ट्रेड एक्ट 122 और 301 का प्रयोग करके ट्रंप लगाएंगे टैरिफ, जानिए अमेरिका में क्या हैं ये विशेष कानून

Trump Tariffs : अमेरिका में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार द्वारा लिए गए फैसले को पहले भी रद्द किया है, लेकिन ट्रंप के टैरिफ को निरस्त करना बहुत बड़ा मामला बन गया है, क्योंकि इसका असर पूरे विश्व पर था. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप ने कहा है कि वे ट्रेड एक्ट 122 और 301 का प्रयोग करके टैरिफ लगाएंगे, आइए समझते हैं क्या हैं वे ट्रेड एक्ट, जिनके जरिए अपने इगो को बूस्ट करना चाहते हैं राष्ट्रपति ट्रंप.

Trump Tariffs : अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ को रद्द कर दिया है. कोर्ट का यह फैसला ट्रंप के लिए बहुत बड़ा झटका है, क्योंकि ट्रंप ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत ट्रेड टैरिफ लगाए गए थे और उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज किया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति के पास इस इमरजेंसी अधिकार के तहत इतने व्यापक टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है, यह काम सिर्फ वहां की कांग्रेस कर सकती है. सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद सवाल यह है कि ट्रंप ने जिन देशों पर तगड़े टैरिफ लगाए थे, क्या उनका पैसा वापस होगा? साथ ही यह भी बड़ा सवाल है कि अब ट्रंप का रुख कैसा होगा?

ट्रंप का रुख अब भी है अड़ियल, क्या करेंगे आगे?

सुप्रीम कोर्ट ने अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए व्यापक टैरिफ को तो रद्द कर दिया है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप अब भी अपने अड़ियल रुख पर कायम हैं. उन्होंने यह कहा कि वे अब अपने उन अधिकारों का प्रयोग करेंगे जिनका प्रयोग अबतक अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने बहुत कम ही किया है. न्यूयार्क टाइम्स में छपी खबर के अनुसार सुप्रीम कोर्ट  में मिली हार के बाद ट्रंप एक तरह से बौखला गए हैं और उन रास्तों को तलाश रहे हैं जिनके जरिए वे ट्रेड टैरिफ को दोबारा लगा सके. ट्रंप ने कोर्ट के फैसले को अपने इगो पर ले लिया है. उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वे  झुके नहीं हैं वे फेडरल कानूनों के जरिए टैरिफ को फिर वापस लेकर आएंगे. ट्रंप ने कहा कि वे सेक्शन 122 और 301 का प्रयोग करके टैरिफ को फिर से वापस लाएंगे.

क्या है सेक्शन 122 और 301 जिनके जरिए ट्रंप टैरिफ की वापसी कराएंगे?

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप ने कहा है कि वे ट्रेड एक्ट के सेक्शन 122, 301 और 232 का प्रयोग करके ट्रैरिफ को फिर से लेकर आएंगे. इन तीनों सेक्शन में 122 एक ऐसा सेक्शन है, जिसका अबतक किसी राष्ट्रपति ने प्रयोग नहीं किया है और यह सेक्शन ट्रंप को अविलंब 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने की इजाजत देता है. ये तीनों ट्रेड एक्ट अमेरिकी राष्ट्रपति को इमरजेंसी में या कहें कि विशेष परिस्थिति में टैरिफ लगाने की इजाजत देता है.  सेक्शन 232 के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति उन सामानों पर टैरिफ लगा सकता है जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हों. सेक्शन 301 के तहत इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी की चोरी या टेक्नोलॉजी ट्रांसफर जैसे ट्रेड पर टैरिफ लगाने की अनुमति देता है. सेक्शन 122 के तहत ट्रंप 10 प्रतिशत टैरिफ तो अविलंब लगा देंगे, जो 24 फरवरी से लागू भी हो जाएगा, लेकिन यह टैरिफ 150 दिनों तक चलेगा उससे आगे के लिए कांग्रेस की अनुमति लगेगी.

सेक्शन के बारे मेंसेक्शन 122सेक्शन 301
प्रकृतिअस्थायीदीर्घकालिक
लक्ष्यव्यापक, वैश्विक आर्थिक संतुलनदेश-विशेष या प्रैक्टिस-विशेष
अवधिअधिकतम 150 दिन (कांग्रेस की अनुमति से बढ़ सकती है अवधि)लंबी अवधि संभव
प्रक्रियाराष्ट्रपति सीधे लागू कर सकते हैंजांच और प्रक्रिया के बाद लागू
सेक्शन 122 और 301 में फर्क

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क्या तगड़े टैरिफ का पैसा वापस करेंगे ट्रंप?

अमेरिकी राष्ट्रपति ने जिन देशों पर तगड़े टैरिफ लगाए, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद वह टैरिफ तो रद्द हो गए, लेकिन अब सवाल यह है कि इतने दिनों तक जो टैरिफ वसूला गया क्या उसकी वापसी होगी? इस सवाल का जवाब यह है–यह बहुत मुश्किल होगा. असल में कोर्ट ने टैरिफ को तो स्पष्ट शब्दों में रद्द कर दिया है, लेकिन वसूले गए टैरिफ के बारे में कुछ भी स्पष्ट नहीं कहा है, ऐसे में यह कहना मुश्किल है कि वसूले गए टैरिफ को ट्रंप वापस करेंगे. अगर मामला कोर्ट तक पहुंचता है, तब भी इसमें काफी समय लगेगा और यह मुश्किल ही प्रतीत होता है कि ट्रंप, टैरिफ का पैसा वापस करेंगे.

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By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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