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रचनात्मकता के साथ यदि तकनीक में है रूझान तो फुटवियर डिजाइनिंग में बनाएं अपना करियर

Updated at : 03 Dec 2019 9:48 AM (IST)
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रचनात्मकता के साथ यदि तकनीक में है रूझान तो फुटवियर डिजाइनिंग में बनाएं अपना करियर

नयी दिल्ली: पैरों में जूता या चप्पल पहनना अब केवल जरूरत नहीं रह गया है बल्कि फैशन ट्रेंड भी बन गया है. अब बाजार में अलग-अलग मौकों के लिए कई सारे कैजुएल और फॉर्मल शूज उपलब्ध हैं. अब स्टाइलिश और कंफर्टेबल फुटवियर हर किसी की जरूरत है. इसके लिए कई बड़ी कंपनियां बाजार में मौजूद […]

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नयी दिल्ली: पैरों में जूता या चप्पल पहनना अब केवल जरूरत नहीं रह गया है बल्कि फैशन ट्रेंड भी बन गया है. अब बाजार में अलग-अलग मौकों के लिए कई सारे कैजुएल और फॉर्मल शूज उपलब्ध हैं. अब स्टाइलिश और कंफर्टेबल फुटवियर हर किसी की जरूरत है. इसके लिए कई बड़ी कंपनियां बाजार में मौजूद हैं, जो फुटवियर टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल को आगे बढ़ने का मौका देती हैं.

प्रतिस्पर्धा के इस दौर में अपने प्रोडक्ट की लोकप्रियता को बनाये रखने के लिए फुटवियर कंपनियां नयी तकनीक और मशीनरी को अपना रही हैं. दरअसल, ग्राहक अब फुटवियर चुनते समय डिजाइन के साथ उसकी गुणवत्ता को भी तरजीह देते हैं. खिलाड़ी हों, सेलिब्रिटी या स्कूल जाने वाले बच्चे हों या आम लोग, सबको अपने अनुकूल फुटवियर चाहिए. इसके लिए कंपनियाें को फुटवियर टेक्नोलॉजी एवं डिजाइनिंग के पेशेवरों की जरूरत होती है. फुटवियर निर्माण के क्षेत्र में कई बड़ी कंपनियां मौजूद हैं, जो फुटवियर टेक्नोलॉजी का कोर्स करने वालों को जाॅब के बेहतरीन माैके देती हैं.

जानिए फुटवियर डिजाइनिंग की जरूरतें

फुटवियर टेक्नोलॉजी जूतों के निर्माण की तकनीक, पुनर्निर्माण और डिजाइनिंग आदि से संबंधित कार्यक्षेत्र है. आज बाजार में डिजाइनर, स्पोर्ट्स, डेली वियर समेत तमाम तरह के जूते मिलते हैं. इन्हें बनाने में अलग-अलग टेक्नोलॉजी एवं सुरक्षा मानकों का इस्तेमाल किया जाता है. फुटवियर टेक्नोलॉजी के पेशेवर लोगों की जरूरत को ध्यान में रखकर मैन्युअल या सॉफ्टवेयर पर जूतों का पैटर्न और स्केच डिजाइन करते हैं.

साथ ही यह तय करते हैं कि उस फुटवियर को बनाने में लेदर, जूट और धातु जैसी कई सामग्रियों का किस तरह उपयोग किया जायेगा. इसके बाद प्रोड्क्शन का काम शुरू होता है, फिर क्वॉलिटी चेकिंग होती है. इस तरह हर स्तर के लिए एक ट्रेंड और स्किल्ड प्रोफेशनल से काम लिया जाता है.

रचनात्मकता के साथ तकनीक भी जरूरी

आपका अगर तकनीक में रुझान है साथ ही आप थोड़े रचनात्मक भी हैं, तो फुटवियर टेक्नोलाॅजी या डिजाइनिंग में करियर बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं. देश के कई इंस्टीट्यूट फुटवियर टेक्नोलॉजी एवं डिजाइनिंग में डिप्लोमा, पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा, ग्रेजुएशन एवं पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स संचालित करते हैं. आप बारहवीं या ग्रेजुएशन के बाद फुटवियर टेक्नोलाॅजी में कोर्स कर सकते हैं.

फुटवियर डिजाइनिंग में संस्थान-कोर्स

  • सेंट्रल लेदर रिसर्च इंस्टीट्यूट, चेन्नई- कैड कोर्स फॉर फुटवियर डिजाइन.
  • सेंट्रल फुटवियर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, आगरा एवं चेन्नई- डिप्लोमा एंड पोस्ट डिप्लाेमा इन फुटवियर टेक्नोलॉजी.
  • नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी, दिल्ली- बैचलर इन फुटवियर डिजाइन.
  • हरकोर्ट बटलर टेक्नोलॉजिकल इंस्टीट्यूट, कानपुर- लेदर टेक्नोलॉजी में बीटेक.

फुटवियर डिजाइनिंग में है बेहतरीन करियर

फुटवियर इंडस्ट्री में डिजाइनिंग, टेक्निकल एवं मैनेजमेंट के क्षेत्र में रोजगार की बेहतरीन संभावनाएं हैं. इस इंडस्ट्री में फुटवियर टेक्नोलॉजिस्ट, फुटवियर डिजाइनर, प्रोडक्ट डेवलपर, प्रोडक्ट डेवलपमेंट मैनेजर, क्वालिटी कंट्रोलर आदि के तौर पर करियर बनाने के मौके मौजूद हैं. कोर्स के बाद आप किसी भी फुटवियर कंपनी में बतौर इंटर्न शुरुआत कर सकते हैं. अनुभव के बाद आपको आगे बढ़ने के अच्छे मौके मिलेंगे. पेशेवरों को ग्लोबल ब्रांड हाउस एवं अंतरराष्ट्रीय शूज कंपनियां भी जॉब के बेहतरीन अवसर देती हैं.

फुटवियर टेक्नोलॉजी में करें पीजी डिप्लोमा

  1. संस्थान- एमएसएमई-टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट सेंटर, सेंट्रल फुटवियर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (सीएफटीआई), आगरा.

कोर्स- फुटवियर टेक्नोलॉजी में पीजी डिप्लोमा. कोर्स की अवधि 18 माह है और सीटों की संख्या 30 है. कोर्स की फीस सामान्य/ अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए 1,48,000 रुपये एवं अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति के लिए 23,000 हजार रुपये है.

योग्यता-किसी भी विषय में डिग्री आवश्यक है. (साइंस ग्रेजुएट को वरीयता दी जायेगी). अभ्यर्थी की आयु 20 वर्ष या उससे अधिक होना चाहिए. फर्स्ट कम फर्स्ट एडमिट बेसिस पर स्क्रीनिंग टेस्ट के जरिये प्रवेश दिया जायेगा.

आवेदन- निर्धारित प्रारूप में अपना एप्लीकेशन डायरेक्टर, सीएफटीआई, आगरा को भेजें. अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट में उपलब्ध नोटिफिकेशन देखें. आवेदन करने की अंतिम तिथि 10 दिसंबर है.

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