पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले भारत निर्वाचन आयोग (ECI) एक्शन मोड में आ गया है. चुनाव की तैयारियों की समीक्षा के लिए मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में आयोग की एक हाई लेवल टीम तमिलनाडु में थी. यहां चुनाव की तैयारियों का डिटेल रिव्यू किया. चुनाव आयुक्त डॉ सुखबीर सिंह संधू और डॉ विवेक जोशी के साथ आयोग ने स्पष्ट संदेश दिया है कि विधानसभा चुनाव 2026 कानून के दायरे में और निष्पक्ष तरीके से कराये जायेंगे.
राजनीतिक दलों की मांग – धनबल और फ्रीबीज पर लगे लगाम
समीक्षा यात्रा के दौरान चुनाव आयोग ने मान्यताप्राप्त राष्ट्रीय और राज्यस्तरीय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद किया. इसमें आम आदमी पार्टी, बसपा, भाजपा, माकपा (CPI-M), कांग्रेस और नेशनल पीपुल्स पार्टी, ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम, देशीय मुरपोक्कू द्रविड़ कषगम, द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम, नाम तमिलार काची और विदुथालाई चिरुथाईगल काची के प्रतिनिधि शामिल हुए. सभी ने अपने-अपने सुझाव निर्वाचन आयोग को दिये.
राजनीतिक दलों की चिंता
राजनीतिक दलों ने आयोग के समक्ष चुनाव की शुचिता को लेकर कुछ गंभीर चिंताएं भी जतायीं.
- धनबल और प्रलोभन पर प्रहार : राजनीतिक दलों ने आयोग से चुनाव के दौरान धनबल (Money Power) और मुफ्त उपहारों (Freebies) के वितरण पर रोक के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की है.
- फ्लाइंग स्क्वायड की संख्या बढ़ाने की मांग : चुनावी धांधली और कदाचार यानीचुनाव जीतने के लिए किये जाने वाले गलत काम को रोकने के लिए आयोग से उड़न दस्तों (Flying Squads) की संख्या बढ़ाने का अनुरोध किया गया है.
- त्योहारों का ध्यान : राजनीतिक दलों ने आग्रह किया है कि चुनाव की तारीखें तय करते समय राज्य के आगामी त्योहारों को ध्यान में रखा जाये.
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अधिकारियों को कड़ा निर्देश- ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाएं
राजनीतिक दलों के साथ संवाद के बाद मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने प्रवर्तन एजेंसियों के प्रमुखों आईजी (IGs), डीआईजी (DIGs), जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEOs) और पुलिस अधीक्षकों (SPs) के साथ एक विस्तृत मैराथन बैठक की. इसमें ईवीएम प्रबंधन, लॉजिस्टिक्स, चुनाव कर्मचारियों का प्रशिक्षण और कानून-व्यवस्था जैसे हर महत्वपूर्ण पहलू की समीक्षा की गयी.
अधिकारियों के लिए जारी हुआ कड़े डू एंड डोंट्स
- पूर्ण निष्पक्षता : सभी प्रवर्तन एजेंसियों और जिला अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे बिना किसी डर या पक्षपात के काम करें.
- कड़ी कार्रवाई : चुनाव में मतदाताओं को प्रभावित करने वाली किसी भी गतिविधि या प्रलोभन पर कड़ाई से नकेल कसने का आदेश दिया गया है.
- कानून का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं : आयोग ने रेखांकित किया है कि चुनावी नियमों और कानूनों से किसी भी तरह के बदलाव या उल्लंघन पर ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero-Tolerance) की नीति अपनायी जायेगी.
- मतदाताओं की सुविधा सर्वोपरि : आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों को विशेष निर्देश दिया है कि मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की सुविधा और पहुंच (Accessibility) सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता होनी चाहिए. इसके साथ ही, चुनाव प्रक्रिया के प्रति व्यापक जन-जागरूकता फैलाने और चुनाव कर्मियों को बेहतरीन (Robust) ट्रेनिंग देने पर भी जोर दिया गया है.
स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी होंगे चुनाव
आयोग का यह कड़ा रुख और तैयारियों की समय से पहले शुरुआत यह संकेत है कि बंगाल चुनाव 2026 में भी सुरक्षा और निष्पक्षता से कोई समझौता नहीं होगा. मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने भरोसा दिलाया है कि बंगाल समेत 4 राज्यों (तमिलनाडु, असम, पश्चिम बंगाल, केरल) और केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव पूरी तरह से स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराये जायेंगे.
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