तृणमूल के तीन सांसदों पर होगी कड़ी कार्रवाई
Updated at : 02 Nov 2019 2:22 AM (IST)
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कोलकाता : केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआइ) को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के तीन सांसदों और एक पूर्व सांसद के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए लोकसभा अध्यक्ष की अनुमति का लंबे समय से इंतजार करना पड़ रहा है. सीबीआइ को इन सांसदों के खिलाफ नारद स्टिंग ऑपरेशन मामले में चार्जशीट दाखिल करने से पहले लोकसभा अध्यक्ष […]
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कोलकाता : केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआइ) को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के तीन सांसदों और एक पूर्व सांसद के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए लोकसभा अध्यक्ष की अनुमति का लंबे समय से इंतजार करना पड़ रहा है. सीबीआइ को इन सांसदों के खिलाफ नारद स्टिंग ऑपरेशन मामले में चार्जशीट दाखिल करने से पहले लोकसभा अध्यक्ष की तरफ से अनुमति लेना जरूरी है. सूत्रों के मुताबिक तीन महीने बीत जाने के बाद भी सीबीआइ को यह अनुमति नहीं मिल सकी है.
जांच एजेंसी की तरफ से इस संदर्भ में अगस्त से अक्तूबर तक दो बार स्मरण-पत्र (रिमाइंडर लेटर) भी भेजा जा चुका है. टीएमसी के तीन सांसदों के खिलाफ पुख्ता सबूत मिलने के बाद सीबीआइ नारद स्टिंग मामले में चार्जशीट दाखिल करना चाहती है.
इसके साथ तृणमूल कांग्रेस के पूर्व लोकसभा सांसद व मौजूदा समय में राज्य सरकार में एक महत्वपूर्ण विभाग के मंत्री के खिलाफ भी चार्जशीट दाखिल करना चाहती है.
सीबीआइ सूत्रों का कहना है कि उनकी तरफ से पहला रिमाइंडर पत्र 19 अगस्त 2019 व दूसरा 16 सितंबर 2019 को भेजा गया. लोकसभा का शीतकालीन सत्र 19 नवंबर से शुरू होने जा रहा है. मौजूदा नियमों के मुताबिक केंद्रीय जांच ब्यूरो ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला से टीएमसी के तीन सांसदों और एक पूर्व सांसद के खिलाफ़ सख्त कार्रवाई करने की अनुमति मांगी है.
सीबीआइ सूत्रों के अनुसार, जल्द से जल्द चार सांसदों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर अन्य आरोपियों पर भी नकेल कसने की तैयारी सीबीआइ की टीम कर रही है.
सूत्रों का कहना है कि एजेंसी की तरफ से मुकुल राय का नाम चार्जशीट से अलग रखने का फैसला किया गया है. मुकुल राय 2017 में तृणमूल कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए थे. मुकुल राय से सीबीआइ इस वर्ष अब तक दो बार पूछताछ कर जा चुकी है.
सीबीआइ की तरफ से भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के प्रावधानों के तहत कथित आपराधिक षड्यंत्र के आरोप में एफआइआर दर्ज किया गया है. घूसखोरी और आपराधिक षड्यंत्र के आरोप में अधिकतम पांच से सात साल की सजा का प्रावधान है.
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