मद अजहरुद्दीन, ये भी टीम के कप्तान रहे. जहीर खान, इरफान पठान, युनूस पठान, मोहम्मद सिराज, मोहम्मद शमी जैसे नाम से तो सभी वाकिफ हैं.

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कौन है रिफत जावेद?

रिफत जावेद सीनियर पत्रकार हैं और उन्होंने बीबीसी और टीवी टुडे के लिए भी काम किया है. रिफत जावेद बिहार के मुजफ्फरपुर के रहने वाले हैं और उन्होंने 12 सालों तक बीबीसी के लिए संपादक के तौर पर काम किया है. वे टीवी टुडे में मैनेजिंग एडिटर भी रहे हैं और जनता का रिपोर्टर नाम का वेबसाइट चलाते हैं. रिफत जावेद के बारे में यह कहा जाता है कि वे इस्लामिक मामलों को लेकर काफी मुखर रहते हैं और इस वजह से वे कई बार विवादों में भी रहे हैं.

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लेखक के बारे में

Published by: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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