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SIR Bengal: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गयी है. केंद्रीय मंत्री किरेन रिजीजू ने शीर्ष अदालत के आदेश को ‘अत्यंत महत्वपूर्ण’ बताया. उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार को अब एसआईआर प्रक्रिया में पूरा सहयोग करना होगा. उन्होंने आगे आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस चुनाव से पहले मतदाता सूची में गड़बड़ी कर राजनीतिक फायदा उठाना चाहती है. उनके मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश ने राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी को ‘पूरी तरह बेनकाब’ कर दिया है.
लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी था फैसला
रिजीजू ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी था. उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस एसआईआर प्रक्रिया का विरोध इसलिए कर रही है, क्योंकि वह आगामी विधानसभा चुनाव में लाभ लेना चाहती है. भाजपा नेता ने दावा किया कि मतदाता सूची में अवैध घुसपैठियों के नाम जोड़ने की कोशिश की जा रही थी.
यह पश्चिम बंगाल और देश के लिए बहुत अच्छी खबर है. कोर्ट ने बहुत सख्त निर्देश दिये हैं. पश्चिम बंगाल सरकार, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और राज्य के सभी विभागों को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन करना होगा. तृणमूल कांग्रेस सरकार अब पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है.
किरेन रिजीजू, केंद्रीय मंत्री
एसआईआर में मदद करेंगे जज और पूर्व जिला जज
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार और निर्वाचन आयोग के बीच जारी गतिरोध पर नाराजगी जताते हुए एसआईआर प्रक्रिया में सहायता के लिए सेवारत और पूर्व जिला जजों की तैनाती का ‘असाधारण’ निर्देश दिया है. भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने राज्य में एसआईआर को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पूरा करने के लिए कई दिशा-निर्देश जारी किये.
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SIR Bengal: सुप्रीम कोर्ट के आदेश का करना होगा पालन
किरेन रिजीजू ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट का निर्देश लोकतंत्र के लिए बेहद आवश्यक था. अब पश्चिम बंगाल सरकार, डीजीपी और राज्य के सभी विभागों को अदालत के आदेश का पालन करना होगा.
सुप्रीम कोर्ट ने विश्वास की कमी पर जताया था अफसोस
सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार के बीच चल रहे आरोप-प्रत्यारोप तथा ‘विश्वास की कमी’ पर भी अफसोस जताया था. अदालत ने साफ किया कि एसआईआर प्रक्रिया पारदर्शी ढंग से पूरी होनी चाहिए. इसमें न्यायिक अधिकारियों की भूमिका अहम होगी.
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