इस तरह काम करता है नक्सली दिनेश गोप का खुफिया तंत्र, युवाओं को इस तरह बनाता था मुखबिर

पीएलएफआइ सुप्रीमो दिनेश गोप ने पुलिस की गतिविधियों की सूचना पाने के लिए युवाओं को खबरी यानी मुखबिर बना रखा था. खुफिया एजेंसी को मिली जानकारी के मुताबिक, दिनेश इन मुखबिरों को मोबाइल देता था.
पीएलएफआइ सुप्रीमो दिनेश गोप ने पुलिस की गतिविधियों की सूचना पाने के लिए युवाओं को खबरी यानी मुखबिर बना रखा था. खुफिया एजेंसी को मिली जानकारी के मुताबिक, दिनेश इन मुखबिरों को मोबाइल देता था. वह निवेश के माध्यम से दिल्ली से मोबाइल फोन थोक में मंगवाता था. फिर मुखबिरों तक सहयोगियों के जरिये मोबाइल भिजवाता था. मोबाइल में सिमकार्ड झारखंड का नहीं होता है, बल्कि पड़ोसी राज्यों छत्तीसगढ़, ओड़िशा, पश्चिम बंगाल आदि जगहों से फर्जी दस्तावेज के आधार पर लिया गया होता है.
दिनेश का नेटवर्क खूंटी के रनिया से लेकर चाईबासा के गुदरी इलाके तक फैला है. क्षेत्र के युवक-युवती पुलिस की हर गतिविधि पर नजर रखते हैं. जंगल में जैसे ही पुलिस की गाड़ियां आती हैं या चहलकदमी बढ़ती है, युवक-युवती फोन कर पीएलफआइ के सदस्यों को सूचना देते हैं.
एक सप्ताह पूर्व तक दिनेश गोप का लोकेशन गुदरी थाना क्षेत्रों के जंगल में बताया जाता था. खुफिया एजेंसी के अधिकारियों को यह भी जानकारी मिली है कि उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र में जो भी पुलिस पिकेट हैं, वहां किसी तरह की हलचल पर भी पीएलएफआइ के मुखबिर नजर रखते हैं.
यही वजह है कि करीब 20 वर्षों से उग्रवादी गतिविधियों में संलिप्त दिनेश गोप की सटीक सूचना के बाद भी पुलिस उसे पकड़ नहीं पाती और वह पुलिस की सूचना पाकर अपना स्थान बदल आज तक बचता रहा है. लेकिन संगठन के कई उग्रवादियों के मारे और पकड़े जाने के बाद दिनेश गोप की स्थिति पहलेवाली नहीं रही है. पूर्व में पीएलएफआइ का दुर्दांत उग्रवादी जीदन गुड़ियां पुलिस से मुठभेड़ में मारा गया था. उस वक्त भी पुलिस को मोबाइल के साथ कई सिम मिले थे. उक्त सिम छत्तीसगढ़ से जारी हुए थे.
पुलिस को निवेश के एक और संपत्ति के बारे में जानकारी मिली है. महुआटोली रिंग रोड साइड में इसने करीब एक एकड़ जमीन अपने रिश्तेदारों के नाम पर ले रखी है. अब पुलिस इसका सत्यापन करेगी. इससे पूर्व भी निवेश की जमीन और अन्य संपत्तियों के बारे में खुलासा हो चुका है.
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