सिलीगुड़ी जंक्शन : सूरत तो बदली, पर सीरत नहीं

Updated at : 25 Nov 2019 2:21 AM (IST)
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सिलीगुड़ी जंक्शन : सूरत तो बदली, पर सीरत नहीं

सौंदर्यीकरण के नाम पर रेलवे ने तोड़ दिया स्नानागार सिलीगुड़ी : सिलीगुड़ी रेलवे स्टेशन का सौंदर्यीकरण कर सुंदरता का अमलीजामा तो पहना दिया गया, लेकिन मूलभूत सुविधाओं से यह स्टेशन अभी तक वंचित है. सौंदर्यीकरण के नाम पर रेल प्रबंधन ने शौचालय के स्नानागार को भी तोड़ दिया, जिससे यात्री बाहर खुले में स्नान करने […]

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सौंदर्यीकरण के नाम पर रेलवे ने तोड़ दिया स्नानागार

सिलीगुड़ी : सिलीगुड़ी रेलवे स्टेशन का सौंदर्यीकरण कर सुंदरता का अमलीजामा तो पहना दिया गया, लेकिन मूलभूत सुविधाओं से यह स्टेशन अभी तक वंचित है. सौंदर्यीकरण के नाम पर रेल प्रबंधन ने शौचालय के स्नानागार को भी तोड़ दिया, जिससे यात्री बाहर खुले में स्नान करने को मजबूर हैं. हालांकि रेलवे के डोरमेट्री व रिटायरिंग रूम में स्नानागार की व्यवस्था है. जहां सभी यात्री नहीं जा पाते हैं. प्लेटफॉर्म नंबर चार पर तो अभी भी पूरी तरह से यात्रियों के बैठने का इंतजाम भी नहीं किया गया है.

यही नहीं, इस प्लेटफॉर्म पर पेयजल समेत अन्य बुनियादी सुविधाओं का भी घोर अभाव है. चार नंबर प्लेटफॉर्म से भी रोजाना गाड़ियां खुलती है. यात्रियों को शौच समेत अन्य कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है. हालांकि एडीआरएम सुमन राज ने कहा है कि स्टेशन परिसर में अभी निर्माण कार्य जारी है. सभी समस्याओं को 15 दिसंबर तक दूर कर लिया जायेगा.

स्टेशन परिसर के बाहर हैं शौचालय, लेकिन स्नानागार नहीं

पर्यटन के लिहाज से सिलीगुड़ी स्टेशन काफी महत्वपूर्ण है. इस रेलवे स्टेशन से डुआर्स समेत कई प्रमुख स्टेशनों की ओर गाड़ियां प्रतिदिन आती-जाती हैं. फिर भी यह स्टेशन एक अदद स्नानागार के लिए तरस रहा है.
रेल प्रबंधन ने सौंदर्यीकरण के नाम पर शौचालय के स्नानागार को तोड़ दिया. जिसके बाद से रेल यात्री बाहर खुले में स्नान करने को मजबूर हैं. पे एंड यूज शौचालय के ठेकेदार जीतेंद्र झा ने बताया कि शौचालय में स्नानागार नहीं रहने से यात्रियों को काफी परेशानी होती है. पुरूष यात्री तो किसी तरह से बाहर ड्राम में पानी लेकर स्नान कर लेते हैं, लेकिन महिलाओं का स्नान करना असंभव हो जाता है.
उन्होंने बताया कि शौचालय स्टेशन के बाहर है, जिसमें सामने से शेड भी नहीं लगा है. यात्रियों को स्टेशन के बाहर बरसात में भींगते हुए शौचालय के लिए आना पड़ता है. कई बार रेल के उच्चाधिकारियों से समस्या के समाधान की गुहार लगायी गयी, लेकिन अभी तक शेड व स्नानागार का निर्माण नहीं हो सका है.
पर्यटन के लिहाज से सिलीगुड़ी स्टेशन काफी महत्वपूर्ण है. इस रेलवे स्टेशन से डुआर्स समेत कई प्रमुख स्टेशनों की ओर गाड़ियां प्रतिदिन आती-जाती हैं. फिर भी यह स्टेशन एक अदद स्नानागार के लिए तरस रहा है. रेल प्रबंधन ने सौंदर्यीकरण के नाम पर शौचालय के स्नानागार को तोड़ दिया. जिसके बाद से रेल यात्री बाहर खुले में स्नान करने को मजबूर हैं. पे एंड यूज शौचालय के ठेकेदार जीतेंद्र झा ने बताया कि शौचालय में स्नानागार नहीं रहने से यात्रियों को काफी परेशानी होती है.
पुरूष यात्री तो किसी तरह से बाहर ड्राम में पानी लेकर स्नान कर लेते हैं, लेकिन महिलाओं का स्नान करना असंभव हो जाता है. उन्होंने बताया कि शौचालय स्टेशन के बाहर है, जिसमें सामने से शेड भी नहीं लगा है. यात्रियों को स्टेशन के बाहर बरसात में भींगते हुए शौचालय के लिए आना पड़ता है. कई बार रेल के उच्चाधिकारियों से समस्या के समाधान की गुहार लगायी गयी, लेकिन अभी तक शेड व स्नानागार का निर्माण नहीं हो सका है.
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