इक्टोपिक प्रेग्‍न्‍ोंसी हो सकती है जानलेवा

Updated at : 02 Jul 2014 12:04 PM (IST)
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इक्टोपिक प्रेग्‍न्‍ोंसी हो सकती है जानलेवा

इक्टोपिक प्रेग्नेंसी ऐसी गर्भावस्था है, जो यूटेराइन कैविटी से बाहर होती है. जब स्त्री के अंडाशय से अंडे निकलते हैं, तो उसे फैलोपियन ट्यूब द्वारा उठा लिया जाता है. फिर फैलोपियन ट्यूब में ही इन्हें पुरुष वीर्य द्वारा गभार्धान किया जाता है. जब प्रेग्नेंसी 8 सेल के आकार की हो जाती है तब वह गर्भाशय […]

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इक्टोपिक प्रेग्नेंसी ऐसी गर्भावस्था है, जो यूटेराइन कैविटी से बाहर होती है. जब स्त्री के अंडाशय से अंडे निकलते हैं, तो उसे फैलोपियन ट्यूब द्वारा उठा लिया जाता है. फिर फैलोपियन ट्यूब में ही इन्हें पुरुष वीर्य द्वारा गभार्धान किया जाता है.

जब प्रेग्नेंसी 8 सेल के आकार की हो जाती है तब वह गर्भाशय में आकर स्थापित हो जाती है और अगले 9 महीनों तक विकसित होती है. अगर गर्भाधान हुए अंडे गर्भाशय तक नहीं पहुंच पाते, तो वे ट्यूब में ही स्थापित हो जाते हैं. इसे ही ट्यूबल इक्टोपिक प्रेग्नेंसी कहते हैं. आम तौर पर यह फैलोपियन ट्यूब में ही होती है. काफी कम ऐसा होता है जब यह अंडाशय या पेट के अन्य अंग में स्थापित होती है.

इससे क्या है परेशानी
ट्यूब गर्भाशय की तरह फूल नहीं सकता है, इसलिए प्रेग्नेंसी के दबाव से यह जल्दी ही फट जाता है. इससे पेट में अत्यधिक रक्तस्नव होने लगता है, जो कभी-कभी जानलेवा भी बन सकता है.

क्या हैं लक्षण

इक्टोपिक प्रेग्नेंसी में दिखते हैं ये लक्षण:

योनि से हल्का रक्तस्नव, मितली और उल्टी होना

पेट के निचले हिस्से में दर्द या पेट में तेज ऐंठन होना

चक्कर आना या कमजोरी. कंधे, गले या मलाशय में दर्द. फैलोपियन ट्यूब के क्षतिग्रस्त होने पर दर्द और रक्तस्नव इतना हो सकता है जिससे बेहोशी जैसी स्थिति हो सकती है.

इलाज में क्या हैं उपाय

अस्पताल में जांच : 1. बीएचसीजी टेस्ट प्रेग्नेंसी की पुष्टि कर सकता है 2. यूटेराइन कैविटी में सोनोग्राफी से प्रेग्नेंसी जाहिर न होने पर और उसके बजाय गर्भाशय के बाहर प्रेग्नेंसी का पता चलने पर अगर डॉक्टर को संदेह है कि फैलोपियन ट्यूब क्षतिग्रस्त हुई है, तो आपातकालीन सर्जरी कराना अनिवार्य है ताकि रक्तस्नव रोका जा सके. कुछ मामलों में फैलोपियन ट्यूब के क्षतिग्रस्त होने पर उसे निकालना ही एकमात्र रास्ता बचता है. यह अब लेप्रोस्कोपी के जरिये आसानी से किया जा सकता है. अगर फैलोपियन ट्यूब ज्यादा क्षतिग्रस्त नहीं हुई है और प्रेग्नेंसी अधिक विकसित न हुई हो, तो लैपेरोस्कोपी सर्जरी से भ्रूण को हटा कर नुकसान का इलाज किया जा सकता है. कुछ मामलों में गर्भधारण कोशिका का विकास रोकने के लिए दवाओं का इस्तेमाल भी होता है.

क्या हैं कारण

गर्भाधान हुए अंडों का गर्भाशय तक नहीं पहुंचने के निम्न कारण हो सकते हैं –

योनि सूजन की बीमारी (पीआइडी) का होना

यौन संचारित रोग, जैसे क्लैमाइडिया और सूजाक

फैलोपियन ट्यूब में जन्मजात विषमता

पेल्विक सर्जरी की गयी हो (क्योंकि क्षतिग्रस्त होने के कारण गर्भाधान हुए अंडे फैलोपियन ट्यूब से बाहर नहीं निकल पाते)

पहले भी इक्टोपिक प्रेग्नेंसी की शिकायत हुई हो

गर्भधारण के लिए दवाओं का इस्तेमाल

इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आइवीएफ) जैसे इनफर्टिलिटी के उपचार से

कैसे करें बचाव

अगर ट्यूब में किसी भी प्रकार के संक्रमण की शंका रहे, तो एंटीबायोटिक्स देकर प्रेग्नेंसी प्लान करने से पहले ही संक्रमण का इलाज कराएं. ट्यूब की स्थिति जांचने के लिए गर्भाशय और ट्यूब का एक्स-रे होता है, जिसे एचएसजी (हाइस्ट्रो-सैलपिंगोग्राफी) कहते हैं.

यौन संचारित रोग ट्यूब के क्षतिग्रस्त होने के प्रमुख कारण होते हैं. असुरक्षित यौन संबंधों से भी रोगों का खतरा होता है. पुरुष पार्टनर को कंडोम का प्रयोग करने के लिए कहें, जिससे बचाव हो सके.

डॉ अरुण आप्टे

आइवीएफ कंसल्टेंट बोर्ड मेंबर ऑफ प्रोफर्ट आइवीएफ फर्टीलिटी क्लिनिक, मुंबई

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