लिव इन पार्टनर के प्राइवेट पार्ट को सेनेटाइजर से जलाना, मानसिक विकृति का उदाहरण; बच्चों को संभालिए वरना…

Gurugram Incident : गुरुग्राम में लिव इन पार्टनर ने जिस तरह अपनी साथी के प्राइवेट पार्ट में सेनेटाइजर डालकर आग लगा दी और इंदौर में एमबीए की छात्रा की हत्या हुई, यह दोनों घटनाएं हमारे समाज के विकृत होते चेहरे का उदाहरण हैं. स्थिति बहुत बिगड़ चुकी है और इसके लिए युवाओं के साथ पूरा समाज जिम्मेदार है. मां–बाप बच्चों पर ध्यान नहीं देते हैं और एकल परिवार में बच्चे अकेले पड़ जाते हैं, वे अपनी समस्याओं का समाधान इंटरनेट पर ढूंढ़ते हैं, वे साथी भी इंटरनेट पर तलाशते हैं, जो उन्हें गुमराह कर रहा है.

Gurugram Incident : गुरुग्राम से रविवार को जो घटना सामने आई है, वह स्त्री–पुरुष संबंधों के बदलते स्वरूप पर कई सवाल खड़े करती है और यह साबित करती है कि आधुनिक युग में स्त्री–पुरुष का संबंध प्रेम से बाहर निकलकर विकृत होता जा रहा है और इसमें हैवानियत ने अपने लिए जगह बना ली है.

 गुरुग्राम में जिस तरह एक 19 साल की युवती के साथ उसके लिव इन पार्टनर ने दरिंदगी की, वो रोंगटे खड़े करने वाला है. त्रिपुरा की रहने वाली उस युवती के प्राइवेट पार्ट में सेनेटाइजर डालकर उसके पार्टनर ने आग लगा दी और उसके सिर को पटक दिया. इस व्यवहार से लड़की शारीरिक और मानसिक रूप से टूट गई है और अस्पताल में बदहाली की स्थिति में एडमिट है. यह घटना समाज में स्त्री–पुरुष संबंधों की विकृति और खतरा दोनों के बारे में बताती है.

क्या बदल चुका है समाज?

एआई के युग में सामाजिक संबंध बहुत बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. डीपफेक को ब्लैकमेलिंग का जरिया बना दिया गया है. स्त्री–पुरुष संबंध पहले प्रेम पर आधारित होते थे, जहां विवाह शर्त ना भी हो, तब भी हैवानियत के लिए जगह नहीं थी. जिस स्त्री या पुरुष से प्रेम होता था, उसके लिए दरिंदगी की संभावना बहुत कम होती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है. मनोवैज्ञानिक अनुष्का सिंह बताती हैं कि आज के समय में रिश्तों में दादागिरी दिख रही है. हत्या और प्रताड़ना नजर आ रही है.  संबंध स्थायी नहीं टैंपरेरी होते हैं, इसलिए भरोसा, परिपक्वता और आपसी समझ से परे संबंध बनते हैं. यही कारण है सैडिस्टिक प्रवृत्ति (Sadistic Behaviour) पनप रही है. ऐसे लोग दूसरे को दुख देकर संतुष्ट होते हैं. उनके अंदर यह भावना घर कर जाती है कि उनके साथी पर उसके शरीर पर उनका मालिकाना हक है.

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डिजिटल युग के अपरिपक्व रिश्ते

डिजिटल युग में जो रिश्ते बनते हैं, वो महज आकर्षण के बल पर बन  हैं. वहां मेलजोल महज हार्मोनल चेंज की वजह से बनते हैं. मनोवैज्ञानिक डाॅ भूमिका सच्चर बताती हैं कि इंटरनेट के युग में रिश्ते क्षणिक आकर्षण पर बनते हैं. उनका आधार बहुत ही सतही होता है. वे एक दूसरे पर विश्वास नहीं करते, अगर उनका पार्टनर किसी से बात करता है, तो उन्हें ईर्ष्या होती है, वे अपने गुस्से पर काबू नहीं कर पाते हैं और कई बार अपराध कर बैठते हैं. इंदौर में एमबीए की छात्रा की जिस तरह हत्या हुई, उसे इसी तरह के गुस्से का परिणाम बताया जा सकता है.

युवाओं को कोई बेहतर संदेश नहीं दे पा रहा है समाज

 डाॅ भूमिका सच्चर कहती हैं कि हमारा समाज आज जितना बदल गया है उसमें युवाओं को कोई अच्छी सलाह या संदेश नहीं दिया जाता है. बच्चे मां–बाप से बात नहीं करते हैं. अपनी समस्याओं का हल इंटरनेट पर ढूंढ़ते हैं, जहां उन्हें सही–गलत का भेद नहीं बताया जाता है. उनका दिमाग मैच्योर नहीं होता है, जिसकी वजह से वे गलती कर बैठते हैं. आज की फिल्में, सीरियल्स सबकुछ यह बताते हैं कि बदला लेने का आपको हक है. बस इसी तरह भ्रमित होकर आज का युवा रिश्तों को और अपने जीवन को बर्बाद कर रहा है.

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लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

राजनीति,सामाजिक, इतिहास, खेल और महिला संबंधी विषयों पर गहन लेखन किया है. तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन में रुचि. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक. IM4Change, झारखंड सरकार तथा सेव द चिल्ड्रन के फेलो के रूप में कार्य किया है. पत्रकारिता के प्रति जुनून है. प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव.

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