I-PAC पर रेड से बढ़ा टकराव, मुख्यमंत्री, डीजीपी और पुलिस कमिश्नर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 2 याचिका दाखिल

I-PAC Case: कोलकाता में आई-पैक के कार्यालय और कंपनी के प्रमुख के आवास पर छापेमारी के बाद ईडी और बंगाल सरकार के बीच टकराव बढ़ गया है. ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, बंगाल के पुलिस महानिदेशक और कोलकाता के पुलिस कमिश्नर समेत अन्य लोगों के खिलाफ याचिका दाखिल कर दी है. ईडी के 3 अफसरों ने अलग से याचिकाएं दाखिल की हैं. क्या है उन याचिकाओं में, जानें.

I-PAC Case in Supreme Court: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस को राजनीतिक और चुनावी सलाह देने वाली कंपनी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) के ऑफिस और कंपनी के प्रमुख के आवास पर ईडी के छापे का मामला गरमा गया है. केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बंगाल की चीफ मिनिस्टर, डीजीपी और कोलकाता के पुलिस कमिश्नर को सुप्रीम कोर्ट में घसीट लिया है. ईडी ने सोमवार को सीएम, डीजीपी और पुलिस कमिश्नर व अन्य के खिलाफ 2 अलग-अलग याचिकाएं शीर्ष अदालत में दाखिल की हैं.

ममता बनर्जी, बंगाल के डीजीपी और कोलकाता के पुलिस कमिश्नर को ईडी ने बनाया पक्षकार

इसके साथ ही ईडी और बंगाल सरकार के बीच टकराव बढ़ गया है. ईडी ने इस प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट में 2 अलग-अलग याचिकाएं दायर की हैं. इन याचिकाओं में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राज्य पुलिस के डीजीपी राजीव कुमार, कोलकाता पुलिस आयुक्त मनोज वर्मा, कोलकाता पुलिस के डीसी प्रियब्रत राय को पक्षकार बनाया गया है. इस केस में एक अन्य केंद्रीय जांच एजेंसी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को भी पक्षकार बनाया है.

I-PAC Case in Supreme Court: 8 जनवरी को कोलकाता में ईडी ने 2 जगह की थी छापेमारी

ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में जो याचिकाएं दाखिल की हैं, उसमें 8 जनवरी 2026 को कोलकाता में हुई घटनाओं का विस्तृत उल्लेख किया गया है. ईडी का दावा है कि पुराने कोयला तस्करी मामले की जांच के सिलसिले में आई-पैक के सॉल्ट लेक स्थित कार्यालय और संस्था के प्रमुख प्रतीक जैन के लाउडन स्ट्रीट स्थित आवास पर तलाशी ली गयी थी. इसी दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मौके पर पहुंचकर तलाशी के बीच कुछ महत्वपूर्ण फाइल उठाकर ले गयीं.

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ममता बनर्जी ने दी थी सफाई- टीएमसी अध्यक्ष के रूप में गयी थी प्रतीक जैन के घर, सीएम की हैसियत से नहीं

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मीडिया के सामने कहा था कि वे फाइलें तृणमूल कांग्रेस की थीं और उनमें पार्टी की चुनावी रणनीति तथा संगठनात्मक जानकारियां थीं. उन्होंने आरोप लगाया था कि ईडी इन दस्तावेजों को जब्त कर राजनीतिक साजिश रच रही थी. मुख्यमंत्री का कहना था कि पार्टी के हितों की रक्षा के लिए वह वे फाइलें अपने साथ ले गयीं. ममता बनर्जी ने कहा है कि वह तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष के नाते प्रतीक जैन के घर गयीं थीं, मुख्यमंत्री की हैसियत से नहीं.

सीएम, डीजीपी और पुलिस कमिश्नर पर जांच बाधित करने का ईडी ने लगाया है आरोप

हालांकि, ईडी का आरोप है कि तलाशी के दौरान मुख्यमंत्री ने जांच में प्रत्यक्ष रूप से हस्तक्षेप किया. ईडी अधिकारियों के हाथ से फाइलें छीनीं. ईडी का यह भी दावा है कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने केंद्रीय एजेंसी के काम को बाधित किया. ईडी अधिकारियों को अपना काम करने से रोका गया.

ईडी के 3 अफसरों ने व्यक्तिगत रूप से दाखिल की है याचिका

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल पहली याचिका ईडी की ओर से दायर की गयी है, जबकि दूसरी याचिका ईडी के तीन अधिकारियों ने व्यक्तिगत रूप से दाखिल की है. इन याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि तलाशी के समय ईडी अधिकारियों के साथ धक्का-मुक्की हुई और उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश की गई. ईडी ने इसे जांच प्रक्रिया में गंभीर हस्तक्षेप बताया है.

कलकत्ता हाईकोर्ट में दर्ज हो चुकीं हैं 3 याचिकाएं

इससे पहले इस पूरे मामले को लेकर कलकत्ता हाइकोर्ट में भी 3 याचिकाएं दायर की जा चुकी हैं. इनमें एक याचिका ईडी की ओर से और 2 याचिकाएं पश्चिम बंगाल सरकार तथा तृणमूल कांग्रेस की ओर से दाखिल की गयी हैं. इन याचिकाओं पर शुक्रवार को सुनवाई होनी थी, लेकिन अदालत कक्ष में अव्यवस्था के कारण सुनवाई नहीं हो सकी. हाईकोर्ट ने अब इस मामले की अगली सुनवाई 14 जनवरी को तय की है.

अधिकारों के टकराव, संवैधानिक मर्यादा और जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता से जुड़ा मामला

हाईकोर्ट में मामला लंबित रहने के बावजूद ईडी का सोमवार को सीधे सुप्रीम कोर्ट जाना इस विवाद को और अधिक संवैधानिक और राजनीतिक रूप से गंभीर बना रहा है. यह मामला अब केवल जांच में बाधा का नहीं, बल्कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच अधिकारों के टकराव, संवैधानिक मर्यादाओं और जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता से भी जुड़ गया है.

कानूनी और राजनीतिक टकराव पर टिकी देश की निगाहें

ईडी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में उठाये गये सवालों पर अब शीर्ष अदालत का रुख तय करेगा कि तलाशी अभियान के दौरान कानून की सीमा का उल्लंघन हुआ या नहीं. इसमें मुख्यमंत्री से लेकर पुलिस के शीर्ष अधिकारियों की भूमिका क्या रही. पूरे देश की नजर अब इस हाई-प्रोफाइल राजनीतिक और कानूनी टकराव पर टिकी हुई है.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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