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Bengal Election: कोलकाता : पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की घोषणा कुछ ही दिनों में हो सकती है. सभी दल चुनावी मोड में आ चुके हैं. माकपा भी चुनाव को लेकर तैयारी शुरू कर चुकी है. सीपीएम के प्रदेश सचिव मोहम्मद सलीम ने कहा है कि माकपा बंगाल चुनाव को लेकर 1 मार्च से चुनाव प्रचार शुरू करेगी. सीपीएम के घोषणापत्र के बारे में उन्होंने कहा कि इस बार जिला और राज्य स्तर पर घोषणापत्र का निर्माण किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले राज्य सरकार ने लक्ष्मी भंडार में 500 रुपये की बढ़ोतरी की है. माकपा अगर सत्ता में आयेगी तो यह रकम और बढ़ायेंगे. उन्होंने यह भी बताया कि यह कैसे संभव होगा. महिला हिस्सेदारी पर उन्होंने कहा कि इस बार सीपीएम की ओर से पिछली बार की तुलना में अधिक महिला उम्मीदवार होंगी.
महिला वोट बैंक पर सबकी नजर
बंगाल में महिला वोट बैंक पर ममता बनर्जी का कब्जा माना जाता है. यहां नरेंद्र मोदी का भी महिलाओं पर उतना प्रभाव अब तक देखने को नहीं मिला है, जितना ममता बनर्जी का रहा है. ममता के इस वोट बैंक में सेंध लगाने का प्रयास भाजपा समेत सभी दल कर रहे हैं. ममता की घोषणा के बाद ही भाजपा ने भी भत्ते के रूप में और अधिक राशि देने का वादा किया है. यहां तक कि नई पार्टी बनाने वाले हुमायूं कबीर का भी कहना है कि सत्ता में आने पर वे महिलाओं को अधिक राशि देंगे. सीपीएम के प्रदेश सचिव मोहम्मद सलीम भी इस मामले में पीछे नहीं रहे. इस बहाने उन्होंने तृणमूल और भाजपा पर निशाना साधा।
लड़कियों की पढ़ाई पर सरकार का ध्यान नहीं
माकपा नेता मो सलीम रविवार को अखिल भारतीय लोकतांत्रिक महिला संघ की पश्चिम बंगाल राज्य समिति के कार्यक्रम में शामिल हुए. वहां उन्होंने वृंदा करात द्वारा लिखित पुस्तक ‘रीता होये ओथा’ का विमोचन किया. कार्यक्रम में उन्होंने कहा- लड़कियों को शिक्षा के लिए अभी भी संघर्ष करना है. स्कूल छोड़ने वाली छात्राओं की संख्या बढ़ रही है. इसका मतलब है कम उम्र में विवाह. कम उम्र में बच्चे. अंधविश्वासों को वापस लाने के प्रयास किए जा रहे हैं. लड़कियों की तस्करी बढ़ रही है. स्कूल छोड़ने वाली छात्राओं की संख्या कम करने के लिए स्कूलों और कॉलेजों में लड़कियों के लिए परिवहन निःशुल्क किया जा सकता है.
विकास से वंचित है समाज
सीपीएम के राज्य सचिव ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की विभिन्न परियोजनाओं की आलोचना की. उन्होंने कहा कि केरल ने कुटुंबश्री योजना 25 साल पहले शुरू की थी. उन्होंने ममता सरकार के सभी ‘श्री’ नामों को व्यंग्यपूर्वक निरर्थक बताया. फिर, राज्य सरकार के लक्ष्मी भंडार के बारे में उन्होंने कहा- महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित किया गया है. उन्हें उनकी मजदूरी से वंचित किया गया है. उन्हें काम से वंचित किया गया है. उन्हें विकास से वंचित किया गया है. शिक्षा, स्वास्थ्य, खाना पकाने और बेकिंग का खर्च बढ़ गया है. परिणामस्वरूप, आय कम हो गई है. खर्च बढ़ गए हैं. अब जब चुनाव नजदीक हैं, तो भाजपा या तृणमूल ये सब कर रही हैं.
सहायता को मिले अधिकार का दर्जा
योजनाओं को ध्यान भटकाने का तरीका कहते हुए माकपा नेता ने कहा- यह कोई अधिकार नहीं है. हम चाहते हैं कि इन्हें अधिकार के रूप में स्थापित किया जाए. तमिलनाडु 2000 रुपये दे रहा है. केरल दे रहा है. अन्य राज्य भी दे रहे हैं. यहां, ऐसा लगता है जैसे यह कोई बड़ा खजाना है. वामपंथी वास्तव में इससे कहीं अधिक दे सकते हैं. क्योंकि, हम भ्रष्टाचार को रोक सकते हैं. हमने एक सर्वेक्षण किया, जिसमें पता चला कि कितनी महिलाओं को यह सुविधा नहीं मिली. उन्होंने कहा- हमारे जुलूस में आइए, लेकिन हम आपको भत्ता देंगे. हम उनमें हकदारी की भावना पैदा करना चाहते हैं.
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